नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले डिजिटल लेन देन पर शुल्क लगाने का फैसला टाल दिया है। दो हजार रुपए से ज्यादा के लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला 15 अक्टूबर से लागू होने वाला था। लेकिन देश भर में हो रहे विरोध की वजह से सरकार ने इस फैसले के अमल पर दिवाली तक रोक लगा दिया है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे टालने का फैसला लिया है।
एनपीसीआई ने कहा है कि इसे दिवाली के तुरंत बाद लगाया जाएगा, हालांकि अभी तारीख नहीं बताई है। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले महीने फैसला किया था कि अगर ग्राहक दुकानदार को दो हजार रुपए से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट करता है, तो दुकानदार को कुल रकम पर 0.4 फीसदी एमडीआर शुल्क देना होगा। हालांकि दो लोगों के बीच नकद लेनदेन को इस शुल्क से अलग रखा गया था।
यह भी बताया गया था कि 75 हजार रुपए या उससे ज्यादा का भुगतान करने पर अधिकतम तीन सौ रुपए का फिक्स्ड चार्ज लगेगा। इसके साथ ही रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस या ईंधन पर दो हजार रुपए से ज्यादा के भुगतान पर पांच रुपए का फिक्स्ड चार्ज तय किया गया था। बताया जा रहा है कि दशहरा औऱ दिवाली के दौरान देश भर के बाजारों में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, गहने और सामानों की भारी बिक्री होती है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट बढ़ जाता है।
कारोबारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों का मानना था कि त्योहारों के बीच नया नियम लागू करने से दुकानों पर पेमेंट में रुकावट आ सकती है। व्यापारी संगठनों ने इसका खुल कर विरोध किया और यह भी कहा कि नकद लेनदेन बढ़ने पर छापेमारी की कार्रवाई तेज हो सकती है। तभी व्यापारियों के विरोध की वजह से एनपीसीआई ने दिवाली तक इस फैसले को आगे बढ़ा दिया है।
