कोरोना पर व्यासजी का कहा ही सही

मैं ब्राह्मणों व ज्योतिष में काफी विश्वास रखता हूं व दोनों को ही काफी पसंद करता हूं। मेरे फोन में करीब दर्जन भर पंडितों व ज्योतिषियों के फोन नंबर हैं। मैं उनसे हर छोटी-सी-छोटी बात पर सलाह लेता रहता हूं। भीलवाड़ा के लोकेश व्यास के संपर्क में लगातार रहता हूं और उनसे खुलकर चर्चा होती है। कुछ साल पहले जब मैं घूमने के लिए राजस्थान गया था व सपरिवार व्यासजी के घर भीलवाड़ा में ठहरा तो वहां लोकेश व्यास मुझे रात का खाना खिलाने सपरिवार ले गए व उन्होंने मेरी वहां के एक बुजुर्ग ज्योतिषी से भी मुलाकात करवाई।

यह संयोग ही है कि अपने व्यासजी ब्राह्मण व ज्योतिषी दोनों ही हैं। हालांकि उन्हें कर्मकांड, ज्योतिष आदि में विश्वास नहीं है। ये सारी चीजे उन्होंने हमारी भाभीजी को ही सौंप रखी है और वे खुद उन पर ज्यादा विश्वास नहीं करते हैं। मगर मैं अपने अनुभवों के आधार पर कह सकता हूं कि व्यासजी तो देश के सामाजिक व राजनीतिक तालाब में बैरोमीटर है। वे अक्सर काफी पहले ही किसी दल, नेता या हालात के बारे में बता देते हैं कि उसका क्या हश्र होने वाला है।

मेरी गृह मंत्रालय व गृह मंत्रियों में हमेशा काफी रूचि रही है। गृह मंत्रालय खासतौर से इंटेलिजेंस ब्यूरो के अनेक आला अफसर मेरे दोस्त रहे हैं। एक बार एक अफसर ने मुझसे पूछा कि इस साल होने वाले आम चुनावों का आकलन व्यासजी के कॉलम’गपशप’ में कब आने वाला है तो मैंने इसकी वजह जाननी चाही तो उनका कहना था कि जनसत्ता ही हिंदी का एकमात्र ऐसा अखबार है जिसे गृह मंत्रालाय में गंभीरता से पढ़ा जाता है। व्यासजी का राजनीतिक आकलन जबरदस्त होता है। ऊपर वाले हमसे लगातार पूछ रहे हैं कि आम चुनाव के नतीजे क्या रहेंगे। मगर अभी तक व्यासजी ने कुछ लिखा ही नहीं है। हम लोग तो उनका आकलन पढ़कर ही अपनी रिपोर्ट का आधार बनाते हैं!

मैंने व्यासजी को यह बात बताई तो वे कहने लगे कि इन लोगों की बातों में मत पड़ा करो। मुझे याद है कि जब अयोध्या में विवादास्पद स्थल गिरा था तो उस समय जनसत्ता में हो रही रिपोर्टिंग को लेकर व्यासजी संतुष्ट नहीं थे क्योंकि हमारे अखबार में हालात की गंभीरता का आकलन जमीनी हकीकत की गहराई से नहीं किया जा रहा था। लोगों की फील जाहिर नहीं हो रही थी। वे सेकुलर झंडाबरदारी में अखबार के फंसने से पाठकों पर हो रहें असर की चिंता में थे।तब जनसत्ता संपादक प्रभाष जोशी ने ब्यूरो की बैठक बुलवाई व उस बैठक में व्यासजी ने नाराजगी जताते हुए खुलकर कहा कि इस तरह का अपना ख्याली आकलन बंद कीजिए। आप यह तय नहीं कर सकते कि लोग आपकी आंखों व दिमाग से तय करे कि क्या होना चाहिए। बाद में जनसत्ता का क्या हश्र हुआ वह सबके सामने हैं।

उससे बड़ी घटना तब घटी जबकि इस देश को अप्रत्यक्ष रूप से चलाने वाली सोनिया गांधी के एक काफी करीबी बड़े नेता ने अपने घर पर व्यासजी के कॉलम में 2014 के आम चुनाव के आकलन पर आपत्ति जताई। तब व्यासजी ने कांग्रेस को मुश्किल से 50-60 सीटें ही दी थी क्योंकि राज्यवार उसका आकलन किया था। वे मुझे काफी मानते थे अतः मैंने उनसे कहा कि व्यासजी कोई भी आकलन पक्षपात से नहीं करते हैं अतः आप उनसे गलत आकलन की अपेक्षा मत कीजिए और इस बारे में खुद उनसे बहस कर कोई निष्कर्ष निकालिए।

उन्होंने मुझसे व्यासजी से बात करवाने को कहा। मुझे याद है कि उस दिन व्यासजी गुजरात में ही थे। मैंने अपने फोन पर दोनों की लंबी बातचीत करवाई और वह नेता पेन लेकर उस रिपोर्ट पर अपना आकलन करने लगे जोकि बाद में एकदम सही साबित हुआ। अतः मैं ही नहीं वे नेता भी व्यासजी के आकलन को सही मानने को मजबूर हुए।एक बार मोदी के सत्ता में आने के पहले व्यासजी के सेंट्रल हॉल के सालाना लंच कार्यक्रम में खाना खाने के लिए कई नेता व अमित शाह भी आए। कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के साथ हमने अमित शाह से खाने की मेज पर खुलकर चर्चा की। बाद में चलते समय जब मैंने उन्हें बताया कि मैं जनसत्ता से हूं तो अमित शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि न तो मुझे हिंदी आती है और न ही मैं कोई अखबार पढ़ता या खबरिया चैनल देखता  हूं।

व्यासजी उस समय नरेंद्र मोदी व अमित शाह को दो टूक अंदाज में चुनाव जीतता मान रहे थे। इतने करीब थे कि मोदी ने चुनाव के मौके पर अपना पहला इंटरव्यू व्यासजी को ही दिया था। बाद में इन दोनों दाढ़ी वाले नेताओं के बारे में मैंने अपनी राय व्यासजी को बता दी थी। वे कहने लगे थे कि तुम्हें क्या लगता है कि मैंकिसी से प्रभावित होकर, इनकोंचुनाव जीतते हुए  अपनी रिपोर्टिंग करूंगा?

अब कोरोना वायरस का संकट है और जब तमाम प्रतिष्ठित अखबार व आला चैनल मोदी की तूताडी बजा रहे हैं और उनके उद्बोधन को देश की बहुत बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं तो व्यासजी ने उससे पहले ही 17 मार्च को अपने कॉलम’भीड़ कैसे घरो में बंद हो’ व उससे पहले 28 फरवरी को अपने कॉलम में हालात की गंभीरता का खुलासा कर भारत की लापरवाही का खुलासा कर दिया था। शुरू से कह रहे है कि हम लोग भले ही अपनी पीठ खुद क्यों न पीटते रहे मगर हमने इस मामले को उतनी गंभीरता व तैयारी के साथ नहीं लिया जितना हमें लेना चाहिए था।और नया इंडिया से जुड़े हम सभी लोगों को मार्च के पहले सप्ताह में ही व्यासजी ने कहना शुरू कर दिया था कि हम लोगों को घर में बंद होना होगा। दिल्ली, भोपाल, जयपुर, भीलवाड़ा सभी तरफ उन्होने घर से काम करने के लिए कहा। नया इंडिया के पेज जनता कर्फ्यू के तीन दिन पहले से ही घरों में बनने लग गए थे। जिन्होने घर से काम करने में असमर्थता बताई उन्हे व्यासजी ने अपने गांव लौट जाने के लिए कह दिया। व्यासजी ने सबको राशन, दवाई सब इकठ्ठा करके रख लेने को कहा था।

लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया जो लॉकडाउन घोषणा के बाद मैं हडबडाया और व्यासजी को फोन कर कहां- मेरे पास तो पत्रकार का पीआईबी कार्ड भी नहीं है, लेने गया था तो प्रिंट न होने के कारण मिला नहीं। अब दवाईयां लेनी है तो चिंता है कि पुलिस रास्ते में रोक न ले। उसे बताने के लिए मीडिया कार्ड भी नहीं है। इसलिए नया इंडिया के लैटरहैड पर लिख कर व्हाटसअप कराएँ।और व्यासजी ने अब चेताया है कि तालाबंदी का संकट तो महिनों रहेगा। अगर बोलचाल के शब्दों में कहा जाए तो उन्होंने कोरोना के हालात को लेकर कह दिया था कि अभी तो यह अंगडाई है आगे और लड़ाई है। व्यासजी यह कहते आए है कि इस देश में राज करने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। अतः जब मैं कभी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे लालकृष्ण आडवाणी को व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को शाम 5 बजे जनता कर्फ्यू खत्म होने पर ताली बजाते हुए देखता हूं तो मुझे लगता है कि हम लोग किस अक्ल लिए हुए है!

व्यासजी की कहीं यह बात याद आ जाती है इस देश पर राज करने के लिए एक लड़ाका घुडसवार व उसके 150-200 लोगों की सेना ही बहुत है। बाबर, मुगल, कंधार पार से आए हमलावर  व अंग्रेजों ने इतने ही लोगों की मदद से इस देश पर राज किया था। आज हालात देखे कि कोरोना का मुकाबला करने के लिए लोग गाय के गोबर व गौमूत्र के सहारे है।  कोरोना का भविष्य क्या होगा इस बारे में मुझे एक घटना याद आती है। जब पढ़ते थे तो एक चुटकुला पढ़ा था कि शिक्षक ने विद्यार्थी से पूछा कि मोहन चोरी करता है इसका भूतकाल क्या होगा तो जवाब मिला कि जेल जाएगा। यही कोरोना के मामले में ही होगा। उसका हल धर्मकर्म, दाढ़ी से नहीं बल्कि वैक्सीन से होगा जोकि हमारे पास है ही नहीं। सच्चाई का खुलासा करके हमें ताकत देते रहिए व्यासजी।

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