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Friday, May 14, 2021
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जब सवाल ना पूछे जाएं

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भारत इस समय बर्बादी के जिस हाल में है, फिलहाल उससे बदतर हालात की कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। इसके बावजूद महामारी की इस आपदा के लिए अगर कोई जवाबदेही तय नहीं हो रही है, तो उसका सीधा कारण यही है कि देश में सवाल पूछने वाले लोग या तो चुप कर दिए गए हैं या झूठी सूचनाओं की ऐसी बरसात की गई है, जिससे लोगों के दिमाग में सवाल उठे ही नहीं। हालांकि ये सूरत अब एक स्थायी सा अनुभव बन गई है, इसके बावजूद जब तक अंतरराष्ट्रीय सूचकांक हमारा ध्यान इस ओर खींचते हैं कि हम कहां पहुंच गए हैं। ऐसा ही ताजा सूचकांक मीडिया की आजादी से संबंधित है, जिसे ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ नाम की संस्था हर साल तैयार करती है। इसकी ताजा रिपोर्ट में प्रेस की आजादी के मामले में 180 देशों की लिस्ट में भारत को 142वें नंबर पर रखा गया है। इस तथ्य पर गौर करना चाहिए कि इस संस्था ने भारत को पत्रकारिता के लिए सबसे खराब देशों की श्रेणी में शामिल किया है।

भारत पिछले साल भी सूची में 142वें स्थान पर ही था। 2016 में भारत का स्थान 133 था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्राजील, मेक्सिको और रूस के साथ भारत पत्रकारिता के लिए सबसे खराब देश है। इसमें भारत में कम होती प्रेस की स्वतंत्रता के लिए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इसमें कहा गया है कि भाजपा समर्थकों ने पत्रकारों को डराने-धमकाने का माहौल बनाया है। उन्होंने पत्रकारों की खबरों को ‘राज्य विरोधी’ और ‘राष्ट्र विरोधी’ करार दिया है। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है- ‘देश में कवरेज के दौरान पत्रकारों को पुलिस हिंसा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और अपराधियों के गैंग के हमलों का सामना करना पड़ा है। इसी तरह भ्रष्ट अधिकारियों ने पत्रकारों को कई बार अपमानित भी किया है।’ रिपोर्ट में कहा गया कि 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा पार्टी के आम चुनाव जीतने के बाद से मीडिया पर हिंदू राष्ट्रवादी सरकार के अऩुरूप काम करने का दबाव बनाया गया है। हिंदुत्व की विचारधारा के समर्थक सार्वजनिक बहस को राष्ट्र विरोधी विचार साबित करने पर जुटे हैं। हिंदुत्व समर्थकों के खिलाफ लिखने वाले या बोलने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है, उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर नफरता भरा अभियान चलाया जाता है। क्या इनमें कोई एक ऐसी बात है, जिससे आज सचमुच इनकार किया जा सकता है?

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साभार - ऐसे भी जाने सत्य

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