नई दिल्ली। रूस के साथ कारोबार करने के मामले में आईना दिखाए जाने से नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर बड़ा टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि 24 घंटे में भारत पर बहुत बड़ा टैरिफ लगाएंगे। इतना ही नहीं ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत अच्छा कारोबारी साझीदार नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दवाओं पर ढाई सौ फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही है। गौरतलब है कि अमेरिका में बिकने वाली 40 फीसदी दवा भारत से जाती है। अगर ट्रंप ने इस पर ढाई सौ फीसदी टैरिफ लगाया तो यह कारोबार बुरी तरह से प्रभावित होगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को बिजनेस चैनल सीएनबीसी को टेलीफोन के जरिए दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत अच्छा बिजनेस पार्टनर नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत के टैरिफ दुनिया में सबसे ज्यादा हैं और यह बात लोग खुल कर नहीं कहते हैं। ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका से बहुत ज्यादा व्यापार करता है, लेकिन अमेरिका को भारत से उतना फायदा नहीं मिलता। इसलिए उन्होंने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला किया है, यह सात अगस्त 2025 से लागू हो जाएगा, लेकिन वे इस टैरिफ को अगले 24 घंटों के भीतर और बढ़ाने जा रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार संतुलन नहीं है और भारत, रूस के साथ व्यापार करके यूक्रेन के खिलाफ रूसी वॉर मशीन को ईंधन देने का काम कर रहा है। इस वजह से अमेरिका को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दवा उत्पादों पर ढाई सौ फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। सीएनबीसी के इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वे शुरू में दवाओं पर छोटा टैरिफ लगाएंगे, लेकिन फिर इसे एक से डेढ़ साल में बढ़ा कर डेढ़ सौ और फिर ढाई सौ फीसदी कर देंगे। ट्रंप ने कहा कि वे चाहते हैं कि दवाइयां अमेरिका में ही बनाई जाएं। उनका मानना है कि अमेरिका दवाइयों के लिए दूसरे देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है, खास कर भारत और चीन पर।
गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप ने सोमवार को भी भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसके बाद भारत ने पहली बार अमेरिका का नाम लेकर जवाब दिया था। ट्रंप ने रूस के साथ कारोबार करने को लेकर भारत को कठघरे में खड़ा किया था, जिसके बाद भारत ने रूस से अमेरिका और यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात का आंकड़ा जारी किया। भारत ने बताया कि अमेरिका यूरेनियम और खाद रूस से खरीदता है। यूरोपीय संघ का रूस के साथ कारोबार चल रहा है। ध्यान रहे यूक्रेन के साथ युद्ध छिड़ने के बाद अमेरिका ने रूस से भारत के तेल खरीदने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई थी। यह पाबंदी इसलिए नहीं लगाई गई थी ताकि दुनिया में तेल की किल्लत बहुत ज्यादा न बढ़ जाए।
