इस बार सूरत बदलेगी?

ये सवाल वाजिब है कि योगी आदित्यनाथ सरकार की महिलाओं को सुरक्षा देने की अब की तमाम योजनाएं नाकाम रहीं, तो अब ‘मिशन-शक्ति’ अभियान से क्या हासिल हो जाएगा? उलटे इससे महिलाओं की प्राइवेसी का अहम मुद्दा उठा है। हालांकि भाजपा सरकार निजता की स्वतंत्रता जैसे मूलभूत प्रश्नों को ज्यादा अहमियत नहीं देती, फिर भी ये मुद्दा महत्त्वपूर्ण है। ‘मिशन-शक्ति’ अभियान के तहत लखनऊ पुलिस अब ऐसे मामलों पर त्वरित कार्रवाई के लिए शहर के चुनिंदा स्थानों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस कैमरे लगवाएगी। पुलिस के मुताबिक इसका मकसद छेड़छाड़ जैसी घटनाओं के दौरान उस जगह की तस्वीरें सीधे कंट्रोल रूम तक भेजना है, ताकि पुलिस तत्काल पहुंच कर अभियुक्तों पर कार्रवाई कर सके। ये इस मामले में अगर इस सरकार की पहली घोषणा होती, तो जरूर ही इस पर बहुत से यकीन करते। लेकिन फिलहाल सवाल यह उठा है कि एंटी-रोमियो स्क्वैड्स का क्या हुआ? वे दस्ते भी तो इसी मकसद से बनाए गए थे।

इसकी सफलता तो दूर की बात है, महिला सुरक्षा के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार का असल रिकॉर्ड सवालों से घिरा है। उन्नाव, हाथरस, बलरामपुर और अन्य इलाकों में हुई कथित बलात्कार की घटनाओं ने उसके रिकॉर्ड को लांछित किया है। अब यूपी पुलिस का कहना है कि लखनऊ में ऐसी 200 जगहों की पहचान की गई है, जहां महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं ज्यादा होती हैं। सबसे पहले इन्हीं जगहों पर आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से युक्त कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि इन इलाकों पर हर वक्त नजर रखी जा सके। इन कैमरों की खासियत यह होगी कि ये चेहरे के हाव-भाव से ही किसी महिला के साथ हो रही छेड़छाड़ का पता लगा लेंगे। ये दावा भी विवादास्पद है। इसमें पुलिस ज्यादती नहीं होगी, इसे सुनिश्चित करना मुश्किल है। खासकर उस हाल में जब पुलिसकर्मी पितृ-सत्तात्मक मानसिकता से भरे हुए हैं। बेहतर यह होता कि राज्य सरकार पहले इस बात की समीक्षान करती कि महिला सुरक्षा संबंधी उसकी पहले की योजनाएं क्यों नाकाम रहीं। पिछले दिनों सरकार ने ‘ऑपरेशन दुराचारी’ नामक अभियान चलाने की भी बात कही थी, जिसके तहत महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म या अन्य अपराध करने वालों के पोस्टर चौराहों पर लगाए जाने थे। बहरहाल, एंटी रोमियो स्क्वैड्स से लेकर ऑपरेशन दुराचारी तक से हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। तो ऐसा कैसे होगा, यह समझना मुश्किल है।

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