जब अमृत दियाली ने बाढ़ के पानी में एक मानव हाथ देखा तो उन्हें लगा कि वह उनके छोटे भाई राजकुमार के हाथ जैसा है। राजकुमार अपनी पत्नी और चार साल के बेटे के साथ नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से लापता हैं।
‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, अमृत के भतीजे अविनाश ने कटे हुए हाथ की तस्वीर भेजते हुए उनसे कहा, ‘‘ मुझे एक ऐसा हाथ मिला है जो बिल्कुल चाचा के हाथ जैसा दिखता है।’’
अमृत के लिए यह खोज उम्मीद और डर दोनों लेकर आई। अब डीएनए जांच ही परिवार के लिए यह पता लगाने का एकमात्र रास्ता है कि बरामद अवशेष उनके भाई के हैं या नहीं।
यह मामला नेपाल के सामने मौजूद बड़ी चुनौती को दर्शाता है, जहां अधिकारी 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद बरामद सैकड़ों शवों की पहचान करने और लापता लोगों के परिजनों तक पहुंचने के लिए डीएनए जांच का सहारा ले रहे हैं।
‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, पुलिस अब तक 2,272 डीएनए नमूने एकत्र कर चुकी है। इनमें 1,260 नमूने शवों से और 1,012 नमूने परिजनों से लिए गए हैं, ताकि आपदा में मारे गए लोगों की पहचान की जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि डीएनए नमूने लेने और पहचान से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1,030 शवों को दफनाया जा चुका है। इनमें 222 महिलाओं के, 355 पुरुषों के और 453 ऐसे शव शामिल हैं, जिनकी लैंगिक पहचान नहीं हो सकी है।
हालांकि दियाली जैसे परिवारों के लिए पहचान की यह प्रक्रिया केवल फॉरेंसिक जांच नहीं है, बल्कि यह कई दिनों से जारी अनिश्चितता को खत्म करने और अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने का रास्ता भी है।
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राजकुमार दियाली (33) उनकी 30 वर्षीय पत्नी श्रुति और चार वर्षीय बेटा सिराज रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी में रह रहे थे, जब भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने तबाही मचाई।
उनके रिश्तेदारों ने परिवार की तलाश में नदी के किनारे चितवन और नवलपुर तक खोजबीन की। उन्होंने मलबे, मिट्टी और पत्थरों को हटाकर उन्हें जीवित खोजने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर शवों की तलाश शुरू कर दी।
बाढ़ आने के पांच दिन बाद राजकुमार के भतीजे अविनाश को नवलपुर में वह हाथ मिला। अमृत ने मंगलवार को डीएनए जांच के लिए उसका नमूना काठमांडू स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा। अमृत के अनुसार, यह नमूना जांच के लिए 182वें क्रम पर है।
उन्होंने ‘द काठमांडू पोस्ट’ से कहा, ‘‘हमने अब तलाश छोड़ दी है। अगर यह हाथ मेरे भाई का भी निकला तो कम से कम हमें निश्चित रूप से पता चल जाएगा।’’
लापता लोगों के परिवारों की सुविधा के लिए नेपाल पुलिस ने नुवाकोट के बिदुर में डीएनए नमूना संग्रह केंद्र भी खोला है, ताकि परिजन नमूने देने के लिए काठमांडू जाने से बच सकें।
नेपाल पुलिस अस्पताल के उपमहानिरीक्षक डॉ. दामोदर पौडेल ने कहा कि माता-पिता, बच्चों और भाई-बहनों जैसे करीबी रक्त संबंधियों के नमूने अज्ञात शवों से मिले डीएनए की तुलना करने में अधिक उपयोगी होते हैं।
पौडेल ने कहा कि शवों की पहचान में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए डीएनए जांच से पहचान प्रक्रिया में मदद मिलेगी।
अधिकारियों ने नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर 1,270 अज्ञात शवों का विवरण भी अपलोड किया है, ताकि परिवार यह जांच सकें कि उनके लापता परिजन बरामद शवों में शामिल हैं या नहीं।
Pic Credit : ANI
