आह ट्रंप, वाह ट्रंप!

वाह इसलिए क्योंकि दुनिया की एकमात्र महाशक्ति देश अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत के नेताओं को भी पीछे छोड़ दिया। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी अपनी सरकार और सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी की तारीफ में जो बातें नहीं कहीं, वो सारी बातें ट्रंप ने कही हैं। अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में उनको बोलते सुन कर लगा ही नहीं कि किसी दूसरे देश का नेता बोल रहा है। ऐसा लगा जैसे भारत सरकार के प्रचार विभाग ने प्रचार का कोई विज्ञापन तैयार किया है, जिसे सत्तारूढ़ दल का कोई नेता पढ़ रहा है। ट्रंप ने भारत के लोगों को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कितने करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, कितने घरों तक बिजली पहुंचाई है और कितने लोगों को अगले कुछ दिनों में गरीबी से बाहर निकालेंगे।

वाह इसलिए भी क्योंकि उन्होंने ‘ज्ञात इतिहास के सबसे बड़े लोकतंत्र’ की जम कर तारीफ की। हालांकि इस तारीफ से भारत को क्या हासिल होगा, उसका अंदाजा किसी को नहीं है। पर यह सही है कि पांच महीने पहले ह्यूस्टन के ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पद के लिए उनके प्रचार अभियान की शुरुआत करके उन पर जो अहसान किया था, उसका बदला उन्होंने ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम में बहुत कायदे से चुकाया है। इसका भी फायदा उनको इस साल के अंत में होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में मिल ही जाएगा।

इस वाह के बाद ‘आह ट्रंप’ इसलिए क्योंकि भारत सरकार की उपलब्धियों के बारे में प्रचार विभाग की प्रेस रिलीज पढ़ने के साथ साथ भारत आने से पहले उन्होंने भारत की सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और महापुरुषों के बारे में भी कुछ पढ़ लिया होता तो भाषण के दौरान नामों के उच्चारण की इतनी गलतियां नहीं होती। तब वे स्वामी विवेकानंद, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली आदि का नाम सही तरीके से बोल पाते। तब वे मोदी को चायवाला की बजाय चीवाला नहीं कहते और न ‘वेदों’ को ‘वेस्ताज’ कहते।  आह इसलिए भी क्योंकि भारत आने से पहले ट्रंप महात्मा गांधी के बारे में भी कुछ जान कर या पढ़ कर नहीं आए थे। अगर कुछ भी जाना होता तो साबरमती आश्रम की आगंतुक पुस्तिका में गांधी के बारे में कुछ तो लिखते! सोचें, दुनिया के सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक मुल्क का राष्ट्रपति भारत आता है, महात्मा गांधी के साबरमती के आश्रम जाता है और वहां आगंतुक पुस्तिका में गांधी का नाम तक नहीं लिख पाता है! हालांकि ताजमहल का दीदार करने के बाद उन्होंने उसे भारत की बहुलता वाली संस्कृति का प्रतीक बता कर उसकी तारीफ की पर गांधी के बारे में उनसे कुछ नहीं लिखा गया।

यह कितना शर्मनाक है कि साबरमती आश्रम में ट्रंप और उनकी पत्नी ने चरखा चलाया पर आगंतुक पुस्तिका में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि तक नहीं लिख पाए। ट्रंप ने आगंतुक पुस्तिका में अपने ‘महान दोस्त नरेंद्र मोदी’ का नाम लिखा और अपनी यात्रा के दौरान ‘शानदार स्वागत के लिए उनका आभार’ जताया। सोचें, और जरा फर्क देखें। पांच साल पहले 2015 की जनवरी में अमेरिका के तब के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आए थे। तब उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट जाकर आगंतुक पुस्तिका में क्या लिखा था और ट्रंप ने साबरमती आश्रम में क्या लिखा। बराक ओबामा ने 25 जनवरी 2015 को राजघाट की आगंतुक पुस्तिका में मार्टिन लूथर किंग जूनियर के हवाले से लिखा था कि भारत में आज भी गांधी की भावना जीवित है और वह पूरी दुनिया के लिए एक महान उपहार है। उन्होंने सभी देशों और दुनिया के सारे लोगों के गांधी की प्रेम और शांति की भावना के साथ जीने की उम्मीद भी जताई थी।

ट्रंप के भाषण के बाद आह इसलिए भी क्योंकि उन्होंने मोटेरा स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में पाकिस्तान की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ मिल कर आतंकवाद खत्म करने के लिए लड़ रहा है। ट्रंप ने कहा- पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और यह हमारे प्रयासों का नतीजा है कि बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सीमा पर सक्रिय आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को नष्ट करने में पाकिस्तान के साथ किए गए प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने तनाव खत्म करके दक्षिण एशिया के सभी देशों के बीच सद्भाव बनाने की उम्मीद भी जताई। यह कहना भी कितना साहस का काम है कि पाकिस्तान आतंकवाद खत्म करने के लिए प्रयास कर रहा है और उसे कामयाबी भी मिल रही है! यह भी सोचने की बात है कि दक्षिण एशिया के किन देशों के बीच तनाव है, जिसे कम करने की जरूरत है? असल में भारत पाकिस्तान के बीच पंचायत करने की बात ट्रंप ने इस अंदाज में कही।

आह इसलिए भी क्योंकि ट्रंप ने भारत के साथ होने वाली दोपक्षीय वार्ता से पहले ही मोटेरा स्टेडियम में घोषणा कर दी कि भारत और अमेरिका 21 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदे पर दस्तखत करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को तीन अरब डॉलर का सैन्य हेलीकॉप्टर बेचेगा। यानी वे अपना सामान बेचने भारत आए हैं और दोपक्षीय वार्ता से पहले ही बता भी दिया कि वे क्या ऑर्डर लेकर यहां से जाने वाले हैं। असल में इस सौदे को अमेरिका में पिछले साल मंजूरी मिल गई थी और भारत सरकार ने पिछले हफ्ते इसे मंजूर किया।

बहरहाल, ट्रंप के भाषण से जाहिर हो गया कि वे भारत को नहीं जानते हैं और जानने की कोशिश भी नहीं की है। वैसे यह भी कोई नई बात नहीं है क्योंकि अमेरिकी अखबारों में पहले ही छप चुका है कि वे नेपाल और भूटान को भारत का ही हिस्सा मानते थे। उनके भाषण से यह भी जाहिर हुआ है कि वे क्रिकेट नहीं जानते, बॉलीवुड की फिल्मों के बारे में नहीं जानते, स्वामी विवेकानंद को नहीं जानते, वेदों के बारे मे नहीं जानते और गांधी के बारे में तो नहीं ही जानते हैं। वे सिर्फ बिजनेस जानते हैं, अपना हित जानते हैं और अमेरिका का भी हित जानते हैं। और उसी हित को पूरा करने के लिए आए भी हैं।

2 thoughts on “आह ट्रंप, वाह ट्रंप!

  1. ट्रम्प के उच्चारण की अशुद्धता पर तो बहुत कुछ लिख दिया पर 10 वर्षों तक सरकार चलाने वाली और अनंत काल से सबसे पुरानी पार्टी चलाने वाली सोनिया गांधी हिंदी के कितने शब्दों का उच्चारण सही से कर पाती हैं? भारतीयता तक नहीं बोल पातीं पर उस पर कोई एक शब्द नहीं लिख पाता। राहुल गांधीजी विश्वेशरया नहीं बोल पाते, अपनी ही पार्टी के कुम्भाराम को कुम्भकर्ण बोल जाते, काश किसी की कलम इस पर भी चल जाती

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