इस एनकाउंटर से कई जवाब मिले!

अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने की खबर ने मानो मेरे कई सवालों का जवाब दे दिया है। उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर शब्द उतना ही बातचीत व बोलचाल का शब्द बन गया है जितना कि देशभर में कोरोना या रेमडिसीवर। अगर पिछले कुछ दिनों के अखबार उठाए तो यह शब्द अनेक बार पढ़ने को मिलेगा। विकास के हाथों मारे गए एक पुलिस अधिकारी का बेटा कहता है कि उसे एनकाउंटर में मार दिया जाना चाहिए।

विकास की मां ने भी कहा था कि पुलिस उसे एनकाउंटर में मार देगी। फिर उसने कहा कि वह महाकाल का भक्त था व महाकाल ने ही उसे मौत से बचाया। मुझे याद है जब मैं धर्म का खुलासा करने वाली पत्रिकाओं में काम करता था तो किसी पाठक ने एक सवाल पूछा कि अगर गंगा में नहाने से पाप धुल जाते हैं तो हम हमेशा पापी क्यों बने रहते हैं। इस पर हमारे संपादक ने जवाब दिया कि जब तक कोई गंगा में डुबकी लगाए डूबा रहता है तब तक पाप उससे दूर रहते हैं व पानी से बाहर निकलते ही पुनः उससे चिपट जाते हैं। महाकाल के दर्शन के बाद भी विकास की मौत यह साबित करती है कि एक थाने की तरह महाकाल का भी यह अधिकार क्षेत्र व कार्य क्षेत्र उज्जैन नगरी तक ही सीमित है। जब तक विकास उज्जैन में रहा उन्होंने उसको प्राणों से बचाया था व उज्जैन से बाहर निकलने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मार दिया। चंद दिनों पहले इन्हीं हालात में विकास के एक गुर्गे को मारने के बाद उसकी कितनी फजीहत हो रही है।

उत्तर प्रदेश के लिए एनकाउंटर का वहीं महत्व है जोकि अदालत में एफआईआर का होता है। वहां के पुलिस महानिरीक्षक प्रशांत कुमार की यह बात सही साबित हो गई कि हम लोग दुबे को ऐसा सबक सिखाएंगे कि वह नजीर बन जाए। उन्होंने जिस तरह से उसे एनकाउंटर में मारा उसकी यह बात सही भी साबित हो गई।अब तमाम खबरिया चैनलो पर तमाम दलों के नेताओं को बुलाकर इस एनकाउंटर की चर्चा हो रही है कि वह सही था या गलत। सिर्फ शिव सेना के संजय राउत ने ही बेबाक शब्दों में कहा कि सरकार ने जो किया वह बिलकुल सही किया। अगर वह जीवित रहता तो आगे चलकर तमाम पार्टीयां उसे अपना टिकट देती। वह सांसद विधायक बनता व समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाता।

इस पूरे मामले में योगी सरकार ने उस कहावत को चरितार्थ कर दिया है कि एक चुप सौ बचाव कर डालती है। वह शेर है जाकि बात निकलेगी तो बहुत दूर तलक जाएगी। वह इतना होशियार था कि वह अगर जिंदा रहता तो न जाने कितने दलों के नेताओं को अपने बयानो के जरिए पर्दाफाश करता। हर दल के नेता उसकी जेब में रह होंगे। वब वोटों पर असर जो रखता था।  वह अपने आपमें कानून था व घर में ही अदालत लगाता था। लोगों की संपत्ति पर जबरन कब्जे करता था।दरअसल सच्चाई कुछ और ही है अगर पुलिस का बस चलता तो वह विकास को मध्य प्रदेश में ही मार डालती। मगर वहां की पुलिस के साथ टकराव के चलते वह ऐसा नहीं कर पाई। किसी ने यह नहीं सोचा कि उसकी इस कार्रवाई पर कितने सवाल उठाए जाएंगे। अदालत में बहुत पहले ही एनकाउंटर में बदमाशों के मारे जाने को सही ठहराते हुए एक आला नेता ने कहा था कि इसके अलावा इनका कोई और ईलाज नहीं है। न तो इन लोगों के खिलाफ कोई गवाह मिल पाता है और न ही उसको अदालत सजा दे पाते हैं।

इससे वे बरी होकर अपनी हरकते और तेज कर देते हैं। विकास का अपराधिक विकास भी इन्ही कारणों से हुआ था। वह इतना खूंखार था कि उसने थाने में घुसकर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के राज्य मंत्री रहे सत्येंद्र शुक्ला को गोली मार दी थी व जब वह अदालत में गया तो उस समय थाने में मौजूद हत्या के चश्मदीद सबइंस्पेक्टर गवाहो समेत किसी भी पुलिस वाले ने उसके खिलाफ गवाही नहीं दी थी व उसकी हरकते इतनी ज्यादा बढी कि उसने भाजपा के शासन में आठ पुलिस वालो की हत्या कर उनकी लाशों को जलाने तक की तैयारी कर डाली थी। फिर लंबी दूरी तय करके उज्जैन तक पहुंच गया। वहां उसने अपनी सेल्फी खिचवाई व जोर-शोर से कहा कि वह विकास है। सच कहा जाए तो उसने एनकाउंटर से बचने के लिए उसने तमाम सबूत तैयार कर लिए थे मगर उन्हें अदालत में पेश करने की नौबत तक नहीं आई।

किसी ने एक चुटकुला सुनाया कि देश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की हालात से परेशान होकर प्रधानमंत्री ने देशभर के राज्यो की पुलिस के महानिदेशको की बैठक बुलाई। पंजाब के महानिदेशक ने कहा कि हमने तो विस्फोटक हथियो के मामले में 24 घंटे के अंदर अपने पुलिस अधीक्षक को गिरफ्तार कर लिया क्योंकि वह स्वयं ही यह काम कर रहा था। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक ने कहा कि हमने तो 1993 में मुबई की पलपल की जानकारी थी क्योंकि हमारे कस्टम अधिकारी उसे लाने-ले-जाने में अपराधियों की मदद कर रहे थे। जबकि उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने कहा कि एक बार मंत्रीजी की भैंस खो गई हमने काली कुतिया को बरामद कर जब अदालत में पेश किया तो वह हकलाती हुई कह रही थी कि मैं ही भैंस हूं, मैं ही भैंस हूं। इसके साथ ही उन्होंने  जोड़ा कि विकास को एनकाउंटर में मारकर हमने भारतीय लोकतंत्र पर बहुत बड़ा उपकार किया है वरना न जाने कितने राजनीति दलो के नेता व लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार के मंत्रियों पर सवाल उठाए जाते।अगर हमारे प्रधानमंत्री को इस कांफ्रेंस में अपने मन की बात कहने का मौका मिलता तो वे देशभर के आला पुलिस अफसरो से कहते कि आप लोगों को गुजरात सोहराबुद्दीन एनकाउंटर याद रखना चाहिए। एनकाउंटर न सिर्फ होना चाहिए बल्कि लगना भी चाहिए। यूपी पुलिस ने तमाम मीडिया मौजूदगी के बावजूद ‘हम जो कहते है वह करते है’ के नारे को सही साबित कर दिखाया है।

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