हिंदू कौन है ?

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डी. वाय. चंद्रचूड़ ने गुजरात राष्ट्रीय विवि विध्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को चुना अपनी बात कहने के लिए। देश का नेतृत्व आज गुजराती भाइयों के हाथ में हैं। उनका नाम लिए बिना चंद्रचूड़ ने उन्हें ही संबोधित किया है। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यदि इसमें एक भाषा, एक धर्म, एक जाति, एक संस्कृति की बात करें तो यह उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी इसी विविधतामय संस्कृति की सुरक्षा के बारे में चिंतित है। उन्होंने युवा छात्रों से कहा कि आप अपने अधिकारों के लिए जरुर लड़ें। सरकार के खिलाफ भी बोलना हो तो बोलें लेकिन आपको सबसे ज्यादा उनके लिए लड़ना चाहिए, जो बेजुबान हैं, जो कमजोर हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संविधान को सर्वसमावेशी कहा है। उसमें भारत को किसी मजहब, जाति या वंश की बपौती नहीं बताया गया है। उनकी यह बात उन नेताओं पर लागू होती है, जिन्होंने दिल्ली के चुनावों में घृणा फैलाने की कोशिश की। कर्नाटक की सरकार ने उन स्कूली बच्चों के खिलाफ कार्रवाई कर दी जो नए नागरिकता कानून का विरोध कर रहे थे और गुजरात में छात्राओं को जांच के बहाने निर्वस्त्र कर दिया गया। चंद्रचूड़ का यह दृष्टिकोण ठीक है कि भारतीयता अपने आप में बड़ी चीज है। उसे किसी मजहबी, जातीय या भाषाई दायरे में कैद नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा नहीं होता तो हमारे संविधान निर्माता भारत को हिंदू या मुस्लिम राष्ट्र कहते, भारत नहीं कहते। मेरा मानना है कि सच्चा हिंदुत्व संकीर्ण हो ही नहीं सकता। वह ही भारतीयता का शुद्ध और सर्वोत्तम रुप है। अद्वैत और अभेद का भाव ही किसी को सच्चा हिंदू बनाता है। कोई दूसरा नहीं है, सब अपने हैं, सब एक हैं और उनमें और हम में कोई भेद नहीं है, यही भाव किसी भी मनुष्य को सच्चा हिंदू बनाता है। हिंदू इतना उदार है कि यह मुसलमानों का दिया हुआ नाम ‘हिंदू’ उसने अपना लिया। सच्चाई तो यह है कि सच्चे हिंदुत्व और भारतीयता में रत्ती भर भी फर्क नहीं है।

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