nayaindia buying russian oil india रूसी तेल खरीद कर क्या मिलेगा?
kishori-yojna
बेबाक विचार | नब्ज पर हाथ| नया इंडिया| buying russian oil india रूसी तेल खरीद कर क्या मिलेगा?

रूसी तेल खरीद कर क्या मिलेगा?

buying russian oil india

आपदा में अवसर देख रही भारत की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। पिछले पूरे साल में भारत ने रूस से करीब डेढ़ करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा था, जो भारत के कुल तेल आयात का महज दो फीसदी था। लेकिन इस साल फरवरी से लेकर अभी तक भारत की पेट्रोलियम कंपनियों ने एक करोड़ 30 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद कर ली है। आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी होगी क्योंकि रूस ने भारत को 35 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट पर तेल देने का प्रस्ताव दिया है और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऊर्जा सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा है कि भारत को अगर सस्ता तेल मिलता है तो उसे खरीदने में कोई दिक्कत नहीं है। इसका मतलब है कि भारत आर्थिक, कूटनीतिक और राजनीतिक तौर पर रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने के लिए तैयार है।

कायदे से इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर के फर्क से भी खुदरा कीमत पर बड़ा असर होता है, जबकि रूस 35 डॉलर का डिस्काउंट देने को तैयार है। लेकिन रूस से तेल खरीद का मामला इतना सरल नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुद ही पिछले दिनों कहा कि इसमें कई चीजें अभी तय होनी बाकी है, जिसमें भुगतान के तरीके से लेकर तेल ढुलाई पर होने वाले खर्च का मामला शामिल है। रूस चाहता है कि डॉलर और यूरो की बजाय उसे तेल का भुगतान रूबल में हो। रूबल में भुगतान करने में समस्या यह है कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद दुनिया भर के देशों ने रूस पर जो पाबंदी लगाई है उससे रूबल की स्थिति कमजोर हुई है। उसमें स्थिरता नहीं है और उसमें भुगतान का समझौता करना जोखिम का काम हो सकता है। इसी तरह यूक्रेन और रूस में चल रहे युद्ध की वजह से बीमा का खर्च भी काफी बढ़ जाएगा।

जहां तक तेल ढुलाई का सवाल है तो रूस से भारत तक तेल ले आना हमेशा ज्यादा खर्च का काम होता है और इसमें समय भी बहुत ज्यादा लगता है। सितंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉस्को यात्रा के समय वैकल्पिक रास्ते को लेकर चर्चा हुई थी। अभी तक भारत स्वेज नहर के रास्ते सेंट पीटर्सबर्ग से चेन्नई तक कच्चा तेल ले आता है। इसमें 35 से 36 दिन का समय लगता है। अगर रूस के व्लादिवोस्टोक बंदरगाह से कच्चा तेल भारत लाया जाता है तो उसमें 19 दिन का समय लगेगा लेकिन वह रास्ता दक्षिण चीन सागर और मलाक्का की खाड़ी से होकर गुजरता है। इससे खर्च तो थोड़ा कम होगा लेकिन यह बहुत सुरक्षित और सुगम रास्ता नहीं है। यहीं कारण है कि रूस से भारत की खरीद कभी भी बहुत ज्यादा नहीं रही है।

भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी तेल आयात करता है लेकिन सिर्फ दो फीसदी आयात रूस से होता है, जबकि 53 फीसदी आयात खाड़ी के देशों से होता है। भारत अपनी जरूरत का 15 फीसदी तेल अफ्रीका से खरीदता है और 14 फीसदी अमेरिका से। अभी अचानक अगर रूस से खरीद बढ़ा दी जाती है तो कई संतुलन बिगड़ेंगे और भारत का खर्च बढ़ेगा। एक बड़ा सवाल यह भी है कि रूस अभी यूक्रेन से युद्ध के पहले वाली कीमत पर भारत को तेल देने के लिए तैयार है। यह कीमत 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल की है। सो, मौजूदा कीमत यानी एक सौ डॉलर प्रति बैरल की कीमत के मुकाबले यह कम है और इसलिए भारत को बीमा और ढुलाई पर होने वाले ज्यादा खर्च के बावजूद इसकी कीमत कम पड़ रही है। लेकिन जब युद्ध खत्म होगा और कीमतें कम होंगी तब क्या होगा? क्या तब भी भारत को रूस से डिस्काउंट मिलेगा या तब रूस अपने यूरोपीय खरीदारों को तरजीह देना शुरू कर देगा?

