Jagdalpur steel plant mecon प्रोजेक्ट बनाने-वाले स्टील कारखाना चलाएगें?
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प्रोजेक्ट बनाने-वाले स्टील कारखाना चलाएगें?

Jagdalpur steel plant mecon

सरकार के इस कदम को अविवेकपूर्ण बताते हुए अधिकारी ने कहा है  कि हमें सबसे बड़ा खतरा इस बात का है कि कही मेकान की कमान में इसके कारण भविष्य में कोई औद्योगिक दुर्घटना न घट जाए। बता दे कि एकीकृत संयंत्र रोमेल्ट तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक का मेकान के इंजीनियरों में कोई अनुभव नहीं है। सरकार इस संयत्र पर 20 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसका निर्माण कार्य शुरु हो चुका  है। Jagdalpur steel plant mecon

अभी तक केंद्र सरकार पहले से बने संसद भवन की जगह हजारों करोड़ों रुपए खर्च करके नए संसद भवन को बनाने की आलोचनाओं में फंसी हूई थी इसी बीच हजारों करोड़ रुपए खर्च करके उसके एक ऐसे फैसले की आलोचना है जिसमें आशंका जानबूझ कर की जाने वाली अनदेखी ने कारण कई लोगों की जानों के लिए खतरा पैदा होने की भी है। पता चला है कि केंद्र सरकार का इस्पात मंत्रालय अपने तहत आने वाली नवरत्न कंपनी मेकान को छत्तीसगढ़ राज्य के जगदलपुर से 16 किमी दूर नगरनार नगरपालिका में 30 लाख मैट्रिक टन सालाना क्षमता वाला इस्पात कारखाना लगाने-चलवाने की अनुमति देने जा रही है। इसके निर्माण व संचालन के मामले में इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट बनाने वाला कंपनी मेकान को जिम्मेवारी सौंपने की बात है। इसे लेकर खुद मेकान का प्रबंधक बोर्ड बहुत परेशान है।

बोर्ड के एक आला सदस्य के मुताबिक इस इस्पात संयंत्र को हमें सौंपा जा रहा है जबकि उसकी कंपनी की चलाने की जानकारी व अनुभव कम है। सरकार हमें आपरेशन व मेंटीनेस कारखाना चलाने व रखरखाव के लिए सौंपने जा रही है। जबकि वे बताते हैं कि मेकान एक इंजीनियरिंग की विशिष्ट पहचान रखनी वाली संस्था है उसका काम संयंत्रों के रखरखाव का नहीं बल्कि अपनी जानकारी विशिष्ट प्रोजेक्ट बनवाने वाली है। आपरेशनल याकि संचालन का उसके पास कोई अनुभव नहीं है जबकि सरकार इस संयंत्र पर 18 हजार करोड़ रू का निवेश करने जा रही है। वह सिर्फ इंजीनियरिंग से संबंधित सलाह ही देने में समर्थ है।  स्टील संयंत्रों के आपरेशन एंड मेंटीनेस का मेकान को कोई अनुभव नहीं है। कायदे से संयंत्र चलाने के लिए आरआईएसएल राष्ट्रीय इस्पात निगम या स्टील अथारटी आफ इंडिया, सेल को यह जिम्मेंदारी सौपी जानी चाहिए थी जो कि इस्पात संयंत्र चलाने में माहिर हैं।

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सरकार के इस कदम को अविवेकपूर्ण बताते हुए अधिकारी ने कहा है  कि हमें सबसे बड़ा खतरा इस बात का है कि कही मेकान की कमान में इसके कारण भविष्य में कोई औद्योगिक दुर्घटना न घट जाए। बता दे कि एकीकृत संयंत्र रोमेल्ट तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक का मेकान के इंजीनियरों में कोई अनुभव नहीं है। सरकार इस संयत्र पर 20 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसका निर्माण कार्य शुरु हो चुका  है।

