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असम में एनआरसी पर सियासी टकराव

संपादकीय डेस्क

असम में एनआरसी से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन पंचायत अधिकारियों और राज्य सरकार के सर्किल अफसरों ने किया था। अल्पसंख्यक संगठनो ने सवाल उठाया है कि 26 लाख लोगों को अचानक अवैध नागरिक कैसे घोषित किया जा सकता है? उनके मुताबिक उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। मुख्यमंत्री से भी हस्तक्षेप की अपील की गई है।जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने असम में नागरिकता के मुद्दे पर म्यामांर जैसे हालात पैदा करने का आरोप लगाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया था। 

दिल्ली एक्शन कमेटी फॉर असम नामक एक संगठन की ओर दिल्ली में एनआरसी और नागरिकता के मुद्दे पर आयोजित एक सेमिनार में मदनी ने कहा- "जब से असम में भाजपा सरकार सत्ता में आई है, इस मुद्दे को धार्मिक रंग देने की कोशिश हो रही है। मूल नागरिकों को ही बांग्लादेशी करार दिया जा रहा है।" उनका कहना था कि यह असम को म्यांमार बनाने का प्रयास है। मदनी का आरोप है कि सरकार 48 लाख विवाहित अल्पसंख्यक महिलाओं के नाम हटाने की साजिश कर रही है।

लेकिन मदनी के इस बयान की चौतरफा निंदा हो रही है। राज्य के दो तबकों में दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में उनके खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज हुए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मदनी के कथित भड़काऊ बयान की ऑडियो और वीडियो रिकार्डिंग की जांच की जा रही है। दोष साबित होने पर कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कई राजनीतिक दलों ने मदनी के बयान की निंदा करते हुए उन पर एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया में रोड़े अटकाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि एनआरसी अपडेट करने की प्रक्रिया का विरोध करने वालों को सरकार का दुश्मन माना जाएगा। यह विरोध सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देने के समान है, क्योंकि उसी के निर्देश पर व निगरानी में यह काम चल रहा है। अल्पसंख्यक संगठनों के उग्र तेवरों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने सोनोवाल के घर ब्रह्मपुत्र गेस्ट हाउस को बुलेटप्रूफ बनाने का फैसला किया है।

एनआरसी पर बढ़ते विवाद और इस मुद्दे पर फैले भ्रम को ध्यान में रखते हुए सरकार ने लोगों की आशंकाओँ को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाने का फैसला किया है। उधरप्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा है कि वह ऐसा एनआरसी चाहती है जिसमें गलतियां नहीं हो। पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा है- "मैंने ही मुख्यमंत्री रहते एनआरसी अपडेट करने की पहल की थी। एनआरसी विदेशियों के मुद्दे से जुड़ा है, यह कोई धार्मिक मुद्दा नहीं है।"सत्तारुढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के इन बयानों के बावजूद कई अल्पसंख्यक संगठन एनआरसी विवाद को भड़का कर अपनी रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए सरकार के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। इन संगठनों के मूड से साफ है कि एनआरसी का ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद विवाद और तेज होगा।

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