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दिसंबर की वह लड़ाई

हमने घर की छत पर करीब 200 वाट का एक बल्ब लटका रखा था ताकि लोग दूर से ही उसकी रोशनी के सहारे घर का पता लगा सके। पुलिस वालों ने तुरंत हमसे अपना बल्ब बंद करने का अनुरोध किया तो हमने उनसे पूछा कि क्या हुआ?  इस पर उन्होंने गुस्सा होते हुए कहा कि क्या आप खबर नहीं सुनते? हमारी अनभिज्ञता जताये जाने पर उन्होंने कहा कि कुछ देर पहले पाकिस्तान ने भारत पर हवाई हमला कर दिया है।

समय कितना जल्दी बीत जाता है, इसकी कभी कल्पना नहीं की थी। ऐसा लगता है मानो कल की ही बात हो। इस घटना को 4 दिसंबर को 50 साल हो गए। हम तीनों ने किदवईनगर कानपुर में अपने नए घर में प्रवेश किया ही था कि अचानक चार दिसंबर की रात को पुलिस वालों ने हमारे घर का दरवाजा जोर जोर से खड़काया। दरवाजा खोलने पर उन्होंने नाराज होते हुए कहा कि आप लोग यह क्या कर रहे हैं? हुआ यह था कि उन दिनों हमारा इलाका किदवई नगर ही था। काफी सुनसान इलाका था। अतः रात को आने वाले दूर से ही हमारे घर का पता लगा ले इसलिए हमने घर की छत पर करीब 200 वाट का एक बल्ब लटका रखा था ताकि लोग दूर से ही उसकी रोशनी के सहारे घर का पता लगा सके। पुलिस वालों ने तुरंत हमसे अपना बल्ब बंद करने का अनुरोध किया तो हमने उनसे पूछा कि क्या हुआ?

इस पर उन्होंने गुस्सा होते हुए कहा कि क्या आप खबर नहीं सुनते? हमारी अनभिज्ञता जताये जाने पर उन्होंने कहा कि कुछ देर पहले पाकिस्तान ने भारत पर हवाई हमला कर दिया है। अगर आप ऐसे ही छत पर बल्ब जलाते रहे तो हमारे ऊपर भी हमला हो जाएगा। खैर, हम शर्मिंदा हो गए और हमने यह सुनते ही बल्ब बंद कर दिया। बाद में पता चला कि पाकिस्तान ने चौथी बार पाक-भारत युद्ध की शुरुआत करते हुए भारतीय वायुसेना के पंजाब, जम्मू कश्मीर, हरियाणा और राजस्थान में हवाई हमले किए है। उसने उस आपरेशन का नाम चंगेज खान रखा था।

इससे पहले उसने पठानकोट और अमृतसर के वायुसेना के ठिकानों पर हमले किए थे। इन्हें वायुसेना ने बहुत जल्दी ठीक करके काम करने योग्य बना दिया। पाकिस्तान ने तीसरा हमला आगरा के वायुसेना ठिकानों पर किया। उसने हलबाग लुधियाना, अंबाला, सिरसा (हरियाणा) के हवाई अड्डों को भी अपना निशाना बनाते हुए दो बी-एस बमवर्षक वहां बम गिराए थे हालांकि शाम तक वायुसेना ने इन हवाई अड्डों की मरम्मत करके पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरु कर दी। पाकिस्तान ने राजस्थान व गुजरात में भी हवाई अड्डो पर हमले किए। इनके अलावा पाक सेना ने जम्मू कश्मीर में नियंत्रण वाले इलाको में टैंको से बमबारी शुरु कर दी। जवाबी कार्रवाई में वायुसेना ने पाकिस्तान के ठिकानों पर जमकर हमले कर उन्हें काफी नुकसान पहुंचाया। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के मुरीद, मियानवाली, सरगोढ़ा, चन्देर, रिसलेवाला, रफ़ीक़ी और मसरूर व तेजगांव इलाकों में भी जोरदार हमला किया। पश्चिमी पाकिस्तान के सरगोधा, मसरुर हवाई अड्डो को इन हमलों की वजह से बहुत नुकसान पहुंचा व वे उड़ान भरने लायक नहीं रहे।

