दशर्नीय लाहौल स्पीति कैमरे से

जब पढ़ा करते थे तब एक बार पढ़ा था कि लेख की तुलना में चित्र कहीं ज्यादा असरदार होता है। एक चित्र तो हजार शब्दों के बराबर होता है। फिर कुछ चित्र याद आ गए जिन्हें मैंने दशको पहले देखा पर उनकी याद मन में आज तक ताजी है। जैसे अमेरिका व वियतनाम का युद्ध हुआ था तो अमेरिका द्वारा नेपाम बम का इस्तेमाल किए जाने के बाद चारों और लगी आग के बीच एक तीन-चार साल के नंगे बच्चे को उससे बचकर भागते हुए दिखाया गया था।

फिर जब भोपाल गैस कांड हुआ तो एक दुधमुहे बच्चे को जमीन में दफानाते हुए उसकी आंख से मिट्टी हटाने की फोटो बनाई नहीं भूला। कुछ वर्ष पहले जब सीरिया से जान बचाकर भाग रहे एक 3-4 साल के बच्चे की समुद्रतट पर पड़ी लाश की फोटो देखी तो उसे भूल नहीं पाया। फोटोग्राफरो की क्रांति के बाद काली सफेद फोटो तो लापता ही हो गई व उनकी जगह रंगीन फोटो ने ले ली।

सत्य कहूं तो मुझे अखबारों का रंगीन रंग में छपना व उनकी रंगीन तस्वीरे छापे जाना कभी पसंद नहीं आया। मेरा मानना है कि काले-सफेद अखबारों को मैं जितनी गंभीरता के साथ लेता था उतना उन्हें रंगीन में नहीं ले पाता हूं। अब तो काली-सफेद तो क्या रंगीन फिल्में तक बनाई जानी बंद हो गई व सारी फोटो एक चिप पर रिकार्ड हो जाती हैं।

जब हाल ही में इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक युवा फोटोग्राफर की फोटो प्रदर्शनी को देखा तो बहुत अच्छा लगा क्योंकि अमित वर्मा नामक इस फोटोग्राफर ने अपनी श्वेत-श्याम तस्वीरो की प्रदर्शनी लगाई थी। जब मैंने उससे इसकी वजह पूछी तो उसने कहा कि लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं मोनोक्रोम क्यों शुरू करता हूं और मैं उन्हें बताता हूं कि मैं केवल मोनोक्रोम में देखता हूं। मैं रंग में नहीं देखता हूं। मैं तो केवल रोशनी और लेंप में देख्ता हूं। अमित वर्मा ने दर्शनीय लाहौल स्पीती घाटी को लाइट एंड लाइंस इन द मिडिल लैंड ए मोनोक्रोम जर्नी द स्पीती वैली के तहत यह प्रदर्शनी लगाई है। मजेदार बात यह है कि वे खुद राजस्थान के रहने वाले हैं जोकि अपने रेगिस्तान व सुंदर झीलो के कारण बहुत प्रसिद्ध है।

वे बीकानेर के रहने वाले है व चुरू में पढ़े-लिखे है जोकि सर्दियो में तापमान शुन्य के करीब व गर्मियो में 50 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है। अमित वर्मा के मुताबिक वे केवल ब्लैक एंड व्हाइट को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि उनके अनुसार यह एक दुलर्भ काम है व बहुत मुश्किल होने के कारण ही मैं इसे ज्यादा पसंद करता हूं। मुझे इस स्टाइल से प्यार है।

इस 44 वर्षीय फोटोग्राफर ने 20 सालों तक दिल्ली के पेशेवर संपादकीय फोटोग्राफर के रूप में काम किया और 2008 में जानी-मानी पत्रिका फोर्ब्स इंडिया में मुख्य फोटोग्राफर के रूप में काम कर रहे हैं। उनकी प्रदर्शनी के दौरान बड़ी तादाद में हिमाचल प्रदेश के लोग भी आए। कईयो ने सलाह दी कि मैं इस प्रदर्शनी को शिमला में भी आयोजित करूं ताकि हिमाचल प्रदेश के रोहतांग के माध्यम से मनाली से अपशी सड़क मार्ग को लेह से जोड़ने को बढ़ावा दिया जा सके। इससे बड़ी तादाद में पर्यटक वहां आएंगे व राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर में वर्षों से चल रहे हालात के कारण देशी व विदेशी पर्यटको के वहां जाने में कमी आई है।

वहीं वे लोग थोड़ी संख्या में हिमाचल की और आकर्षित हो रहे हैं। अगर वे इस तरह की प्रदर्शनियों के जरिए हिमाचल की प्राकृतिक खूबसूरती से रू-ब-रू हो तो निःसंदेह वहां जाना पसंद करेंगे। यह वहां के लोगों के लिए बहुत अच्छा साबित होगा। लाहौल स्पीती मार्ग साहसिक पर्यटन, ट्रेकिंग व अपनी अनछुई सुंदरता के जरिए बहुत उत्कृष्ट माना जाता है। वर्मा बताते हैं कि बड़ी संख्या में युवा मनाली से मोटर साईकिल चलाकर लेह जाते हैं। उन्होंने अपनी प्रदर्शनी को प्राकृतिक सुंदरता दिखाने वाली 24 तस्वीरो को 10 दिन में शूट किया था। उन्होंने वहां के वन्य जीवन को भी बहुत खुबसूरती के साथ प्रदर्शित किया। जाने-माने फोटोग्राफर दिवंगत राकेश सहाय उनके गुरू रहे हैं व उन्होंने यह प्रदर्शनी उन्हीं को समर्पित की है। वे जाने-माने फोटोग्राफर व लेखक कमल सहाय व अमेरिका में रहने वाले लेखक मेलिसा अलिपालो के साथ मिलकर भी फोटोग्राफी के नए आयामों पर काम कर रहे हैं।

इसमें वे हिमालय के तराई में स्थित नेपाल के एक गांव पर विशेष प्रकाश डालेंगे। मेलिसा एक जानी-मानी लेखिका व कवि है। उन्होंने इस प्रदर्शनी के हर फोटोग्राफ के लिए एक कविता लिखी है। वह उनके साथ कई परियोजनाओं पर फोटोग्राफर के रूप में काम कर रहे हैं जिससे नेपाल के एक गांव की प्राकृतिक सुंदरता पर लिखी रचना भी शामिल है। कमल सहाय ने तो उनकी इस प्रदर्शनी को साकार करने में बहुत अहम भूमिका अदा की थी।

श्री वर्मा की फोटोग्राफ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और एक फोटोग्राफर के नियंत्रण को दर्शाता हैं। उन्होंने प्यारी तस्वीरो की शूटिंग के लिए लाइका एम लैंस का इस्तेमाल किया है। वे व्हाट्स रूप अपने संयुक्त कार्य और दूसरो के रचनात्मक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मंच बनाने के लिए अलिपालो के साथ काम कर रहे हैं। अमित वर्मा और अलिपालो नेपाल के एक दूरस्थ हिमालयी गांव के आगामी चित्रो और कहानियों पर काम कर रहे हैं।

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