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चीन को आखिर पाक क्या निर्यात करेगा?

संपादकीय डेस्क
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कुछ समय पहले चीन ने सड़क के जरिए कशगर को पाकिस्तान के अहम बंदरगाह ग्वादर से जोड़ने के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर परियोजना भी शुरू की। ये परियोजना चीन की महत्त्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना का हिस्सा है। इसके जरिए चीन आज के दौर में सड़क और जल मार्गों के जरिए प्राचीन सिल्क रूट को फिर से साकार करना चाहता है।2013 में चीन और पाकिस्तान ने 46 अरब डॉलर के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसी के तहत काराकोरम राजमार्ग को फिर से बनाने और अपग्रेड करने पर भी सहमति बनी।दोनों देशों का कहना है कि इस परियोजना से चीन और पाकिस्तानदोनों को फायदा होगा। लेकिन सामने आ रहे आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। चीन को होने वाला पाकिस्तान का निर्यात 2016 की आखिरी छमाही में लगभग आठ प्रतिशत गिर गया है, जबकि इस दौरान पाकिस्तान में चीन से होने वाले आयात में 29 फीसदी का उछाल देखने को मिला है।

ऐसे में बहुत-से पाकिस्तानी कारोबारी मानने लगे हैं कि इस दोस्ती का ज्यादातर फायदा सिर्फ चीन को हो रहा है। पिछले मई में पाकिस्तान ने शिकायत की थी कि चीन उसके बाजार में सस्ते दामों पर स्टील की डंपिंग कर रहा है। पाकिस्तान ने ऊंचा शुल्क लगाने की धमकी भी दी। अंतरराष्ट्रीय जानकार कहते हैं कि अगर कोई देश चीन से जुड़ रहा हो, तो वह उसे आखिर क्या निर्यात करेगा? इस परियोजना में 1,300 किलोमीटर लंबा यह हाईवे चीन के पश्चिमी शहर कशगर से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत तक आता है। गिलगित से होकर गुजरने वाला यह दो लेन का हाइवे चीन के लिए पाकिस्तान के साथ उसकी मजबूत दोस्ती का प्रतीक है जिसे चीन ने अरबों डॉलर के निवेश के साथ सींचा हैं।

कुछ पाकिस्तानी कारोबारी मानते हैं कि आर्थिक कोरिडोर से उनके देश को कुछ फायदा होगा। लेकिन चीन में सुरक्षा के हालात और जटिल कस्टम नियम पाकिस्तानी कारोबारियों की राह में बाधा हैं। पाकिस्तानी कारोबारियों का कहना है कि अगर आप चीन से सामान लेते हैं तो उसमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन अगर आप पाकिस्तानी सामान लाते हैं, तो उस पर लगने वाला शुल्क ही तय नहीं है। आज यह पांच प्रतिशत है और कल को 20 प्रतिशत हो सकता है। कभी कभी तो चीनी सीधे सीधे कह देते हैं कि इसकी अनुमति नहीं है। ये व्यापारी बताते हैं कि तीन साल पहले लापिस लाजुली नाम के नीले पत्थरों पर उनसे प्रति किलो 15 युआन लिए गए थे। अब यह शुल्क बढ़ाकर 50 युआन प्रति किलो कर दिया गया है। वहीं कस्टम अधिकारियों का कहना है कि बहुत सारी चीजें हैं जिनसे शुल्क तय होता है और उनके बारे में निश्चित तौर पर बताना मुश्किल है।

शिनचियांग प्रांत में हाल के दिनों में सुरक्षा भी सख्त हुई है। एक बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इस प्रांत में असंतोष और हिंसक घटनाओं को देखते हुए दसियों हजार सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। ऐसे में, वहां रहने वाले पाकिस्तानी कारोबारियों को संदेह की निगाह से देखा जाता है। कभी-कभी तो एक ही दिन में उन्हें कई बार जांच से गुजरना पड़ता है।

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