मोदीजी, ट्रंप से सोचिए!

हां, मोदीजी सोचिए डोनाल्ड ट्रंप का क्या इतिहास बना? फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री याकि दुनिया के तमाम भले देशों के सत्यवादी लोगों में ट्रंप की कैसी थू-थू है? उनके भक्त अमेरिकी गोरों पर कैसे थूका जा रहा है? क्या ट्रंप भक्त गोरों की गोलबंदी से अमेरिका गृहयुद्ध का अखाड़ा नहीं बना? अमेरिकी संसद पर गोरे ट्रंप भक्तों का हमला क्या गृहयुद्ध का नजारा नहीं था? क्या इतिहास ट्रंप को 56 इंची छाती वाला अमेरिकी नेता कहेगा या झूठा, अहंकारी, मूर्ख और एक विभाजक राष्ट्रपति? ट्रंप और उनके भक्तों ने झूठ, नफरत में अमेरिकी नागरिकों को जैसे बांटा उससे अमेरिका ताकतवर बना या उसके दुश्मन देश रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया क्या आज जश्न मनाते हुए नहीं हैं?

हां, डोनाल्ड ट्रंप ने भी आपकी तरह इस आत्ममुग्धता में अकेले राज किया कि मैं हूं सर्वज्ञ। मैं सब जानता हूं, मेरे से वोट और मेरे से ही सत्ता। मेरे हाथ में सुदर्शन, गोवर्धन पर्वत। मैं दिन को रात कहूंगा तो भक्त भी रात मानेगा। मैं ताली-थाली बजाने के लिए कहूंगा तो देश वहीं करेगा। मैं महान! मेरी महानता से अमेरिका महान! और मुझे मानने वाले, मेरे समर्थक ‘बहुत खास’ अमेरिकी! बाकी सब दुश्मन। मैं जब कहूंगा कि अश्वेत आंदोलनकारी वामपंथी, देश के दुश्मन तो मेरा कहा सच्चा। वे चाहे जो कानून बनाएं, वे महामारी से चाहे जैसे निपटें, उनका हर फैसला महान! वे अब्राहम लिंकन जैसे महान राष्ट्रपति!

मैं और मैं! मेरे ट्विटर, मेरे सोशल मीडिया, मेरे भाषण जनता के लिए अमृत वचन! मैं सुप्रीम कोर्ट में अपने चमचे जज बैठाऊंगा। मेरी रिपब्लिकन पार्टी मेरी गुलाम। मेरे से पार्टी को वोट और सत्ता तो बाकी नेताओं का जीरो मतलब। सब मेरी आरती उतारेंगे। सब मेरे गुलाम। मैं कुछ भी करूं, कितनी भी बरबादी, गलती करूं कोई नेता, कोई सांसद, कोई मुख्यमंत्री, गर्वनर चूं नहीं करेगा, बोलेगा नहीं। मेरे से अमेरिकी लोकतंत्र और मैं उसके साथ चाहे जैसा खेल खेलूं, मेरी मर्जी!

मैं और मैं! सचमुच डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद दिल-दिमाग को चौबीसों घंटे आत्ममुग्धता के उस घेरे में बांधे रखा, जिसमें सब कुछ खुद की दिमागी फितरतों, झूठों से प्रायोजित था। हर दिन, हर पल ट्रंप ने अपनी हेडिंग, अपना नैरेटिव बनाने के लिए इतनी तरह के झूठ बोले कि वे झूठ में ही जीने लगे। झूठ के चश्मे में सब हरा-भरा। तभी चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने चुनाव जीता माना। डोनाल्ड ट्रंप का विश्वास (मुगालता) था कि उनके पास इतनी ताकत है, वे ऐसे सर्वशक्तिमान हैं, जिससे उनकी सत्ता निरंतर बनी रहेगी। वे राष्ट्रपति भवन कभी खाली नहीं करेंगे। वे अमेरिकी इतिहास के आजीवन राष्ट्रपति रहेंगे। ट्रंप की इस आत्ममुग्धता की कोर वजह झूठ बोल-बोल कर भक्तों को रिझाने, उन पर जादू की जादूगरी थी।

