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उत्तर-पूर्व के बाढ़ की किसी को फिक्र नहीं

यह उत्तर-पूर्वी राज्यों के प्रति हमारे मेनस्ट्रीम मीडिया की बेपरवाही ही है कि उसके लिए उस इलाके में आई बाढ़ प्रमुख खबर नहीं है। वरना वहां हालात काफी खराब हैं। 18 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं। खेतों में लगी फसलों और दूसरी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है। केंद्र ने नुकसान के आकलन के लिए भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (इसरो) की सहायता लेने की भी बात कही है। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल का चुनाव क्षेत्र माजुली द्वीप भी बाढ़ के कारण देश के बाकी हिस्सों से कट गया है। बाढ़ से एक सींग वाले गैंडों की जान पर भी खतरा पैदा हो गया है। असम में तो बीते दो सप्ताह से बाढ़ की भयावहता लगातार बढ़ी है। दो जुलाई को जहां राज्य के आठ जिलों के 2.9 लाख लोग बाढ़ की चपेट में थे। 12 जुलाई को 24 जिलों के 16 लाख लोग इसकी चपेट में आ गए। इस दौरान 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

एक सींग वाले गैंडों का सबसे बड़ा घर कहे जाने वाले काजीरंगी समेत नामेरी और पवित्रा नेशनल पार्क का ज्यादातर हिस्सा पानी में डूब गया है। काजीरंगा में अब तक चार गैंडों की मौत हो चुकी है। वहां ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राज्य में बने अस्थायी शरणार्थी शिविरों में हजारों लोगों ने शरण ले रखी है। चीन से सटे अरुणाचल प्रदेश में भी भारी बारिश से होने वाली भूस्खलन की घटनाओं से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। बीते मंगलवार को ऐसी ही एक घटना में एक परिवार के 14 लोग मलबे में धंस गए। मणिपुर में भी भारी बारिश से राजधानी इंफाल के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। पर्वतीय इलाका होने की वजह से यहां भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग- 37 समेत कई सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है।

असम में बाढ़ के मौजूदा दौर ने काजीरंगा नेशनल पार्क समेत कई पार्कों में रहने वाले जानवरों को भी खतरे में डाल दिया है। शिकारी इस मौके का लाभ उठा कर उनको निशाना बनाने की फिराक में हैं। बाढ़ की वजह से पार्क में अब तक 58 जानवरों की मौत हो चुकी है। इनमें एक सींग वाले गैंडों और हिरणों की तादाद ज्यादा है। पार्क के ज्यादातर हिस्से में पानी भर गया है। इससे बचने के लिए तमाम जानवरों ने पार्क के बीच से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर शरण ली। उनको हादसे का शिकार होने से बचाने के लिए हाइवे पर वाहनों की स्पीड पर अंकुश लगाने के उपाय किए गए हैं। वहां जगह-जगह अवरोधक लगाए गए हैं। इवरों को 40 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलने को कहा जा रहा है। ब्रह्मपुत्र के बीच में बसा दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली हर साल की तरह इस साल भी भारी बाढ़ और तटकटाव से जूझ रहा है। हर साल की तरह इस साल भी द्वीप का ज्यादातर हिस्सा पानी के नीचे है। माजुली के 58 गांव पानी में डूबे हुए हैं।

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