सच जीतेगा या ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप झूठ है। अमेरिका की फूट है। अमेरिका का यमराज है। अमेरिकी ज्ञान-विज्ञान-सत्य पर कलंक है। दुनिया में अमेरिकी चौधराहट खत्म कराने वाला भोंदू है। रूस के पुतिन, उत्तर कोरिया के किम, चीन के शी जिनफिंग, ब्राजील के बोलोसोनारो, भारत के नरेंद्र मोदी का हमसखा है। लोकतंत्र, मानवाधिकार, मानवीय गरिमा, मानवीय आजादी-स्वतंत्रता, वैज्ञानिकता और 21वीं सदी की आधुनिकता को सनक व उस्तरों से तबाह करने वाला भस्मासुर है। कोई माने या न माने डोनाल्ड ट्रंप ने आजादी की अमेरिकी मशाल में नस्लवाद, झूठे राष्ट्रवाद और गोरे बनाम कालों बनाम प्रवासियों बनाम लातिनी बनाम मुसलमानों के इतने विग्रह पैदा किए हैं कि अब अमेरिका वह अमेरिका नहीं है, जो 2016 से पहले अमेरिका का सत्य था।

तभी चार महीने बाद होने वाला अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव दुनिया के लिए निर्णायक है। इस सप्ताह के ताजा आकंड़ों के अनुसार जन सवर्क्षेणों में डोनाल्ड ट्रंप हार रहे हैं। उनके विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडेन फिलहाल 15 प्रतिशत आगे हैं। मतलब यदि आज चुनाव हो तो अमेरिका में डोनाल्डक ट्रंप हारेंगे।

वह अनहोनी होगी। इसलिए कि डोनाल्ड ट्रंप झूठ और प्रोपेंगेंडा के महागुरू हैं। जैसे 2016 में हुआ कि चुनाव से ऐन पहले के महीनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन आगे थीं और अधिकांश की राय में डोनाल्ड ट्रंप पीछे थे लेकिन वे सबको चौंकाते हुए जीते! तब ट्रंप की जो ताकत थी वह आज भी है। उनके कट्टर नस्लवादी गोरे इस सीमा तक पागल हैं कि मौत सामने है बावजूद वे ट्रंप के अनुयायी हैं। ऐसे लोग, ऐसे चेहरे वहां प्रदर्शन करते हुए मिल रहे हैं कि वायरस है तो क्या हुआ हम मास्क नहीं पहनेंगे। स्कूल खुलने चाहिए, समुद्री तट-बाजार खुलना चाहिए। मतलब हमें मौत की चिंता नहीं, वायरस के साथ जिएंगे। यह सब इसलिए क्योंकि भगवान डोनाल्ड ट्रंप की यही इच्छा है। वे सही हैं और बाकी सब गलत!

जाहिर है चार महीने बाद अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में सत्य बनाम झूठ के बीच फैसला होगा! उस फैसले से बाकी दुनिया जानेगी कि पोपुलिस्ट, लोकलुभावन जुमलेबाजी का महानायक कैसे मौत के सत्य के बावजूद लोकप्रिय बना रहता है? अमेरिका की मौजूदा हकीकत जगजाहिर है। वह कोविड-19 वायरस से नंबर एक प्रभावित देश है, जबकि अमेरिका का मतलब ज्ञान-विज्ञान- मेडिकल का एवरेस्ट है। बावजूद इसके यदि वायरस से लड़ने में अमेरिका फेल है। पूरे देश में चौतरफा कब्रें खुद रही हैं, संक्रमित लोगों से अस्पताल भरे हुए है। एक-एक दिन में 60-70 हजार लोग बीमार होते हैं। आर्थिकी का भठ्ठा बैठा है तो इस सबकी वजह में सत्य एक है और वह डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की असफलता है। ट्रंप के गंवार, मूर्ख, लापरवाह, झूठे प्रशासन ने अमेरिका को वायरस की भट्ठी बना रखा है। तभी चार महीने बाद अमेरिकी जनता के लिए इस फैसले का मौका है कि ट्रंप निकम्मे हैं या कामयाब!

सोचें, हकीकत मौत की! बरबादी की! दुनिया के नंबर एक देश की दो कौड़ी की वैश्विक औकात बनने की है बावजूद इसके संभव है जो अमेरिकी गोरे फैसला बताएं कि वाह ट्रंप, वाह देश को गजब नेतृत्व दिया!उस नाते अपने हिसाब से नवंबर के महीने में झूठी राजनीति को मारने का या तो दुनिया को वैक्सीन मिलेगा या फिर झूठ का वायरस चार साल का नया जीवन पाएगा। जो हस्र डोनाल्ड ट्रंप का होगा वह दुनिया के बाकि झूठे-मूर्ख राष्ट्रपतियों-प्रधानमंत्रियों पर भी लागू होगा।

