अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौती

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की बढ़ती आशंकाओं के बीच सोने के दाम 2013 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। प्रति आउंस सोना (एक आउंस में 28.34 ग्राम) 1,588.13 डॉलर तक जा पहुंचा। दिसंबर की शुरुआत में सोने के दाम प्रति आउंस 1,450 डॉलर था। लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच में बढ़ते तनाव के बीच बीते सोने का दाम तेजी से बढ़ा है। गौरतलब है कि इराक में ईरान के सर्वोच्च जनरल की अमेरिकी हमले में मौत के बाद तो युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान ने अपने जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने की कोशिश की तो ईरान पर हमला किया जाएगा। जबकि ईरान सरकार पर जनता की तरफ से बदला लेने का बहुत ज्यादा दबाव है। शायद इसी का परिणाम है कि बराक ओबामा के जमाने में हुए परमाणु समझौते से ईरान हट गया है। दूसरी तरफ इराकी संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें अमेरिकी सैनिकों से देश छोड़ जाने को कहा है। इसके बाद ट्रंप ने प्रतिबंधों की धमकी दी है। मध्य पूर्व में मंडरा रहे अस्थिरता के बादलों का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर भी देखा जा रहा है।

चूंकि शेयर बाजार गिर रहा है, इसलिए लोग वहां से पैसा निकाल कर सोना खरीद रहे हैं। सोने के भाव में आए ताजा उछाल के पीछे यही प्रमुख कारण माना जा रहा है। कच्चे तेल के दाम में भी उछाल दर्ज किया गया है। मुद्रा विश्लेषकों का कहना है कि ईरान किसी ना किसी स्तर पर तो जवाबी कार्रवाई करेगा। इसीलिए जब तक यह तय नहीं हो जाता कि अमेरिका और ईरान के बीच हालात किस तरह के रहने वाले हैं, तब तक निवेशकों में चिंता बनी रहेगी। उनका मानना है कि इन दोनों देशों के तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर भी प्रभावित हो सकती है। खास तौर से तेल के दाम बढ़ने पर चुनौतियां बढ़ेंगी। विश्लेषकों के मुताबिक भू-राजनैतिक घटनाओं का पहले अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। इससे पहले जब भी तनाव बहुत बढ़ा है, तब देखा गया कि व्यापक बाजार पर उसका असर कुछ ही समय रहता है, जबकि स्थानीय बाजारों को उसके दुष्प्रभावों से निपटने में बड़ा समय लगता है। ये बात भारत के लिए राहत की नहीं हो सकती है। पहले से ही डांवाडोल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अचानक ये नया संकट आ खड़ा हुआ है।

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