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अपनी ऑनलाइन सुरक्षा खुद खतरे में डालते हैं लोग

संपादकीय डेस्क
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एक हालिया सर्वेक्षण के दौरान भारत में 29 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया वे दिनभर लगातार अपने ईमेल चेक करते हैं। यह सर्वेक्षण छुट्टी पर रहने के दौरान उपभोक्ताओं के व्यवहार और स्वभाव को जानने के लिए किया गया। इसका मकसद यह जानना भी था कि डिजिटल आदतों से लोगों की व्यक्तिगत सूचना को लेकर कैसे खतरे पैदा हो रहे हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि लोग यह जानते हुए भी ईमेल से जुड़े रहना पसंद करते हैं कि इससे अलग होने पर उनको सुकून मिलेगा। सर्वे में हिस्सा लेने वाले 60 फीसदी लोगों ने संकेत दिया कि अवकाश के दिनों वे कम से कम एक घंटा अपने ई-मेल, लिखित संदेश पढ़ने और भेजने और सोशल मीडिया पर बिताते हैं।

छुट्टियां डिजिटल उपकरणों से फुर्सत पाने का एक अच्छा मौका हो सकती हैं, लेकिन ज्यादातर भारतीय ऐसा नहीं करते। गौरतलब है कि लोग जब असुरक्षित वाईफाई एक्सेस प्वाइंट्स का इस्तेमाल करते हैं तो वे अपनी व्यक्तिगत सूचनाओं के सार्वजनिक होने की संभावनाओं के साथ समझौता करते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने बताया- "हमारे अध्ययन से  जाहिर होता है कि चार में तीन भारतीय अपनी छुट्टी के दिनों में परिवार, दोस्त और सोशल मीडिया से जुड़ने के लिए असुरक्षित वाईफाई पर भरोसा करते हैं। इस तरह वे साइबर अपराधियों के शिकार बन जाते हैं। जबकि यात्रा पर होने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। सर्वे में 18 से 55 वर्ष की उम्र के 1,500 लोगों को शामिल किया गया था, जो रोजाना कनेक्टेड डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं। जानकारों ने सार्वजनिक और असुरक्षित वाईफाई नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है। उनका कहना है- अगर आपके लिए सार्वजनिक वाईफाई नेटवर्क का इस्तेमाल जरूरी है तो वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल कीजिए, जिससे आपकी सूचना निजी बनी रहेगी और डाटा सीधा आपकी डिवाइस से वहां पहुंचेगा जहां से आप जुड़ना चाहते हैं। 

इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि पिछले कुछ समय में महिलाओँ के ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में इजाफा हुआ है। नतीजन, महिलायें तनाव, चिंता का सामना कर रहीं हैं और इंटरनेट के इस्तेमाल से हिचक रहीं हैं। आठ देशों में किए गए एक सर्वे मुताबिक तकरीबन 23 फीसदी महिलाओं ने कम-से-कम एक बार इस तरह के दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का सामना जरूर किया है। 

शोधकर्ताओं ने कहा कि यह कोई दबी छुपी बात नहीं है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह का दुर्व्यवहार हो रहा है। लेकिन इस उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के जो नतीजे सामने आ रहे हैं वे वाकई खतरनाक हैं। फिर ऐसा नहीं है कि लॉगऑफ करने से ये बात या मामले वहीं खत्म हो जाते हैं। सर्वे के मुताबिक जिन लोगों ने भी ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना किया, उनमें से एक चौथाई ने बताया कि उन पर शारीरिक और यौन उत्पीड़न जैसे हमले भी हुए। तकरीबन 60 फीसदी महिलाओं ने कहा कि ऑनलाइन दुर्व्यवहार और शोषण के अधिकतर मामलों में अजनबी शामिल थे। ऑनलाइन उत्पीड़न झेलने वाली 55 फीसदी महिलाओं ने माना कि इनकी वजह से वे तनाव और चिंता की शिकार हुईं।

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