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महिलाओं का शोषण सार्वभौमिक सच्चाई

रोमन पोलांस्की के बारे में छपी एक छोटी-सी खबर ने 37 साल पहले अमेरिका में घटी संभवतः उस ‘मीटू’ घटना की याद दिला दी जिसमें एक किशोर युवती ने एक जाने-माने फिल्म निर्देशक पर अपना यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। वह जानी-मानी हस्ती इस मामले में सजा मिलने के बाद अमेरिका से फरार हो गया था व आज तक फरार ही चल रहा है। हुआ यह कि जब फ्रांस में एक निदेशक को अपनी फिल्म एक ऑफिसर एंड ए स्पाई के लिए फिल्म अवार्ड मिला तो यह घटना घटी। यह अवार्ड अमेरिकी अकादमी अवार्ड जैसा ही है। इस फिल्म को विभिन्न श्रेणियों में 12 अवार्ड मिले। इसके लिए अमेरिका समारोह में पोलांस्की खुद मौजूद नहीं थे क्योंकि उन्होंने कहा था कि अगर वे इस अवसर पर मौजूद रहे तो लोग उन्हें पीट-पीटकर मार देंगे। अनेक महिलाओं ने उन्हें अवार्ड दिए जाने के विरोध में उस समारोह का बहिष्कार कर दिया। पेरिस में हुए इस समारोह में देश के फिल्म उद्योग के शोषण की शिकार हुई अडीले डेनिल नामक फ्रांस की युवा व बहुचर्चित अभिनेत्री ने कहा कि पोलांस्की को यह अवार्ड दिए जाने से लगता है कि आयोजकों के लिए महिलाओं के साथ बलात्कार करना कोई बुरी चीज नहीं है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए समरोह का बहिष्कार किया व इस मौके पर अन्य दूसरी महिलाओं ने भी उनका अनुसरण किया।

रोमन पोलांस्की फ्रांसीसी प्रोलिश फिल्म निर्माता, लेखक, निर्देशक हैं। उनका जन्म 10 अगस्त 1933 को हुआ था। उन्हें अपनी फिल्म द पियानिस्ट के लिए 2003 में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए अकादमी अवार्ड मिला था। वह पेरिस में पैदा हुआ था मगर 1937 में उसका परिवार पोलैंड चला गया था। उनका परिवार यहूदी था अतः हिटलर शासन के दौरान उनके परिवार को जुलमो का सामना करना पड़ा व आविद्रज की कुख्यात यातनाग्रह में उसकी मां की मौत हो गई। विश्व युद्ध समाप्त हो जाने के बाद पोलांस्की ने अमेरिका व ब्रिटेन में तमाम पुरुस्कार हासिल करने वाली फिल्मे बनाई। उसने 1959 में अभिनेत्री बारबरा लास से शादी की। मगर 1961 में दोनों का तलाक हो गया। बाद में उसने अपनी फिल्म किलिंग ईव की हीरोइन शेरोन टेट से शादी की जिसे बाद में कुछ लोगों ने मार डाला।

आज से 43 साल पहले मार्च 1977 में पोलांस्की को अमेरिका के लॉस एंजेलिस में एक 13 साल की किशोरी सामंथा गीमर के साथ बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उस पर नशीली दवाओं का इस्तेमाल कर इस युवती के साथ सेक्स करने के आरोप लगाए गए। शुरू में पोलांस्की ने खुद को निर्दोष बताया। मगर अपने वकील की सलाह पर अपनी गलती स्वीकार कर ली। उन्हें पांच मामलों में छूट मिल गई ताकि उसे कम सजा मिले। अदालत ने उसकी मनोवैज्ञानिक जांच करवाए जाने के आदेश दिए व बोर्ड को इस मामले की रिपोर्ट सौंपे जाने से पहले ही वह अपनी सजा पूरी किए बिना फरवरी 1978 में फ्रांस भाग गया। बलात्कार की शिकार किशोरी गीमर के मुताबिक पोलांस्की ने उसकी अभिनेत्री मां से कहा था कि वह दुनिया की जानी-मानी महिला पत्रिका ‘वाग’ के फ्रेंच संस्करण के लिए उसकी बेटी की तस्वीर खींचना चाहता है। उसकी मां ने इसकी इजाजत दे दी व उसकी बिना अधोवस्त्र तस्वीर खींचने के लिए पोलांस्की उसे अपने एक मित्र के फ्लैट पर ले गया। उसने पोलांस्की के कहने पर बिना ऊपरी वस्त्र पहने अपनी तस्वीर खिंचवाई। वह दोबारा भी ऐसे ही फोटो खिंचवाने के लिए तैयार हो गई। लास एंजेलिस के जिस घर में यह तस्वीरे खींची गई वह उसके मित्र अभिनेता जैक निकलसन का था जोकि उस समय शहर के बाहर था।

