Loading... Please wait...

‘जियो पारसी’ पर समुदाय में मतभेद

एक रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में हर रोज दो पारसी मरते हैं। औसतन चार पारसियों के मरने पर एक बच्चे का जन्म होता है। इसलिए इस समुदाय की आबादी घट रही है। इसकी रक्षा करने के लिए ‘जियो पारसी’ नाम से नई पहल इसलिए शुरू की गई थी। इस कार्यक्रम में पारसी जोड़ों को मुफ्त में कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा मुहैया कराई जाती है। इसे समुदाय के प्रभावशाली लोगों ने सफल माना है। हालांकि बहुत से लोग इस कार्यक्रम की आलोचना भी करते हैं। उन्हें लगता है कि यह पारसियों की उस कट्टर धारणा को भी मजबूत करता है कि समुदाय के लोगों को सिर्फ आपस में ही शादी करनी चाहिए। 

पारसी लोग करीब एक हजार साल पहले ईरान में प्रताड़ना झेलने के बाद भाग कर भारत आए। पारसी समुदाय पैगंबर जोरास्टर के उपदेशों पर चलता है। उनके मंदिरों में अग्नि की आराधना होती है। यह समुदाय ब्रिटिश राज में काफी फला-फूला और भारत के सबसे अमीर और ताकतवर समुदाय के रूप में उभरा। टाटा, वाडिया और गोदरेज घराने सभी पारसी समुदाय के ही हैं। हालांकि बीते दशकों में उनकी आबादी लगातार घटती गई। दुनिया में पारसी समुदाय की सबसे बड़ी आबादी भारत में है, लेकिन 1940 के बाद उनकी तादाद घटते घटते आधी रह गई। 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में कुल पारसियों की संख्या 57,264 थी। लगातार घटती आबादी के कारण समुदाय के अस्तित्व पर मंडराते खतरे की चेतावनी दी जाने लगी। 2013 में भारत सरकार ने ‘जियो पारसी’ अभियान शुरू किया। 

इस कार्यक्रम के तहत आर्थिक मदद दी जाती है। कृत्रिम गर्भाधान यानी आईवीएफ पर आने वाले खर्च का 50 से 100 फीसदी तक सरकार उठाती है। कितनी मदद मिलेगी, इसका फैसला दंपतियों की आर्थिक स्थिति देख कर होता है। जो लोग बच्चा चाहते हैं और उनके पास पैसे की कमी है, उनके लिए ये योजना वरदान की तरह है। पारसी समुदाय में ज्यादातर लोग पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से ठीक स्थिति में हैं। लेकिन ये लोग फिर जल्दी शादी नहीं करते और दूसरे भारतीय समुदायों की तुलना में इनका परिवार छोटा होता है। यही वजह है कि इस समुदाय में जन्मदर कम है। रुढ़िवादी लोग पारसी लोगों पर अपने समुदाय में शादी करने के लिए दबाव डालते हैं। ऐसे में, जोड़ा बनाने के लिए साथी की संख्या और घट जाती है। समुदाय के सुधारवादी लोग हालांकि इस भावना को भी पारसियों की घटती आबादी का सबब मानते हैं। समुदाय से बाहर शादी करने वाली लड़की के बच्चों को पारसी अपने प्रार्थना स्थलों में जाने से रोक देते हैं। 

इस कार्यक्रम की आलोचना करने वालों का कहना है- इन बच्चों का समुदाय में स्वागत किया जाना समुदाय की संख्या को बढ़ाने का स्वाभाविक तरीका होता। उसकी जगह उन बच्चों और उनके मां-बाप का त्याग कर दिया गया है। समुदाय के कुछ लोगों ने हाल ही में इस कार्यक्रम के प्रचार के लिए चलाए गए पोस्टर अभियान का विरोध किया। उनका कहना है कि ये मुहिम पितृसत्तात्मक, उच्च वर्गवादी है और बेऔलाद मांओं को कलंकित करती है। लेकिन अभियान की सफलता से खुद ऐसी आलोचनाओं को जवाब मिल रहा है। 

Tags: , , , , , , , , , , , ,

182 Views

बताएं अपनी राय!

हिंदी-अंग्रेजी किसी में भी अपना विचार जरूर लिखे- हम हिंदी भाषियों का लिखने-विचारने का स्वभाव छूटता जा रहा है। इसलिए कोशिश करें। आग्रह है फेसबुकट, टिवट पर भी शेयर करें और LIKE करें।

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

आगे यह भी पढ़े

सर्वाधिक पढ़ी जा रही हालिया पोस्ट

मुख मैथुन से पुरुषों में यह गंभीर बीमारी

धूम्रपान करने और कई साथियों के साथ मुख और पढ़ें...

भारत ने नहीं हटाई सेना!

सिक्किम सेक्टर में भारत, चीन और भूटान और पढ़ें...

पाक सेना प्रमुख करेंगे जाधव पर फैसला!

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय और पढ़ें...

बेटी को लेकर यमुना में कूदा पिता

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर शहर के पत्नी और पढ़ें...

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd