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शी जिनफिंग की सनक से परेशान दुनिया

आज जिस एक व्यक्ति की सनक व मनमानी ने भारत समेत पूरी दुनिया को परेशान कर रखा है उसका नाम शी जिनफिंग है जो कि अपने देश चीन को सुपर पावर बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। शी ने अपने देश में अपने पैर जमाने की शुरुआत पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष शुरू करके की थी व बाद में उसके निशाने पर अपने विरोधी नेता आ गए। शी जिनफिंग अपने देश का सबसे मजबूत प्रभावशाली नेता हैं। वे न केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख हैं, बल्कि उन्होंने माओत्से तुंग के बाद देश के संविधान में बदलाव करके अपनी विशिष्ट स्थिति बना ली है। शी जिनपिंग के विरोध का मतलब है कि जो भी राष्ट्रपति को चुनौती देगा उसे देश में कम्युनिस्ट प्रशासन के लिए दुश्मन माना जाएगा।

वे 2012 में चीन का राष्ट्रपति बने था। उसके बाद 2019 में एक सात सदस्यीय टीम ने तय किया कि वे अगले पांच साल तक शासन करेंगे। उन्होंने संविधान में किसी के दो बार राष्ट्रपति बन जाने की व्यवस्था ही हटा दी। बीजिंग में 1953 में जन्मे शी जिनफिंग के पिता कम्युनिस्ट पार्टी निर्माताओं में से थे। वे माओ के काफी करीब बताए जाते हैं मगर सांस्कृतिक क्रांति के पहले 1962 में उनके उनसे संबंध खराब हो गए व उन्हें जेल में डाल दिया गया। जब शी जिनपिंग 15 साल के थे तो सरकार ने उन्हें पुनर्शिक्षा के लिए गांवों में भेज दिया ताकि वे कड़ी मेहनत करके जीवन की सच्चाई को करीबी से महसूस कर सके।

कायदे से उसे कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ हो जाना चाहिए था पर वह बहुत चालक था व उसने हालात को भांपते हुए पार्टी को अपना लिया। उन्होंने कई बार पार्टी में शामिल होने की कोशिश की मगर उनके उसके पिता के कारण स्वीकार नहीं किया गया। उन्हें 1974 में हेबेर्ट राज्य पार्टी के सचिव के रुप में शामिल किया गया। बाद में वे शंघाई चले गए और वहां के पार्टी प्रमुख बन गया। वे पार्टी नेताओं के काफी करीब आते चले गए व अततः पार्टी की सबसे ताकतवर पोलित ब्यूरो की स्टैडिंग कमेटी ने 2012 में अपना अध्यक्ष बनाने का फैसला किया। उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा ली व जानी मानी सुंदर चीनी गायिका पेंग लि युआन से शादी कर ली। उनकी बेटी शी मिनोज ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई की।

शी के तमाम करीबी रिश्तेदार विदेशों से व्यापार करते हैं। उनकी करतूतों के बारे में अक्सर विदेशी अखबारों में छपता रहता है। उन्होंने अपने देश के आर्थिक विकास में तेजी लाने के साथ साथ वहां प्रदूषण कम करने के अहम काम किए व बहुचर्चित वन बेल्ट वन रोड की शुरुआत की जो कि सदियों पुराने सिल्क रुट का ही रूप है ताकि वह सड़क के जरिए चीनी समान को अपने देश से यूरोप के बाजारों तक पहुंचा सके। उन्होंने दक्षिण चीन सागर में अपना दबदबा बढ़ाया। एशिया व अफ्रीका में अरबों डॉलर का निवेश किया व भारत के दुश्मन जैसे पाकिस्तान को अपने साथ मिलाया व हमारे पड़ोसियों जैसे नेपाल व बांग्लादेश तक को अपने हित में काम करने के लिए प्रभाव डाला।

