झूठ, मूर्खता का ट्रंप वायरस!

तथ्य जानें कि अमेरिका में अधिकांश राष्ट्रपति चुनाव रिपब्लिकन बनाम डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच भारी घमासान से हुए हैं। बहुत कम अंतर से भी जीत-हार का फैसला हुआ है। जॉन एफ कैनेडी 0.17 प्रतिशत वोटों के अंतर से रिचर्ड निक्सन से जीते थे तो जार्ज बुश -0.51 से अल गोर के मुकाबले जीते थे। ऐसे ही पिछले चुनाव में ट्रंप –2.9 प्रतिशत से हिलेरी क्लिंटन के मुकाबले जीते। पॉपुलर वोटों की कमी के बावजूद इलेक्टोरल वोट से जीतने की प्रतिस्पर्धा रही है तो कांटे की लड़ाई अमेरिकी चुनाव की आम खूबी है। 8-10 प्रतिशत से ज्यादा वोटों की जीत बिरली बात है। पर पिछले और मौजूदा वक्त का फर्क यह है कि सोशल मीडिया से झूठ की गंगोत्री दुनिया में, भारत में जैसे फूटी हुई है वैसे अमेरिका में भी फूटी हुई है। सोशल मीडिया के झूठ के पंख में डोनाल्ड ट्रंप को वह मौका मिला, जिससे अमेरिका, उसकी राजनीति, उसका लोकतंत्र भी बहुत बदला।

हां, डोनाल्ड ट्रंप से पहले तक जितने राष्ट्रपति चुनाव कांटे के मुकाबले में हुए वे सभी मर्यादा और गरिमा के साथ लड़े गए। मतलब डेमोक्रेटिक पार्टी के जॉन एफ कैनेडी 0.17 की कम मार्जिन में किंतु-परंतु निकालने के बजाय रिपब्लिकन पार्टी के रिर्चड निक्सन ने गरिमा के साथ तब हार मानी। ऐसे ही रिपब्लिकन पार्टी के बुश पॉपुलर वोटों में हारने के बावजूद आखिर में डेमोक्रेटिक पार्टी के अल गोरे ने बहुत गरिमा, भलेपन के साथ बुश को जीता हुआ माना। उस विरासत को डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के अपने झूठ से हिलेरी क्लिंटन के मुकाबले में खत्म किया। अब इस चुनाव में भी पहले दिन से डोनाल्ड ट्रंप चाहते रहे हैं कि जैसे वे कहें उस अनुसार राज्य और जिला काउंटी महामारी के वक्त का मतदान बंदोबस्त करें। ट्रंप की मंशा थी कि केवल मतदान के दिन ही अधिक से अधिक वोट पड़ें। क्यों? इसलिए कि समझदार, बुद्धिमान लोग वायरस के डर में वोट डालने कम निकलेंगे और ट्रंप के भक्त, वायरस से बेफिक्र मूर्खों का अधिकाधिक मतदान होगा।

यदि ऐसा होता तो ट्रंप भारी मतों से जीत चुके होते। लेकिन चुनाव की व्यवस्था राज्यों और काउंटी का मामला है तो उन्होने महामारी की चिंता में एडवांस पोस्टल वोट की तगड़ी व्यवस्था की और डेमोक्रेटिक पार्टी, बाइडेन टीम ने भी पहले वोट डालने का लोगों से आव्हान किया। नतीजतन रिकार्ड तोड़ मतदान हुआ। दोनों खेमों ने शिद्दत से वोट डाले। सदी का रिकार्ड तोड़ मतदान हुआ। लेकिन उससे खुश होने के बजाय मतगणना के पहले दिन ही डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल अपने को जीता हुआ बता दिया, बल्कि मतगणना में फ्रॉड होने का वह जुमला बोला। सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह डाली। इस तेवर से ट्रंपभक्तों ने फिर टिवटर आदि पर ट्रंप के वोटों को जलाते हुए वीडियो डालने शुरू किए। उस वीडियों को खुद ट्रंप के बेटे ने आगे फारवर्ड किया। बाद में ट्विटर कंपनी ने उसे न केवल फर्जी पाया, बल्कि उसे डिलीट भी किया लेकिन तब तक वह रूस और भारत की चैनलों में प्रसारित हो चुका था।

डोनाल्ड ट्रंप और उनके भक्त, उनकी सोशल मीडिया टीम 48 घंटों से हल्ला बनाए हुए हैं कि जिस राज्य में वे मतगणना में पिछड़े हुए हैं उसका गर्नवर बदमाश तो जहां वे बाइडेन से आगे है तो वह गर्वनर निष्पक्ष! ट्रंप समर्थकों की नाराजगी, मतदान केंद्रों के बाहर लड़ाई का माहौल, मतदान केंद्रों में ट्रंप के ऑब्जर्वरों को नहीं जाने दिए जाने जैसे तमाम झूठ ट्रंप टोली ने चलाए हुए है। इसलिए लगता है कि पॉपुलर वोट और इलेक्टोरल वोटों में जो बाइडेन जीत भी जाएं तब भी डोनाल्ड ट्रंप यह हल्ला बनाए रखेंगे कि उनके साथ धोखा हुआ है और अमेरिका बंटा रहेगा। तभी कोरोना वायरस के बाद आने वाले महिनों में अमेरिका डोनाल्ड ट्रंप के विलाप और झूठ की आंधी में भी घायल रहेगा।

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