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बोर्ड के एक आला सदस्य के मुताबिक एकीकृत इस्पात संयंत्र में आक्सीजन का इस्तेमाल कर स्टील बनाई जाती है। याद दिला दे कि ऐसा ही विशिष्ट अनुभव वाला काम कुछ साल पहले वाईजेग में आक्सीजन प्लांट में आग लगने के कारण दुर्घटना हुई थी।  बताते हैं कि जहां यह संयंत्र लगने जा रहे हैं वह एक नक्सल प्रभावित इलाका है और वहां बेरोजगार लोगों को काम देने के लिए लगाया जाने वाला यह संयंत्र सही आपरेशन व रखरखाव न होने पर लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन सकता है। वे याद दिलाते हैं कि कुछ समय पहले विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में बहुत बड़ी दुर्घटना घटी जबकि स्टील मेल्टिंग प्लांट की तीसरी यूनिट के निर्माण के  दौरान इस्पात बनाने में इस्तेमाल होने वाली आक्सीजन का प्लांट शुरु करने की कोशिश की जा रही थी। इस दुर्घटना में आक्सीजन के कारण बहुत ऊंची ऊंची लौ उठी व 16 लोग बुरी तरह से झुलस कर मारे गए। इसमें ज्यादातर दिहाड़ी पर काम करने वाले स्थानीय मजदूर थे। संयंत्र का एक उपमहाप्रबंधक भी बुरी तरह से जल जाने के बाद अपनी जान गंवा बैठा था। अधिकारी बताते है कि इन संयत्रों में ज्यादातर काम करने वाले स्थानीय नागरिक ही होते हैं व वहां दुर्घटना होने पर नक्सलियों के हक में काम करते है।

सरकार के लिए स्टील प्लांट लगाना, उसको चलाना व रखरखाव के लिए इस उत्पादन की बिना विशेषज्ञता वाले मेकान जैसे संगठन के हाथों में सौंपने से देश को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। स्टील निर्माण विशेषज्ञता भरा काम होता है। जिसके आपरेशन-मेंटीनेस के लिए अनुभवी लोगों की जरुरत होती है। जब वाइजैग स्टील प्लांट में हुई दुर्घटना की जांच की गई तो पता चला कि स्टील मेल्टिंग श़ॉप की टरबाइन का तेल लीक होने लगा था जिससे स्टील बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली आक्सीजन के उससे मिल जाने के कारण जबरदस्त विस्फोट हो गया। मेकान भले ही सरकारी नवरत्न कंपनी हो मगर उसने कभी आपरेशनल व मेंटीनेस का काम नहीं किया है वह तो इंजीनियरिंग की सलाहकार सेवाएं देती आयी है। अधिकारियों के मुताबिक मेकान को संयंत्र चलाने व रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपे जाने का मतलब कई तरह की जोखिम उठाना है।

स्टील का निर्माण एक बहुत ऊंची तकनीक वाला कार्य है। स्टील निर्माण वाले संयंत्रों को चलाने के लिए विशिष्ट तकनीकी जानकारी व उसे बनाने वाले ब्लास्ट फरनेस का स्तर व मिल चलाने के लिए खास अनुभव की जरुरत होती है। खासतौर पर आक्सीजन प्लांट के पर्याप्त अनुभव का अभाव कोई भी बड़ा संकट पैदा कर सकता है। अब इस क्षेत्र में बिना कोई अनुभव व जानकारी रखने वाली इंजीनियरिंग फर्म मेकान संयंत्र को इलेक्ट्रोनिक्स व आटोमेशन उपकरणों के संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाने की कोशिश की जा रही है।

इस मामले में एक अधिकारी का कहना था कि एक आम आदमी को यह पता है कि कोई जरुरी नहीं जो हलवाई दोसा अच्छा बनाता हो व समोसा भी अच्छा बनाता हो। इसलिए दोनों के नमकीन केटेगरी में होने के बावजदू लोग दोसा अलग दुकान से व समोसा किसी और दुकान से खाते हैं। इसलिए मेकान बोर्ड का यह सोचना एकदम गलत होगा कि चूंकि इंजीनियरिंग सेवाएं देने वाली कंपनी इस क्षेत्र में भी विशिष्टता लिए हुए होगी इसलिए वह भी स्टील निर्माण करने वाला एकीकृत संयंत्र चला पाने में भी सफल हो जाएगी।

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