nayaindia CBI Politics and Governments सीबीआई, राजनीति और राज्य सरकारें
बेबाक विचार | रिपोर्टर डायरी| नया इंडिया| CBI Politics and Governments सीबीआई, राजनीति और राज्य सरकारें

सीबीआई, राजनीति और राज्य सरकारें

scamsters 23 thousand crores

2018 से लेकर अब तक आठ राज्य सरकारों ने सीबीआई को 150 मामलों की जांच करने की अनुमति नहीं दी है। इतनी ही सरकारों ने सीबीआई को जांच करने की दी गई आम सहमति वापस ले ली है। न्यायाधीश एस के कौल ने इस स्थिति पर नाखुशी जताते हुए यह मामला प्रधान न्यायाधीश एन वी रमना को भेजा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से पूछा था कि उसे राज्यों में जांच करने में क्या दिक्कतें पेश हो रही है?  

पिछली तमाम सरकारों ने जिस तरह से सीबीआई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टीगेशन) का उपयोग व दुरुपयोग किया है उसे देखकर अपने को लगने लगा था कि सीबीआई सचमुच मानो प्रधानमंत्री का दरोगा है जिसके जरिए वह अपने विरोधियों को निपटाते है। खुद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पिंजरे में बंद तोता कहा था। मगर अब कुछ समय से लगने लगा है कि सीबीआई की पहले जैसी हैसियत नहीं रही है। इसकी वजह यह है कि अनेक राज्य सरकारों ने अपने यहां सीबीआई को जांच करने की अनुमति न देकर उसे मानो होमगार्ड की हालत में ला खड़ा कर दिया है। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2018 से लेकर अब तक आठ राज्य सरकारों ने सीबीआई को 150 मामलों की जांच करने की अनुमति नहीं दी है। इतनी ही सरकारों ने सीबीआई को जांच करने की दी गई आम सहमति वापस ले ली है। न्यायाधीश एस के कौल ने इस स्थिति पर नाखुशी जताते हुए यह मामला प्रधान न्यायाधीश एन वी रमना को भेजा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से पूछा था कि उसे राज्यों में जांच करने में क्या दिक्कतें पेश हो रही है व लोगों को सजा मिल सके इसके लिए उसने क्या कदम उठाए है?

याद दिलाना जरुरी हो जाता है कि आमतौर पर सीबीआई को पहले तमाम राज्य सरकारें आम सहमति देती आयी है। यह सहमति आमतौर पर राज्यों में काम करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों की भ्रष्टाचार संबंधी जांच की होती है। यह न मिलने पर सीबीआई को औपचारिक रुप से राज्य सरकार को आवेदन भेजकर यह सहमति लेनी पड़ती है। सीबीआई का गठन दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेबलिशमेंट एक्ट 1946 के तहत किया गया था व उसे राज्य में घटित अपराध की जांच करने के पहले संबंधित राज्य सरकार से स्वीकृति लेनी पड़ती है। उसे केंद्र शासित प्रदेशों में जांच के लिए अनुमति लेने की जरुरत नहीं पड़ती है। यही स्थिति रेलवे के साथ भी है। अब आठ राज्यों महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड व छत्तीसगढ़ और मिजोरम ने पहले सीबीआई को दी गई जांच की आम सहमति वापस ले ली है। आज जहां मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट की सरकार है जो राजग का धड़ा है पर इस राज्य ने 2015 में ही सीबीआई को जांच की दी गई अनुमति वापस ले ली थी व मौजूदा सरकार ने भी वही स्थिति बने रहने दी और उसे पुनः जांच करने की अनुमति प्रदान नहीं दी।

CBI arrests naval officers

Read also आर्थिकी की असलियत क्या?

सन् 2018 में ममता बनर्जी की सरकार ने अपनी पूवर्वती वाम मोर्चा की सरकार द्वारा सीबीआई को जांच के लिए दी गई सहमति वापस ली व कुछ ही घंटों में आंध्रप्रदेश की तत्कालीन चंद्रबाबू सरकार ने भी ऐसा ही फैसला लिया। ममता बनर्जी ने भाजपा पर सीबीआई द्वारा अपना राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। चंद्रबाबू की जगह वाईएस जगन मोहन रेड्डी की सरकार 2019 में आंध्रप्रदेश में सत्ता में आई और उसने सीबीआई की जांच की फिर सहमति प्रदान की। सन् 2019 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने सीबीआई को दी गई सहमति वापस ली। उसके बाद 2020 में पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान व झारखंड, केरल ने भी यही किया। यह स्वीकृति वापस लेते समय राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार पर अपने हितों के लिए सीबीआई के इस्तेमाल करने के आरोप लगाए।