पूर्वी पाकिस्तान में वायुसेना नौसेना व मुक्तिवाहिनी की संयुक्त कार्रवाई के कारण पाकिस्तान की हालत बहुत खराब हो गई। बदले में पाकिस्तान ने पूंछ, कारगिल में जबरदस्त हमले करके अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश की। उसने श्रीनगर, लेह मार्ग पर जबरदस्त हमले किए। जम्मू कश्मीर में अखनूर में भी हमले किए। पाकिस्तानी थल सेना के टैंकों ने पंजाब और राजस्थान में तेज हमले किए। उसने राजस्थान में लोंगावाला में हमले किए जिन्हें हमारी सेना ने नाकाम कर दिया व हमारे टैंको ने पाकिस्तान को गजब का नुकसान पहुंचाया।

यहां यह याद कराना जरुरी है कि तब देश में टेलीविजन नहीं आया था व 3 दिसंबर की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रेडियो पर देश को संबोधित करते हुए कहा था कि देश को एक जरुरी सूचना देनी है। हमारे लोग व हमारे देश को पाकिस्तान ने जबरदस्त खतरे में डालने की कोशिश की है। उसने हमारे खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। पाकिस्तान ने अमृतसर, पठानकोट, श्रीनगर, अवंतीपुर, जोधपुर को भी अपना निशाना बनाया है। इंदिरा गांधी ने कहा कि कुछ महीनों से पाकिस्तान पड़ोस के कुछ लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन कर रहा है। हमारे द्वारा उससे इस समस्या का शांति से हल निकालने के सभी अनुरोध बेकार साबित हुए हैं। इंदिरा गांधी का इशारा कुछ समय से पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान आज बांग्लादेश में किए जा रहे लोगों के दमन की ओर था।

वहा लंबे अरसे से पाकिस्तान ने बुद्धिजीवियों, जाने माने कलाकारों, आम इंसान की हत्याओं का सिलसिला शुरु कर रखा था। बड़ी संख्या में इस दमन से बचने के लिए वहां से लोग भागकर भारत आने लगे थे। जिनका भार व जिम्मेदारी भारत को उठानी पड़ रही थी। उसने बांग्लादेश में जो युद्ध छेड़ा था वह भारत पर हमला था।

इस सब पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इन हालात में हमारे सामने उसके खिलाफ युद्ध लड़ने के अलावा कोई भी विकल्प नहीं बचा है। हमारे बहादुर जवान बार्डर पर देश की रक्षा करने के लिए एकजुट है। देश की सुरक्षा के लिए हम आपातकाल घोषित करते हैं। हम इस हालात का सामना करने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। हम लंबे अरसे तक कष्टों और कमियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। हम शांति के पुजारी हैं लेकिन देश की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेंगे। लोकतंत्र और आजादी की रक्षा के लिए हम लोग शांतिपूर्ण तरीकों से अपना जीवन को जी पाए इसलिए हम आज अपनी मातृभूमि की पूरी तरह से रक्षा करने के लिए बाध्य है। तभी हम लोग एक बेहतर कल की ओर बढ़ सकते है पर हुए हमले का जोरदार जवाब दिया जाएगा। हम लोगों को पूरी तरह से एकजुट रहना होगा।

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उस लड़ाई को बांग्लादेश युद्ध के नाम से जाना जाता है तब बांग्लादेश पूर्व पाकिस्तान का हिस्सा था। हमले के साथ शुरु हुआ भारत-पाक युद्ध 13 दिन तक चला।  नया देश बना, जिसे बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। 6 दिसंबर को ही पाकिस्तानी सेना ने सरेंडर किया था। 16 दिसम्बर, 1971 को ढाका समर्पण के साथ जंग समाप्त हुई।

हालांकि पूर्वी पाकिस्तान ने 26 मार्च 1971 को पाकिस्तान से अलग होने की घोषणा कर दी धी। पाकिस्तान के  93000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने समर्पण किया था जिन्हें सेना ने अपनी कैद में लिया। इन्हें युद्ध अपराधी कहा जाने लगा। इनमें समर्पण करने वाले सैनिकों के परिवार के सदस्य व पाकिस्तानी सेना की मदद करने वाले रजाकार भी थे। इस स्वतंत्रता युद्ध के दौरान कई लाख पाकिस्तानी आतंकवादी व नागरिक मारे गए। लड़ाई से पहले पाकिस्तान ने अपनी सेना व समर्थकों की मदद से बांग्लादेश में बहुत उत्पीड़न किया। बड़ी तादाद में वहां से लोग भाग कर भारत चले आए थे। उस उत्पीड़न के दौरान काफी संख्या में आम नागरिक भी मारे गए।

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