कीटनाशकों से खतरे पर नई रोशनी

दुनिया भर में किसान अपनी फसलों की रक्षा और पैदावार बढ़ाने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैँ। लेकिन हाल की कुछ दुखद घटनाओं ने भारत में कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में पिछले अक्टूबर में कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल के चलते 45 से ज्यादा किसानों की मौत हो गई। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में देश भर में 7,060 किसानों की मौत कीटनाशक से जुड़े हादसों की वजह से हुई। 

कीटनाशकों का ज्यादा और गलत तरीकों से इस्तेमाल करने से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बुरा असर होता है। यूरोपीय संघ की तरफ से कराए गए एक अध्ययन में ये बात सामने आयी है कि खाद्यानों में कीटनाशकों की ऊंची मात्रा का सीधा प्रभाव इनसान के दिमाग पर पड़ता है। जिन माताओं में गर्भावस्था के दौरान ऑर्गनोफॉस्फेट मेटाबालाइटिस के लक्षण पाए गए, उनके शिशुओं में दो वर्ष की उम्र तक मानसिक विकास ठीक से ना होने की संभावना ज्यादा थी साथ ही  सात वर्ष की उम्र तक बौद्धिक विकास पूरा न होने की स्थितियां भी देखी गईं। ऑर्गनोफॉस्फेट मेटाबोलाइटिस का संबंध कई कीटनाशकों से पाया गया है। 

भारत में कीटनाशकों का इस्तेमाल करने वाले किसानों के लिए खतरा कहीं ज्यादा है। यहा तक की कीटनाशक युक्त खाद्यों के कारण उपभोक्ताओं की सेहत भी जोखिम में है। इसकी वजह कीटनाशकों से संबंधित सरकारी नियमों का सख्त ना होना और आम जन में इनके बारे में जागरूकता का अभाव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसे कीटनाशकों को श्रेणी- एक में रखा है, जिनकी शरीर के अंदर कुछ ग्राम मात्रा का पहुंचना भी खासा खतरनाक होता है। कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015-16 में भारत इस्तेमाल हुए कुल कीटनाशकों में ऐसे पेस्टीसाइड्स का हिस्सा 30 फीसदी था। 

मुश्किल यह है कि सरकार भारतीय किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक बनाने में नाकाम रही है। नतीजा है कि किसान बिना सुरक्षा इंतजामों के ही कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं। अक्सर खेतों के सभी हिस्सों में कीटनाशकों का छि़ड़काव कर दिया जाता है, जबकि उन्हें सिर्फ फसलों के पास ही डाला जाना चाहिए। देश में जितने कीटनाशकों का उपयोग होता है, उनमें से सिर्फ 261 ही रजिस्टर्ड हैं। विकसित देशों में प्रतिबंधित किए जा चुके कई कीटनाशकों का भारत में धड़ल्ले से छिड़काव किया जाता है।  भारत में कीटनाशकों के उपयोग की समीक्षा करने के लिए सराकर ने अनुपम वर्मा कमेटी बनाई थी.... 2016 में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में 13 बेहद खतरनाक कीटनाशकों पर रोक लगाने की बात कही था.. और छह अपेक्षाकृत कम खतरनाक कीटनाशकों का इस्तेमाल 2020 तक चरणबद्ध रूप से खत्म करने की सिफारिश की थी। 

दरअसल, कीटनाशक पशु पक्षियों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने कड़े नियम लागू करने की मांग की है जिससे इनके इस्तेमाल पर अंकुश लग सके।  इस विषय पर दो दशकों की रिपोर्टों का विश्लेषण करने के बाद 29 वैज्ञानिकों के पैनल ने पाया कि ‘नुकसान के स्पष्ट सबूत’ दो प्रकार के कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिले हैं।

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