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अमेरिका में यह हुआ

Afghanistan joe biden

us army leave afghanistan अगर यह सचमुच हुआ, तो यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी सिस्टम सचमुच वैसा चुस्त- दुरुस्त नहीं है, जैसी धारणा दुनिया में बनी हुई है? अफगानिस्तान में पराजय ने अमेरिका के लिए असहज स्थिति पैदा की है। इसके बीच उसके बारे में बनी कितनी धारणाएं टूटेंगी, अभी हम नहीं जानते हैँ।

पेंटागन पेपर्स नाम से मशहूर वियतनाम युद्ध से संबंधित दस्तावेजों को सामने लाने वाले अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट ने दो साल पहले अफगान पेपर्स के खुलासे का दावा किया है। ताजा परिस्थितियों के बीच उस दस्तावेज में दर्ज बातें फिर चर्चित हुई हैँ। इससे जो बातें सामने आती हैं, उससे अमेरिका का पूरा सत्ता तंत्र कठघरे में खड़ा होता है। उससे अमेरिका के बारे में बनी ये धारणा टूटती है, वहां हर चीज की स्थापित प्रक्रिया है, जिसके तहत तथ्यों की पूरी पड़ताल करके फैसले लिए जाते हैँ। जबकि ‘अफगान पेपर्स’ बताते हैं कि अफगानिस्तान की असल हालत के बारे में अमेरिका के अधिकारियों ने अपनी सरकार को अंधकार में रखा। यानी उन्होंने सरकार को वो सच नहीं बताया, जो अफगानिस्तान के बारे में उन्हें मालूम था।

Joe biden

द वॉशिंगटन पोस्ट का कहना है कि ये सिलसिला 2002 से ही चल रहा था। जिन सरकारी दस्तावेजों का हवाला अखबार ने दिया है, उनमें अफगानिस्तान में अमेरिका की विफलता के बारे में ठोस जानकारियां मौजूद हैँ। अखबार ने खास कर दो हजार से ज्यादा पेज के एक ऐसे दस्तावेज का उल्लेख किया है, जिसे युद्ध में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने वाले लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया। जिन लोगों से बातचीत हुई, उनमें सैनिक जनरल, राजनयिक, सहायता कर्मी और अफगान सरकार के अधिकारी शामिल हैं। अखबार ने कहा है कि अमेरिकी कानून के तहत लगी रोक के कारण वह दस्तावेजों को सीधे प्रकाशित नहीं कर रहा है।

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लेकिन उसने उसका सार देश और दुनिया के सामने रखा है। उसके मुताबिक अधिकारियों के पास इस बात के ठोस सबूत थे कि अफगानिस्तान में युद्ध में उनके विजय होने की संभावना नहीं है। लेकिन वे उसके विपरीत सूचनाएं देते रहे। वे यह लगातार कहते रहे कि युद्ध में वे आगे बढ़ रहे हैँ। जबकि हकीकत इसके उलट थी और अधिकारी उस हकीकत को जानते थे। बातचीत के दौरान उन अधिकारियों ने अपनी शिकायत, असंतोष और असल हालत का बयान किया। कहा कि उनके पास अफगानिस्तान की मूलभूत समझदारी नही थी। उन्हें यही नहीं पता था कि हम क्या कर रहे हैँ। मगर ये सच उन्होंने सरकार को नहीं बताया, तो यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी सिस्टम सचमुच वैसा चुस्त- दुरुस्त नहीं है, जैसी धारणा दुनिया में बनी हुई है? अफगानिस्तान में पराजय ने अमेरिका के लिए असहज स्थिति पैदा की है। इसके बीच उसके बारे में बनी कितनी धारणाएं टूटेंगी, अभी हम नहीं जानते हैँ।

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