आसान नहीं बाइडेन की राह

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से जो बाइडेन को आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया है। लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी में उनकी उम्मीदवारी से सब खुश नहीं हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रगतिशील धड़ा बाइडेन की उम्मीदवारी से खुश नहीं है। डेमोक्रेटिक पार्टी कई तरह की विचारधाराओं का एक गठबंधन है। इसमें एक तरफ जो बाइडेन जैसे उदारवादी हैं जो अमेरिका के मध्यमार्गी मतदाताओं को लुभाते हैं, तो दूसरी तरफ इसी पार्टी में बर्नी सैंडर्स और अलेक्जांड्रिया ओसासियो कोर्टेज जैसे वामपंथी नेता भी हैं। पर्यावरण और अन्य प्रगतिशील विचारों पर मुखरता ने ओसासियो कोर्टेज को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई है। लेकिन जब पता चला कि उन्हें राष्ट्रीय अधिवेशन में बोलने के लिए सिर्फ एक मिनट का समय मिलेगा, तो प्रगतिशील डेमोक्रेट्स नाराज हो गए। उनका दावा है कि पार्टी अपने ही एक नेता के साथ ठीक सलूक नहीं कर रही है। अपने समर्थकों में एओसी के नाम से मशहूर ओसासियो कोर्टेज उस छोटे से धड़े का हिस्सा हैं, जिसकी उदारवादी धड़े से नहीं बनती है। बर्नी सैंडर्स और अलेक्जांड्रिया ओसासियो कोर्टेज के बहुत से समर्थकों ने राष्ट्रीय अधिवेशन में अपनी अनदेखी होने का आरोप लगाया, क्योंकि वे जो बाइडेन की उम्मीदवारी को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं थे। ग्रासरूट संगठन प्रोग्रेसिव डेमोक्रैट्स ऑफ अमेरिका (पीडीए) ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एओसी को बोलने के लिए सिर्फ 60 सेकंड दिए गए, जबकि वे पार्टी की उभरती स्टार हैं। ट्वीट के मुताबिक वह युवा लोगों में बहुत लोकप्रिय हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी को युवाओं की जरूरत है। बहरहाल, अब बाइडेन ही नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में डॉनल्ड ट्रंप को टक्कर देंगे। डेमोक्रेटिक पार्टी के वर्चुअल राष्ट्रीय अधिवेशन में अमेरिका के पूर्व उप-राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2020 के चुनाव के लिए उम्मीदवार चुना गया। जो बाइडेन को देश भर के डेलिगेट्स का समर्थन मिला। बाइडेन पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में 2009 से 2017 तक अमेरिका के उपराष्ट्रपति रहे। वैसे पार्टी ने अपनी एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश की। यह तो जून में ही लगभग तय हो गया था कि बाइडेन को डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उम्मीदवारी मिलने जा रही है, क्योंकि बर्नी सैंडर्स समेत उनके सभी प्रतिद्वंद्वी रेस से हट गए थे। अब वो औपचारिकता पूरी हो गई है। लेकिन असल सवाल है कि क्या वे राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को हरा पाएंगे?

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