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अस्पताल लूट का अड्डा’ व डाक्टर का धीरज

तभी एक ओर से युवक ने वहां प्रवेश किया और अपने टेलीफोन के फोकस की जद में लेते हुए फिल्म बनाने लगा। वह जोर जोरे से कह रहा था कि यह अस्पताल तो लूट का अड्डा है। इन्होंने हमारे मरीज को भर्ती करने के पहले ही हम लोगों से 20 लाख रुपए ले लिए और यह तो मरीज की देखभाल भी नहीं कर रहे। उसके साथ खड़ा दूसरा व्यक्ति जो कि शक्ल से ही विलेन लग रहा था डाक्टर को बाहर आकर देख लेने की धमकी देने लगा।…. Hospital patient and doctor

एक दिन आईसीयू में रखने के बाद जब मेरी हालत में थोड़ा सुधार हुआ तो अगले दिन डॉक्टरों ने मुझे क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में भेज दिया। यहां एक बड़े हाल में 8-10 बिस्तर लगे हुए थे। पर सबसे बड़ा आराम यह था कि यहां पर डाक्टर नर्से व उनका दूसरा स्टाफ 24 घंटे तैनात रहता था। बैड के पीछे की दीवार पर आक्सीजन के साथ दिल की गति व नब्ज नापने वाले बहुत से उपकरण लगे हुए थे व अपनी सीट पर बैठे हुए ही डाक्टर व दूसरा स्टाफ दूर से ही मरीज की हालत जान लेते थे व मरीज के लिए कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आता था।

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एक दिन मेरे साथ वाले बैड पर एक मरीज लाया गया जिसका दिल का आपरेशन हुआ था। डाक्टर ने मेरा बैड बदल दिया क्येांकि आपरेशन थियेटर से उसे लाए जाने के बाद उसके बिस्तर के चारों ओर डाक्टरों व उपकरणों की भरमार लगी थी। मैंने वहां चल रही गपशप के बीच आंखे बंद करने की कोशिश की मगर रात के करीब 1 बजे वहां हंगामे के कारण फिर आंख खुल गई। मैं सामने के बिस्तर पर लेटा हुआ था। उसके साथ स्थित एक बिस्तर पर कोई गंभीर रुप से बीमार लेटा था। मैंने देखा कि उसे देखने आए कुछ लोग तेजी से हल्ला मचा रहे थे। अचानक एक महिला और दो पुरुष जो कि देखने में ही थोड़ा असभ्य से लग रहे थे उसके बैड के पास आकर हल्ला मचाने लगे।

मैं बड़ी मुश्किल से अपने बिस्तर पर बैठ गया। स्त्री व पुरुष उस व्यक्ति के लड़की व दामाद होने का दावा कर रहे थे। उस बीमार की सांस बहुत कम चल रही थी। मगर उनके साथ आया व्यक्ति डाक्टरों से उसे डिस्चार्ज करने के लिए लड़ाई लड़ने लगा। उसने वहां मौजूद डाॅक्टर से पूछा कि अगर आप इसे डिस्चार्ज कर देते हैं तो यह कितनी देर तक जिंदा रहेगा। डाॅक्टर ने उससे कहा कि इसकी हालत बहुत नाजुक है और अगर मैंने डिस्चार्ज कर दिया तो इनका बचना मुश्किल है। वैसे भी इतनी रात गए आप इन्हें इस हालत में कहां लेकर जाएंगे। अतः इन्हें यहां से ले जाने का खतरा न मोल ले।

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तभी एक ओर से युवक ने वहां प्रवेश किया और अपने टेलीफोन के फोकस की जद में लेते हुए फिल्म बनाने लगा। वह जोर जोरे से कह रहा था कि यह अस्पताल तो लूट का अड्डा है। इन्होंने हमारे मरीज को भर्ती करने के पहले ही हम लोगों से 20 लाख रुपए ले लिए और यह तो मरीज की देखभाल भी नहीं कर रहे। उसके साथ खड़ा दूसरा व्यक्ति जो कि शक्ल से ही विलेन लग रहा था डाॅक्टर को बाहर आकर देख लेने की धमकी देने लगा। युवा डॉक्टर उसकी बात सुनकर आवेश में वहां से निकलने वाला ही था। मैंने सारी ताकत जोड़कर जोर से डाॅक्टर से अनुरोध किया कि वे उसकी धमकी में आकर बाहर न निकले। मुझे उसकी नीयत ठीक नहीं लग रही है।

मैंने उनसे कहा कि अगर उसने बाहर आकर आप पर हमला कर दिया तो मेरे जैसे व्यक्ति जो कि खुद बिस्तर पर से भी नहीं उठा पा रहा है वह आपको बचाने कैसे आयेगा। बेहतर यही होगा कि आप पुलिस व सुरक्षा बलों को फोन कर दे। डाक्टर को धमकी देने वाले बाहर चले गए व धमकी देने के साथ साथ डिसचार्ज करने की मांग भी करते रहे। कुछ देर बाद वहां आधा दर्जन पुलिस वाले सुरक्षा कर्मी आ गए। जिस सीसीयू में स्वच्छता के कारण डाॅक्टर तक जूतों पर प्लास्टिक का कवर कर आते है वहां बाहर से पुलिसवाले व दूसरे लोग शोर सुनकर जूते पहने गंदे पांव आ रहे थे। करीब 2-3 घंटे तक हंगामे के कारण मामला ठंडा पड़ा।

इस पर डाक्टर साहब ने मुझसे कहा आप तो पत्रकार हैं। आपने अपनी आंखों से देखा लिया होगा कि कुछ मरीजों के संबंधी हमें किस तरह से धमकी देते हैं व मारपीट पर उतर आते हैं। जब आप ठीक हो जाएं तो इस घटना का जिक्र जरुर करिएगा। मैं कुछ दिनों बाद पहले से बेहतर होकर घर आ गया। एक यह घटना मेरे मन में कौंधती रही और मैंने सोचा कि डाॅक्टरों को कितनी जद्दोजहद से गुजरना पड़ता है।

कोविड के दौरान तो टीवी पर इस तरह की मारपीट की घटनाएं होती देखी थी मगर यहां तो यह मेरे सामने ही घट गया। अंततः पुलिस के समझाने व मरीज के घरवालों की जिद के बाद डाॅक्टर ने अस्पताल का आक्सीजन सिलेंडर व मास्क सहित उन्हें जाने दिया। लिखा पढ़ी करने के बाद उस मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। मैं किसी तरह से उस रात को नहीं भूल पाउंगा। मैं डाॅक्टर का स्वभाव व धैर्य देख कर दंग रह गया। मुझे लगा कि जिस डाॅक्टरी को मैं महान पेशा मानता था वह वास्तव में कितने खतरों से भरा हुआ है।

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