एचसीक्यू पर पुनर्विचार जरूरी

अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया की दवा एचसीक्यू के कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए जारी अनुसंधानों पर रोक लगा दी है। ऐसा इस दवा के सामने आए खराब असर के कारण किया गया है। इसके पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यह कह कर सबको चौंका दिया था कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए वे एहितायतन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (एचसीक्यू) की गोलियां ले रहे हैं।

बहरहाल, कुछ खबरों के मुताबिक भारत में भी यह दवा मरीजों को बेरोकटोक दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कोरोना बीमारी से लड़ने में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन की उपयोगिता को लेकर कभी कोई अध्ययन नहीं हुआ है।

इसलिए आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इस दवा का इस्तेमाल जिस तरह से किया जा रहा है, वह हैरानी की बात है। कोरोना बीमारी की कोई दवा न होने के कारण हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन को इसका एक इलाज सुझाया गया था। आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय ने एहतियातन इसके इस्तेमाल की अनुमति दी है। मगर मेडिकल पत्रिका न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमण के इलाज में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन बेअसर है।

चीन और फ्रांस में मरीजों पर किए गए रेंडमाइज्डकंट्रोल ट्रायल (आरसीटी) में भी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन फेल हो गई। आरसीटी किसी दवा के प्रभाव को जानने का सबसे प्रभावकारी और विश्वसनीय तरीका है। दोनों ही देशों में किए गए ट्रायल में पाया गया कि दवा न केवल बेअसर है, बल्कि मरीज पर इसका बुरा असर भी हो सकता है। आईसीएमआर के विशेषज्ञों ने भी पिछले महीने कहा था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन के असर को लेकर इतने कम प्रमाण हैं कि उसके बहुत सीमित इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है।

मगर मेडिकल विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने इसके इस्तेमाल को लेकर वैज्ञानिक और नैतिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) इस दवा का इस्तेमाल रोके। गौरतलपब है कि बीते अप्रैल में जब अमेरिका ने भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन की मांग की तो बड़ा विवाद हुआ। तब मांग उठी थी कि मलेरिया के इलाज में दी जाने वाली इस दवा को भारत पहले अपनी जनता के लिए पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित रखे और उसके बाद ही किसी अन्य देश को सप्लाई करे। लेकिन तकरीबन डेढ़ महीने बाद ये साफ हो गया है कि हाइड्रोक्लोरोक्विन कोरोना से लड़ने में बेअसर है। बल्कि इसके इंसान पर प्रतिकूल असर भी हो सकते हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि आईसीएमआर अपने पहले के रुख पर पुनर्विचार करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares