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टाइगर की चिंता में फिल्म और…

कुछ लोग गजब के प्रतिभाशाली होते हैं। वे हर हालात का अपनी क्षमता व योग्यता के अनुसार फायदा उठाते हैं। दिल्ली के जाने-माने कस्टम व एक्साइज के वकील सुनील कपूर को ही ले लें। वे इन दिनों चर्चित गायक बन गए हैं। जब कोरोना फैला तो उसके बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए फिल्म उद्योग से जुड़े जॉय नील, राजीव ठाकुर व अविनीत सरीखे कलाकारों ने मिलकर इस बारे में लोगों को जानकारी देने के साथ ही देश प्रेम व देश भक्ति का गीत हम हिंदुस्तान तैयार किया जोकि आजकल काफी चर्चित हो रहा है।ये लोग इसके जरिए जनता को जागरूक बना रहे हैं। दरअसल सुनील कपूर एक बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति है तो सफल वकील होने के साथ-साथ गायक, कवि, पटकथा, लेखक, गीतकार व पियानोविद भी हैं। उन्होंने जाने-माने फिल्म निर्माता जॉय मुखर्जी, आर सीरीज नोर्दन लाइट प्रोडेक्शन के लिए फिल्मों की कहानियां लिखी। वे जाने-माने अभिनेता धर्मेंद्र के साथ टाईगर ट्रेल नामक फिल्म में भी आ रहे हैं। इस फिल्म का उद्देश्य बहुमूल्य शेरो के बचाने के लिए लोगों के अंदर जागरूकता लाना है। जाने-माने पशु चहेते सुरेश कुमार रहेजा इस फिल्म का निर्माण कर रहे हैं।

इस फिल्म में रति अग्निहोत्री, अनु कपूर, साक्षी, शिवम सरीखे कलाकार भी हिस्सा ले रहे हैं। यह फिल्म पशुओं का शिकार करने वाले जाने-माने कुख्यात संसारचंद व उसके साथी लोहरचंद की गतिविधियों पर आधारित है। इन दोनों पर 470 शेर व 2130 तेंदुओ की हत्या करने का अभियोग है। उन्होंने बेजुबान निरीह पशुओ की हत्या कर उनकी खाल व मांस गैर-कानूनी तरीको से विदेश भेजी थी।सुनील कपूर दिल्ली के श्रीराम कालेज ऑफ कॉमर्स से पढ़े हए हैं। वे इस फिल्म में पुलिस के डिप्टी इस्पेक्टर जनरल की भूमिका निभा रहे हैं जोकि इन अपराधियों को गिरफ्तार करते हैं। वे एक अच्छे लेखक भी हैं व उन्होंने पीकाक फैदर नामक बहुचर्चित किताब भी लिखी है। यह किताब उन्होंने अपने जुड़वा भाई सुधीर कपूर के साथ मिलकर लिखी है। संयोग से दोनों भाईयो की शक्ले इतनी ज्यादा मिलती-जुलती है कि आए दिन रोमांचक व मजेदार किस्से धरते रहे हैं।

उनकी इस पुस्तक में शामिल तीन कहानियों को फिल्म निर्माताओं ने अपनी फिल्मो के लिए चुना है। रूपा पब्लिसर उनकी अगली किताब पूनम का चांद छाप रहा है। यह उनकी 51 कविताओं का संग्रह है। टाइगर ट्रेल फिल्म के कई गाने उन्होंने लिखे व गाए हैं। उनके लिखे दो और गाने फिल्मो में शामिल किए गए हैं। उन्होंने महिलाओं के साथ किए जाने वाले अत्याचारों पर आघात नामक कहानी भी लिखी थी। उस पर जॉय मुखर्जी का फिल्मालय स्टूडियो फिल्म बना रहा है। इसमें बलात्कार की शिकार महिला के साथ किस तरह से बरताव कर समाज में पुनर्वास किया जाए की कहानी है।वे किशोर कुमार व मोहम्मद रफी के प्रशंसक हैं। सुनील कपूर बताते है कि वे काफी लंबे समय से शेर सरीखे लुप्तप्राय हो रहे प्राणियों का संसारचंद सरीखे शिकारियों का शिकार किए जाने से बहुत परेशान थे। अतः उन्होंने उन पर फिल्म बनाने का फैसला किया ताकि देश व दुनिया को इस समस्या से अवगत कराया जा सके। वकील होने के बाद उन्हें यह गुण अपने पिता से विरासत में मिला जोकि खुद भी फिल्म निर्माता रह चुके थे। अब सुनील कपूर के बच्चे उनके व्यवसाय में उनकी काफी मदद करते हैं जिससे उन्हें फिल्मों में काम करने के लिए मदद मिल जाती है।

उनमें यह प्रतिभा बचपन से ही थी। उन्होंने मॉडर्न स्कूल में पढ़ते हुए बहुमुखी प्रतिभा का छात्र होने का अवार्ड पाया जोकि उस समय स्कूल के प्रिंसिपल रहे पूर्व राष्ट्रपति डा फखरूद्दीन अली अहमद ने उन्हें दिया था। उसके बाद उन्होंने रेडियो के युवा वाणी कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। वे बताते हैं कि उन्होंने कभी अपने व्यवसाय व शौक में टकराव नहीं होने दिया व संतुलन स्थापित करके रखा। यही वजह है कि मैंने अपने शौक के कारण टाइगर ट्रेल फिल्म का गाना मुझे ईश्क होने लगा है न सिर्फ लिखा बल्कि उसे गाया भी।

वे बताते है कि फिल्मो को लेकर उनका शौक भी खानदानी है। उनके पिता को फिल्मो का बहुत शौक था। वे तो लाहौर में प्राण व मोहम्मद रफी के घर के पास ही रहते थे व तीनों आपस में अच्छे दोस्त थे। एक बार जब वे लोग पान की दुकान पर पान खा रहे थे तो अचानक प्राण को सिगरेट पीते हुए देखकर वहां खड़े फिल्म निर्माता श्री पांचोली को उनकी यह अदा बहुत पसंद आई व उन्होंने उन्हें अपनी फिल्म में काम करने का प्रस्ताव दे दिया। वे लोग आपस में काफी मिलते-जुलते रहते थे। बंटवारे के बाद दिल्ली आने पर जानी-मानी कुतुब मीनार व कोहिनूर पेंसिलो का निर्माण किया जोकि अपने समय में पूरे देश में बहुत लोकप्रिय थी। उनके छोटे भाई एकाउंटेंट हैं वे भी उनकी इस क्षेत्र में काफी मदद करते हैं व उन्होंने अपने शौक व व्यवसाय में संतुलन बैठाते हुए अपनी जिदंगी को जिया है।

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