नई दिल्ली। लालू प्रसाद के परिवार को आईआरसीटीसी से जुड़े धन शोधन के कथित मामले में राहत नहीं मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने लालू प्रसाद सहित उनके परिवार के कई सदस्यों पर आरोप तय कर दिए हैं। गुरुवार को अदालत ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव सहित नौ लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। कोर्ट ने इस मामले के सात आरोपियों को बरी कर दिया है।
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने इस मामले में 16 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल की थी। इनमें से सात लोगों को अदालत ने बरी कर दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई तीन अक्टूबर को होगी। अदालत ने आरोप तय करते हुए कहा, ‘राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर अपराध से इनकम और पद के गलत इस्तेमाल का मजबूत शक है। दोनों पटना की उस जमीन का फायदा उठा रहे हैं, जिसे कथित तौर पर 2005 से 2014 के बीच लालू यादव के कहने पर उनके पक्ष में ट्रांसफर किया गया था’। उस समय लालू प्रसाद रेल मंत्री थे।
लालू प्रसाद के परिवार ने निचली अदालत के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे। सीबीआई ने इस याचिका का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि उनके पास मामले से जुड़े पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं। सीबीआई ने कई अहम दस्तावेज और मजबूत सबूत होने का दावा किया था। बाद में ईडी ने लालू प्रसाद सहित अन्य आरोपियों पर चार्जशीट फाइल की।
इसमें आरोप है कि लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते आईआरसीटीसी के तहत आने वाले रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में गड़बड़ी की गईं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को निजी कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टे पर दिया गया। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और इससे कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