उस समय उसके मित्र की सहेली अंजेलिना ह्यूस्टन ने कहा की गीमर के मुताबिक पोलांस्की ने उसे शैंपेन पिलाकर तस्वीरे खींची। जब शैपेंन खत्म हुई तो मुझे उसके इरादों की भनक लगी। मुझ लगा कि मुझे वहां नहीं होना चाहिए था। उसने मुझसे लेट जाने को कहा। वह मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा। मैंने उन्हें कई बार कहा कि मैं यह सब नहीं करना चाहती हूं। मैं बहुत डर गई थी। वहां कोई बखेड़ा नहीं खड़ा करना चाहती थी। अंदर की आवाजें सुनकर उसके मित्र की सहेली ने दरवाजा खटखटाया। इसके जवाब में पोलांस्की ने कहा कि कुछ नहीं शूटिंग चल रही है। उसके विरोध के बावजूद पोलांस्की ने उसके साथ प्राकृतिक व अप्राकृतिक तरीको से सैक्स किया। गीमर का आरोप था कि उसकी सहमति के बिना ही सैक्स किया गया था जबकि पोलांस्की की दलील थी कि यह सब कुछ उसकी सहमति से हुआ था। अपनी आत्मकथा में पोलांस्की ने दावा किया कि उसने गीमर की सहमति से ही सैक्स किया था। व उसके पूछे जाने पर उसने कहा था कि वह मजा ले रही है। उसने उसको कोई नशीली दवा नहीं दी थी। मुकदमा पूरा हाने पर अदालत ने पोलांस्की से 90 दिनों तक अपनी मनोवैज्ञानिक जांच करवाने को कहा। इस दौरान वह अदालत से अनुमति लेकर अपनी अधूरी फिल्में पूरी करने के लिए यूरोप भी गया। मगर जब इस मामले की सुनवाई कर रहे एक जज ने पोलांस्की को एक युवती के कपड़े में हाथ डाले तस्वीर देखी तो उसने उसकी पैरोल रद्द कर दी। उसका कहना था कि पोलांस्की की हरकतों को देखते हुए उसका जेल में रहना जरूरी है। वह 1 फरवरी को लंदन भाग गया जहां उसका एक और घर है। उसे लगा कि ब्रिटेन उसे गिरफ्तार करके अमेरिका भेज देगा। अतः वह अगले दिन फ्रांस भाग गया। जहां की उसके पास नागरिकता है। फ्रांस अपने नागरिकों का प्रत्यावर्तन नहीं करता है। उसने अमेरिका का यह अनुरोध नहीं माना। गीमर ने उस पर 1998 में मुकदमा चलाया। पोलांस्की ने उससे कोर्ट के बाहर समझौता कर लिया व उसे 5 लाख डालर देने के बाद बाकी 6 लाख डालर की रकम नहीं दी। बाद में गीमर ने कहा कि उसने मेरे साथ बुरा काम किया था। मगर मैं चाहती हूं कि वह अमेरिका वापस लौट आए। मुझे लगता है कि उसने अपनी गलती मान ली है व उसे इस पर दुख है। वह समाज के लिए खतरा नहीं है। यह एक दुखद सपना है। मगर मैं इस सपने के साथ जी सकती हूं। वह तबसे फरार है व उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेडकार्नर नोटिस जारी किया है। वह उन्हीं देशों में जाता है जिनका अमेरिका के साथ प्रत्यार्तन समझौता नहीं है। उसका कहना है कि मैंने क्या गलत किया। जज भी सुंदर लड़कियों के साथ सोना चाहते है। इसमें गलत क्या है। यह है विदेशी मानसिकता। इस घटनाक्रम पर गीमर ने भी अपनी आत्मकथा प्रकाशित की है।

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