ब्रिटेन की विदेश मंत्री एलिजाबेथ ट्रस से मुलाकात के दौरान गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात पर उनका ध्यान खींचा था। जयशंकर ने कहा था कि जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो देशों के लिए स्वाभाविक है कि वे सस्ता विकल्प खोजें लेकिन दो-तीन महीने इंतजार करें और रूस से तेल व गैस खरीदने वाले बड़े खरीदारों को देखें तो तस्वीर वहीं रहेगी, जो पहले थी। उन्होंने कहा कि भारत शीर्ष 10 खरीदारों में भी नहीं होगा। सोचें, इसके बावजूद इसे मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है कि भारत सस्ता कच्चा तेल रूस से खरीद रहा है। इसमें संदेह नहीं है कि इससे भारत को बचत होगी लेकिन युद्ध की वजह से बीमा खर्च ज्यादा होगा और ढुलाई का खर्च भी ज्यादा होगा। इसलिए बचत कोई बहुत बड़ी नहीं होगी। ऊपर से इस छोटी बचत के लिए भारत को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

Read also पाकिस्तानः गरीबी में आटा गीला

ध्यान रहे दुनिया ने इस समय रूस को अछूत बनाया हुआ है। उसने यूक्रेन पर हमला करके विश्व की शांति भंग की है और अव्यवस्था पैदा की है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर पाबंदी लगाई हुई है। रूस से भारतीय कंपनियों का तेल खरीदना हालांकि उस पाबंदी का उल्लंघन नहीं है पर भारत को ध्यान रखना चाहिए कि इसे लेकर अमेरिका ने क्या कहा है। अमेरिका ने कहा है कि भारत का रूस से तेल खरीदना अमेरिकी पाबंदी का उल्लंघन नहीं है लेकिन इतिहास में इस बात को याद रखा जाएगा कि युद्ध के समय भारत ने रूस का साथ दिया था। इसके जवाब में भारत की ओर से यूरोपीय देशों का हवाला दिया जा रहा है, जो अब भी रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं और जर्मनी जैसे कुछ देशों ने तो रूबल में भुगतान की रूस की शर्त भी मान ली है।

सवाल है कि क्या यूरोपीय देशों और भारत के रूस से तेल व गैस खरीद का मामला एक जैसा है? दोनों मामले बिल्कुल अलग हैं। यूरोपीय देश पहले से रूस से तेल व गैस की खरीद पर निर्भर हैं। इसलिए वे अचानक खरीद बंद करते हैं तो उनके यहां ऊर्जा का संकट होगा। इसके उलट भारत पहले से रूस से तेल व गैस ज्यादा नहीं खरीदता है इसलिए भारत के सामने कोई संकट नहीं है। भारत सिर्फ कुछ पैसों की बचत के लिए रूस से तेल खरीद बढ़ा रहा है ताकि उसका आयात बिल कम हो और वह देश में खुदरा कीमत को स्थिर रख सके। तेल की बढ़ती खुदरा कीमत सरकार की छवि के लिए अच्छा नहीं है इसलिए रूस से सस्ता तेल खरीद बढ़ाने की तैयारी हो रही है। ध्यान रहे यूरोपीय देश पैसे बचाने के लिए खरीद नहीं कर रहे हैं। उलटे वे करोड़ों-अरबों डॉलर की मदद यूक्रेन को दे रहे हैं। इसके उलट भारत यूक्रेन को कोई मदद नहीं कर रहा है। बहरहाल, भारत सरकार चाहे तो उत्पाद शुल्क में कटौती करके थोड़े दिन तक कीमतों को स्थिर रख सकती है। लेकिन उसे उत्पाद शुल्क नहीं घटना है और न पेट्रोलियम कंपनियों का मुनाफा कम होने देना है। इसलिए वह देश की अंतरराष्ट्रीय साख दांव पर लगा कर दुनिया में अछूत बने रूस से तेल की खरीद बढ़ाएगा। यह बहुत नासमझी वाला कूटनीतिक फैसला होगा। यह संकट थोड़े दिन का है पर इससे भारत की साख और छवि स्थायी तौर पर बिगड़ेगी।

Tags :

By अजीत द्विवेदी

पत्रकारिता का 25 साल का सफर सिर्फ पढ़ने और लिखने में गुजरा। खबर के हर माध्यम का अनुभव। ‘जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से शुरू करके श्री हरिशंकर व्यास के संसर्ग में उनके हर प्रयोग का साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और अब ‘नया इंडिया’ के साथ। बीच में थोड़े समय ‘दैनिक भास्कर’ में सहायक संपादक और हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ शुरू करने वाली टीम में सहभागी।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2 + nineteen =

kishori-yojna
kishori-yojna
ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
लिफ्ट देकर कार में लूटपाट गैंग का खुलासा
लिफ्ट देकर कार में लूटपाट गैंग का खुलासा