जिनफिंग ने सरकारी मीडिया से देश के लोगों में देशभक्ति व राष्ट्रीयता कूट कूट कर भर देने के लिए मजबूर किया व एक सशस्त्र नेता के रुप में अपनी छवि दिखवायी। चीन में उन्होंने अपने विरोधी 10 लाख पार्टी नेताओं को भ्रष्टाचार के आरोप में मरवा डाला। इसके कारण देश में उनका विरोध जड़ से समाप्त हो गया। मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वाले वकीलों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां करवा कर देश में सेंसरशिप लागू करवा कर आम चीनी नागरिक को सरकार की मेहरबानी पर जिंदा रहने के लिए बाध्य कर दिया। इसके बावजूद देश में उनका विकल्प तैयार होने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि जब तक उनका कार्यकाल समाप्त होगा पार्टी के ज्यादातर वरिष्ठ सदस्य रिटायर हो जाएंगे। उन्हें माओ के बाद चीन का सबसे शक्तिशाली नेता माना जाता है।

शी जिनफिंग सेंट्रल मिलिटरी कमीशन यानी कि अपने देश की सेना के प्रमुख हैं। उनका एक सूत्री कार्यक्रम चीन को विश्व नेता बनाने का है। वे खुद को इतना शक्तिशाली समझते हैं कि अमेरिका तक को आंखें दिखाने से नहीं कतराते हैं। उनका कहना है कि अगर चीन व अमेरिका के बीच टकराव हुआ तो यह दोनों देशों को बरबाद करके रख देगा। अमेरिका दक्षिण चीन सागर में उनकी हरकतों से खुश नहीं है मगर वे इतना ज्यादा शक्तिशाली हो चुका है कि 2014 में चीनी हैकरों ने अमेरिकी कार्यालयों के कंम्प्यूटरों तक में अपना दखल बढ़ाने में सफलता हासिल कर ली थी और 2.20 करोड़ लोगों के निजी रिकार्ड उड़ा लेने में सफल हो गए थे।

शी जिनफिंग एशिया के देश को यह धमकी देते रहे हैं कि लोग अमेरिका पर निर्भर रहने की न सोचें व सिर्फ किसी एशियाई देश की धुरी पर रहने की ही कोशिश करें क्योंकि एशियाई लोगों की सुरक्षा सिर्फ एशिया ही कर सकता है। उनके प्रशासन में जापान से रिश्ते बहुत खराब रहे हैं। चीन द्वारा एक द्वीप पर कब्जा जमाने की कोशिश से जापान खुश नहीं है। चीन के उत्तरी कोरिया से बहुत गहरे रिश्ते हैं हालांकि वह दक्षिण कोरिया को भी अपने हथियार बेच रहा है। उसके रूस से भी बहुत घनिष्ट संबंध है क्योंकि वहां भी वामपंथियों का ही शासन है। वह रुस का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। अतः हमारे रक्षा मंत्री अपनी रूस यात्रा के दौरान इस देश व चीन के संबधों को भारत के हक में प्रभावित कराने में कामयाब हो जाए इसमें संदेह नजर आता है।

चीन हमारे पड़ोसी दुश्मन पाकिस्तान को आर्थिक, सामरिक, तकनीकी मदद कर रहे हैं। उसने 1950 में ताईवान से अपने सारे संबंध तोड़ कर पीपुल्स रिपब्लिक आफ चाइना को दुनिया में सबसे पहले मान्यता दी थी। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है व तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वह अब पाकिस्तान को परमाणु ऊर्जा को बेहतर बनाने के लिए उसकी मदद कर रहा है। पाकिस्तान चीन व इस्लामिक देश के बीच पुल का काम कर रहा है। हमारा पड़ोसी व मित्र बांग्लादेश भी हमारे खराब संबंधों का सबसे ज्यादा फायदा उठा रहा है। तीन ओर से भारत को घेरने वाले बांग्लादेश को चीन सेना से हथियार मिल रहे हैं। उसने बांग्लादेश से आयात किए जाने वाले 97 फीसदी सामान पर कर समाप्त कर दिया है।

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