पर मोदीजी, यह अहमन्यता, लोगों को मूर्ख बनाने की जादूगरी खुद ट्रंप के लिए कैसी छलावा साबित हुई, और दुनिया का सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्रपति किस इतिहासजन्य कालिख के साथ विदा हो रहा है, क्या इसका सत्य हाल की घटनाओं से साबित नहीं है? डोनाल्ड ट्रंप क्या थे और क्या हो गए और आगे किस दुर्दशा का सामना करेंगे, इसकी दास्तां इस पृथ्वी के लोकतांत्रिक नागरिक इतिहास की बिरली कथा है। डोनाल्ड ट्रंप ने आधुनिक इतिहास के स्थापित लोकतंत्र में नागरिकों में भय-खौफ बना उनकी सुरक्षा के झूठ पर अपनी जो भक्ति बनवाई और लोकतंत्र को खोखला बनाने, देश को मारने की जो राजनीति की वह कुछ मायनों में नई बिरली दास्तां है। आखिर डोनाल्ड ट्रंप के पतन का मामला तानाशाही इतिहास वाले हिटलर, स्तालिन, पुतिन या शी जिनफिंग से अलग और अधिक कलंकित है। बावजूद इसके ट्रंप और उनके भक्त अपने को अभी भी महान मान रहे होंगे। इसलिए कि झूठ में जीने वाले न केवल मनोविकारी, पागल हो जाते हैं, बल्कि वे फिर सचमुच अपने घर में आग लगाने वाले भी पागल होते हैं।

तभी छह जनवरी 2021 के दिन भक्तों के संसद पर हमले के बाद अमेरिका में बहस है कि नए राष्ट्रपति की शपथ में 14 दिन बाकी हैं और भक्तों के साथ उनके कमांडर-इन-चीफ ट्रंप झूठ की जिंदगी जीते हुए है तो इसके पागलपन में और कोई भयावह बरबादी नहीं हो! ध्यान रहे आत्ममुग्धता, झूठ में जीने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से मनोविकारी होता है, वह फिर बतौर राष्ट्राध्यक्ष मानसिक तौर पर अनफिट है, इस हकीकत की चिंता में अमेरिकी संविधान ने धारा 25 की व्यवस्था में कैबिनेट के सदस्यों को राष्ट्रपति को हटाने का अधिकार दिया हुआ है। ट्रंप के मंत्रियों में विचार हुआ बताते हैं कि पागल राष्ट्रपति कहीं कुछ और अनहोनी न कर दे। ट्रंप मानसिक तौर पर अनफिट, झूठ में देश को बरगलाते, गृहयुद्ध बनवाते पागल हैं तो उनका कुछ दिन और राष्ट्रपति रहना बहुत खतरनाक है।

हां, पूरा अमेरिका और दुनिया के तमाम बुद्धिमान-भद्र-सभ्य लोग अब डोनाल्ड ट्रंप और उनके भक्तों को पागल करार दे रहे हैं। अमेरिका के लिए खतरा, अमेरिका का कलंक मान रहे हैं।

मोदीजी, ये वही ट्रंप है, जो चार सालों से आपके नंबर एक वैश्विक मित्र हैं। जिनके लिए आपने 22 सितंबर 2019 को ह्यूस्टन के हाउडी मोदी कार्यक्रम में अपने हजारों अमेरिकी भक्तों से आह्वान किया था कि ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’! वह ट्रंप आज न केवल बहुसंख्यक नागरिकों के वोट से हारा हुआ है, बल्कि वह अमेरिका में देश को बांटने वाला, संसद पर हमला करवाने वाला, गृहयुद्ध बनवाने वाला मनोविकारी, पागल बूझा जा रहा है। वह अमेरिकी इतिहास में कभी न भुलाए जाने वाला कंलकित राष्ट्रपति है। इतने कम समय में ऐसा पतन! नवंबर से पहले अजेय माना जाने वाला राष्ट्रपति और इस जनवरी में हारा, अछूत, मनोविकारी एक कलंकित नेता!

मोदीजी, सोचिए ऐसा कैसे? संभव है आप अपनी आत्ममुग्धता में मानें कि ट्रंप की लापरवाही थी, अतिआत्मविश्वास था जो वह चुनाव हार गया। मुझसे जाना होता कि मतदान से पहले भक्तों की सुनामी बनाने के क्या-क्या नुस्खे हैं तो हारने की नौबत ही नहीं आती। पर मोदीजी चुनाव जीतना, सत्ता में लगातार बैठे रहना, और जनता पर जादू बनाए रख जनता की भक्ति से अब्राहम लिंकन महान नहीं हुए थे, न दगाल, माग्ररेट थैचर, रोनाल्ड रीगन, चर्चिल (भारत में देश की तकदीर-तस्वीर बनाने वाले उदाहरण में नेहरू, पीवी नरसिंह राव के अलावा कहां नाम?) हुए थे। कथित जादूगर राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री हमेशा इतिहास की कूडेदानी का कचरा हैं, जिनके नाम देशों की तुगलकी बरबादी के पर्याय हैं। हां, इतिहास के कचरे में ट्रंप का पर्याय होगा एक आत्मुग्ध झूठा शासक, जिससे अमेरिका में जान-माल-प्रतिष्ठा की महामारी वाली क्षति थी और देश विभाजित था!

क्या यह सच नहीं है मोदीजी?

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