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महिलाओं का जन-आंदोलन

ऑस्ट्रेलिया में महिला आंदोलन का जैसा नजारा देखने को मिला है, वैसा हाल के दशकों में कहीं और नहीं दिखा। महिला आंदोलन आज मोटे तौर पर सोशल मीडिया के अभियान में सिमट गया है। उस समय ऑस्ट्रेलिया के सभी मुख्य शहरों में हजारों का महिलाओं का सड़क पर एक साथ उतरना बेशक ऐसी घटना है, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस लिहाज से सोमवार यानी 15 मार्च का दिन पूरे दुनिया में महिला आंदोलन के इतिहास की एक प्रमुख तारीख बन गया। ऑस्ट्रेलिया के शहरों में महिलाओं ने लैंगिक समानता और यौन हिंसा के पीड़ितों को न्याय के लिए रैलियां निकालीं। ये रैलियां हाल ही में हुए यौन उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव और ऑस्ट्रेलिया के कुछ बड़े राजनीतिक कार्यालयों में उत्पीड़न के लगे आरोपों के बाद निकाली गईं। आयोजकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से मिलने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।

आयोजकों ने कहा कि वे चाहती थीं कि प्रधानमंत्री उनसे आकर सबके सामने मिलें। उन्होंने कहा- हम उनके कार्यालय से 200 मीटर दूर हैं। हमारे लिए बंद दरवाजों के पीछे मिलना उचित नहीं है- खासकर जब हम यौन उत्पीड़न के बारे में बात कर रहे हैं, जो कि बंद दरवाजों के पीछे होता है। मॉरिसन के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने निजी बैठक का एक प्रस्ताव दिया गया था। इसके आगे और किसी टिप्पणी से उन्होंने इनकार कर दिया। गौरतलब है कि हाल ही में सामने आए मामलों में बलात्कार के आरोप शामिल है- जिसमें अटॉर्नी जनरल क्रिश्चियन पोर्टर पर भी आरोप लगे। पोर्टर ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि ऐसा हुआ ही नहीं है। लेकिन माना गया है कि हर आरोपी की पहली प्रतिक्रिया ऐसी ही होती है। इससे पहले फरवरी में प्रधानमंत्री मॉरिसन ने संसद भवन में महिला कर्मचारी के साथ बलात्कार के एक कथित आरोप को लेकर माफी मांगी थी। महिला ने एक अनाम शख्स पर यह आरोप लगाया है। महिला का आरोप था कि उसके साथ 2019 में रक्षा मंत्री लिंडे रेनॉल्ड्स के कार्यालय में बलात्कार हुआ था। ये अपराध मॉरिसन की लिबरल पार्टी के कार्यकर्ता ने किया था। फिलहाल पोर्टर और रक्षा मंत्री दोनों ही छुट्टी पर हैं। इन सब मामलों को लेकर अब महिला आंदोलन इतना बड़ा रूप ले चुका है कि शायद सिर्फ छुट्टी पर भेजना पर्याव्त नहीं होगा।

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