‘क्षण 2020-21’ का अनुभव दो तरह के वायरस से है। एक वायरस कोरोना का है और दूसरा झूठ का। कोरोना वायरस लोगों को बेमौत, जानवर की मौत मार रहा है तो झूठ का वायरस लोगों में अज्ञान बना तिल-तिल कर मारता है। पिछले चार सालों की ईमानदारी से यदि कोई समीक्षा करे तो यह हकीकत निर्विवाद उभरेगी कि चार सालों में झूठ के वायरस ने अमेरिका को जितना बरबाद किया है उतना इतिहास में वह कभी नहीं हुआ। यह तथ्य खास तौर पर वैश्विक जमात में अमेरिका की प्रतिष्ठा पर सौ टका खरा है। बगल के कनाडा से नीचे के मेक्सिको, लातिनी अमेरिकी देशों, यूरोपीय संघ आदि उन तमाम करीबी देशों में अमेरिकी नेतृत्व या तो खत्म है या उससे एलर्जी बनी हुई है, जिनसे कभी याराना था।। अमेरिका के राष्ट्रपति को अच्छी संगत वाला अच्छा नेता नहीं माना जाता है, बल्कि मवाली किस्म के नेताओं में से वह एक नेता है। कनाडा के ट्रूडो हों या जर्मनी की मर्केल, फ्रांस के मैक्रों सब डोनाल्ड ट्रंप से बात ही करना पसंद नहीं करते हैं। अमेरिका की वैश्विक मामलों में न धमक है और न सम्मान! पिछले सौ सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ जो यूरोप, कनाडा याकि आजादीपसंद और लोकतांत्रिक दुनिया में अमेरिका बेमतलब हुआ पड़ा है। और तो और अमेरिका के भीतर वे तमाम लोग भी निराश-हताश-दुखी हैं, जिनकी ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान-सत्य की तासीर में अमेरिका बना है। खुद डोनाल्ड ट्रंप के लोगों ने निऱाशा के अनुभव में उन्हें जैसे छोड़ा है वह प्रमाण है कि डोनाल्ड ट्रंप की लीडरशीप कैसी है और वे अमेरिका की व्यवस्था, उसकी आत्मा को मारने वाले कैसे वायरस हैं।

ट्रंप का झूठ छाप वायरस पेचीदा है। इस वायरस के स्ट्रेन्स को जितना खोजेंगे उलझते जाएंगे। कोरोना वायरस के स्ट्रेन्स इतने फैले हुए नहीं होंगे जैसे झूठ की राजनीति के इस वायरस के हैं। एक झूठ के पीछे हजारों झूठ की चेन और उसके नित नए रंग-रूप को न क्रमबद्ध करना संभव है और न उसका एंटीडोज बना सकना संभव है और न वैक्सीन बना सकना।

हां, अमेरिका के चुनाव में ट्रंप इसलिए नहीं हारेंगे कि उनके विरोधी उम्मीदवार जो बाइडेन सत्य की वैक्सीन या इलाज का एंटीडोज हैं। वे यदि हारे तो इसलिए हारेंगे क्योंकि लोगों का बहुमत श्मशान की धुनी से तौबा कर चुका होगा।  ट्रंप और उनके झूठ ने अमेरिका को जहां पहुंचाया है वह यदि कब्रिस्तान है तो लोग आखिर कितने दिनों भूत-प्रेत और झूठ के वशीकरण में रहेंगे? अमेरिका के कठमुल्ले गोरे भी आजादी का भभका लिए हुए हैं वे भारत के हिंदुओं की तरह गुलामी के डीएनए लिए नहीं हैं तो वे अपनी मुक्ति पहले मौके पर ही प्राप्त कर सकते हैं। इन गोरों को बंदूक रखना पसंद है, ये मौत के खतरे में भी मास्क नहीं पहनने, मनमर्जी जीवन जीने की जिद्द लिए हैं तो ट्रंप के झूठ को ठेंगा भी बता सकते हैं।

पर जैसा मैंने ऊपर लिखा ट्रंप छाप झूठ वायरस ऐसे घातक-जटिल विषाणु-स्ट्रेन्स लिए हुए है कि चार महीने की बची अवधि में कुछ भी हो सकता है। ट्रंप अचानक रूस, चीन, झूठे सोशल मीडिया से फिर बतौर महानायक गोरों को लुभा सकते हैं। दुबारा राष्ट्रपति बन सकते हैं। हां, रूस-चीन-उत्तर कोरिया याकि दुनिया की दानवी ताकतें डोनाल्ड ट्रंप को दुबारा राष्ट्रपति चाहेंगी। भला क्यों? इसलिए कि पिछले चार सालों में जब वे अमेरिका की वैश्विक इमेज, चौधराहट में सत्यानाश और घर के भीतर व यूरोप जैसे लोकतांत्रिक पश्चिमी घरौंदे में विभाजन, मतभेद बनवा चुके हैं तो ऐसा ट्रंप प्रशासन रूस, चीन, उत्तर कोरिया जैसे दानवों के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायी? ट्रंप जब झूठ के देवता हैं और सत्य की दुनिया को झूठा बनाने का काम करते हुए हैं तो पुतिन, शी जिनफिंग क्यों नहीं चाहेंगे कि वे काम करते रहें? तभी अगले चार महीनों में ट्रंप छाप झूठ वायरस गुपचुप कई जगहों से ताकत पाएगा। सत्य की जीत आसान नहीं होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares