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आधुनिकता की ओर खुलते सऊदी दरवाजे

क्या‍ सऊदी अरब भी अब आधुनिकता के प्रभाव में आ रहा है। इस देश की आम छवि इस्लामी मान्यताओं से जकड़े समाज की है। लेकिन हाल में वहां जैसी फिल्में बनीं, उससे अनेक लोग अपनी ये राय बदलने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। दुबई में पिछले दिनों सऊदी अरब में बनी तीन फिल्में दिखाई गईं। इनमें एक फिल्म थी ‘वसती’, जिसका अर्थ है उदारवादी। यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है, जो 1990 के दशक में हुई थी। उस वक्त सऊदी अरब में एक नाटक के दौरान रुढ़िवादी लोगों का एक समूह मंच पर आ गया और उसने नाटक को बंद करवा दिया। इस घटना ने सऊदी अरब में कई साल तक थियेटर को ठप कर दिया। उस घटनाक्रम पर अली कलथामी ने बनी फिल्म ‘वसती’पिछले साल लॉस एंजिल्स में दिखाई गई थी। रियाद की अल यामामाह यूनिवर्सिटी में भी इसे दिखाया जा चुका है। ये वही जगह है, जहां दो दशक पहले उपरोक्त नाटक को रोका गया था।

कलथामी सऊदी अरब के सबसे मशहूर फिल्मकारों में से एक हैं। उन्होंने एकफिल्म कंपनी के अलावा तेलफाज-11 के नाम से एक यूट्यूब चैनल भी बनाया है।2011 में बनाये गए इस चैनल को अब तक एक अरब लोग देख चुके हैं।कलथामी की फिल्म वसती उन शॉर्ट फिल्मों में शामिल है, जिन्हें पिछले साल किंग अब्दुलअजीज सेंटर फॉर वर्ल्ड कल्चर की तरफ से मिली रकम से बनाया गया। कलथामी कहते हैं कि यह पहला मौका है जब फिल्म बनाने के लिए सरकार की तरफ से पैसा दिया गया है। सऊदी फिल्मकार अपनी फिल्मों को इंटरनेट पर स्ट्रीम कर सकते हैं।वैसे सऊदी अरब में कईफिल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाई जा रही हैं। मगर कुछ फिल्में ऐसी भी हैं, जो आम लोगों कीरोजमर्रा की मुश्किलों पर केंद्रित हैं।2013 में ‘वादजा’ नाम की फिल्म ने इतिहास बनाया। यह सऊदी अरब से ऑस्कर में भेजी गई पहली फिल्म बनी। यह फिल्म 10 साल की एक लड़की की कहानी है, जो लड़कों की तरह साइकिल चलाने का सपना देखती है। इस फिल्म को सऊदी महिलानिर्देशक हैफा अल-मंसूर ने लिखा और निर्देशित किया। यह फिल्म पूरी तरह सऊदी अरब में ही शूट की गई थी।

हाल में सऊदी अरब में सरकार ने मनोरंजन पर पाबंदियों में ढील दी है। इसी वजह से वहां अब फिल्में बन रही हैं।इस देश में आधी से ज्यादा आबादी की उम्र 25 साल से कम है। इनमें से ज्यादातर लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। लाजिमी है कि वे सरकारी सेंसरशिप से दूर दुनिया भर की चीजें देख सकते हैं।

सऊदी अरब में बहुत-से प्रभावशाली मौलवी और नागरिक भी पश्चिमी तर्ज के मनोरंजन को बुरा समझते हैं।सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान अपेक्षाकृत आधुनिक ख्यालों के बताए जाते हैं। वे रियाद में एक थ्रीडी एक्शन फिल्म की स्क्रीनिंग भी करवा चुके हैं। जद्दाह में भी कई फिल्में दिखाई गई हैं।सऊदी अरब के शहर धाहरन में पिछले कुछ सालों से होने वाले फिल्म महोत्सव को भी सरकार का समर्थन हासिल है। इस बार वहां लगभग 60 सऊदी फिल्में दिखाई गईं।

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