जनता की वैक्सीन कब आएगी?

कोरोना महामारी रोकने वाली वैक्सीन कब आएगी, सारी दुनिया का ध्यान इस पर ही लगा है। अगर वैक्सीन बन गई- जिसकी संभावना अब काफी उज्ज्वल दिखती है- तब भी वह आम जन को कब तक उपलब्ध होगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। पेटेंट और धनी देशों की मारामारी के बीच गरीब देशों के गरीबों को यह कब लग पाएगी, यह मुद्दा है। जब तक ऐसा नहीं होता महामारी काबू में नहीं आएगी। इसलिए पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र कोरोना से लड़ने के लिए सभी को वैक्सीन देने का आग्रह दोहराया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेश ने अपील जारी की कि दुनिया साथ आकर वैश्विक महामारी से लड़े। यह तो साफ है कि दुनिया इस वक्त बेसब्री के साथ एक ऐसे टीके के इंतजार में है, जिसका इस्तेमाल कोरोना वायरस के खिलाफ किया जा सके। कई देशों में इस वक्त कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन ट्रायल स्तर पर है। रूस और चीन जैसे देशों में वैक्सीन पर काम तेज गति से हो रहा है।

इसी बीच संयुक्त राष्ट्र ने इस पर जोर दिया कि हमें ऐसी वैक्सीन की जरूरत है जो किफायती हो और सबके लिए उपलब्ध हो। एक तरह से वह जनता की वैक्सीन हो। यानी अभी से- जब प्रयोग का दौर है- संभावित वैक्सीन को वैश्विक जनता की भलाई के लिए माना जाना चाहिए, क्योंकि कोविड-19 किसी सीमा को नहीं मानता है। यूएन ने डब्लूएचओ द्वारा वैक्सीन पर तेजी से काम करने पर आगे बढ़ने के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की भी अपील की है। 170 से अधिक देशों को शामिल कर कोवैक्स नामक पहल हुई है। मगर मुश्किल यह है कि अमेरिका वैश्विक कोशिश में शामिल होने से इनकार कर चुका है। इससे डब्लूएचओ की कोरोना की वैक्सीन विकसित करने और उसे पूरी दुनिया में समान रूप से पहुंचाने की कोशिश में में दिक्कत आने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अकेले टीकाकरण से इस संकट को हल नहीं किया जा सकता। खासकर ऐसा निकट भविष्य में नहीं हो सकता। इसके लिए मौजूदा उपकरणों के विस्तार और मरीजों तक इलाज पहुंचाने के इंतजामों की जरूरत होगी। इस साल की संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक शुरू हो चुकी है। इसमें दुनिया भर के नेता इस गंभीर संकट पर अपना मत रखेंगे। इसमें कोरोना महामारी की चर्चा होने की संभावना है।

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