हालांकि पश्चिमी बंगाल में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच करने की अनुमति प्रदान कर दी जबकि सीबीआई पूरे मामलों की जांच कर सकती है जहां उसे पहले जांच की अुनमति थी व बाद में वापस ले ली गई। वहां वह किसी पुराने मामले की जांच कर सकती है या नहीं यह एक अबूझ सवाल है। मगर ऐसी हालत में जांच के पहले सीबीआई को स्थानीय अदालत से सर्च वारंट लेना पड़ता है। मगर जहां किसी अपराधी को रंगो हाथों पकड़ा गया हो वहां सीबीआई की जांच पड़ताल व तलाश लेने के लिए सर्च वारंट की जरुरत नहीं पड़ती।

कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का सहारा लेकर सीबीआई दिल्ली में नया मामला दर्ज कर जांच शुरु कर सकती है। सन् 11 अक्तूबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि अब किसी राज्य में सीबीआई को दी गई अपनी आम सहमति वापस ले ली है तो यह एजेंसी दिल्ली में केस दर्ज करके उस मामले की जांच शुरु कर सकती है। उसे यह साबित करना होगा कि उस अभियुक्त या अपराधी का किसी तरह से दिल्ली से भी कोई संबंध था अतः अब सीबीआई राज्य की सहमति के बिना भी जांच कर सकती है।

1998 में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सीबीआई को दी गई आम सहमति लेने की कोशिश की। वे जनता दल सरकार के मुख्यमंत्री थे। मगर जब कुछ समय बाद कांग्रेस की एसएम कृष्णा सरकार सत्ता में आयी तो उसने पिछली सरकार के इस आदेश को रद्द नहीं किया। उस समय मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक के गृहमंत्री थे व अब राज्य सभा में विपक्ष के नेता है। वहां की राज्य सरकारों ने आठ साल तक सीबीआई को सहमति नहीं दी व हर मामले में राज्य सरकार से सहमति हासिल करके ही जांच पड़ताल व तलाशी लेनी पड़ती थी। 2018 में केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी कानून 1988 में परिवर्तन कर सीबीआई से संबंधित तमाम अधिकार अपने हाथों में ले लिए। उसके पास तमाम प्रशासनिक अधिकार भी आ गए। इस संशोधन के बाद सीबीआई के लिए किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को दर्ज करने के पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया।

इससे पहले कानून संयुक्त सचिव या उससे बड़े स्तर के अफसर के भ्रष्टाचार की जांच के लिए ही एजेंसी को सरकार की अनुमति लेनी जरुरी होती थी। मगर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस नियम को रद्द कर दिया था। इसके पहले सीबीआई उन्हीं अफसरों की भ्रष्टाचार की जांच कर सकती थी जिनकी जांच तत्कालीन सरकार करवाना चाहती है। सरकार द्वारा बनाया गया राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम 2008  इस एजेंसी को तलाशी की जबरदस्त ताकत देता है। यह कानून पूरे देश भर में लागू होता है। एनआईए देश भर में कहीं भी किसी की जांच कर सकती है। अब जिस तरह से अनेक राज्य सरकारें खुले आम सीबीआई के खिलाफ संघर्ष कर रही है उसकी एक बड़ी वजह इस एजेंसी के द्वारा अपने आका खासतौर से सत्तारुढ़ दल के प्रधानमंत्री द्वारा अपने विरोधी राजनीतिज्ञों को निपटाने के लिए इस एजेंसी का दुरुपयोग करना है। यहां यह भी ध्यान दिलाना जरुरी हो जाता है कि केंद्र में गठबंधन की सरकार व राज्यों में विभिन्न दूसरे दलों की सरकारें हैं। भले ही पिछले आम चुनावों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था फिर भी उसने चुनाव में जिन दलों के साथ गठबंधन किया था उसके कारण राजग बना रखा है।

Leave a comment

Your email address will not be published.

sixteen − eleven =

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
CM योगी का बड़ा फैसला- धार्मिक स्थलों से उतारे गए लाउडस्पीकर स्कूलों में लगाए जाएंगे…
CM योगी का बड़ा फैसला- धार्मिक स्थलों से उतारे गए लाउडस्पीकर स्कूलों में लगाए जाएंगे…