नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक को बेचने का फैसला कर लिया है। बुधवार, 14 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी अपनी 60.72 फीसदी हिस्सेदारी कनाडा के अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स को बेचेंगे। अपनी हिस्सेदारी बेच कर सरकार और एलआईसी को 52,877 करोड़ रुपए मिलेंगे।
इससे पहले भारत सरकार ने विनिवेश का सबसे बड़ा फैसला एयर इंडिया को बेचने का किया था। टाटा समूह को सिर्फ 18 हजार करोड़ रुपए में एयर इंडिया बेच दिया गया था। आईडीबीआई का सौदा उससे लगभग तीन गुने का है। आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के बाद भी बैंक में सरकार के पास 15 फीसदी और एलआईसी के पास 19 फीसदी शेयर रहेंगे। दोनों की कुल हिस्सेदारी 34 फीसदी बनी रहेगी।
बताया गया है कि सरकार ने बैंक के एक शेयर की सही कीमत तय करने के लिए दो स्वतंत्र एजेंसियों की मदद ली थी। इन एजेंसियों ने सारी गणना के बाद बताया कि आईडीबीआई बैंक के एक शेयर की तय कीमत 75.99 रुपए होनी चाहिए। कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स ने सरकार के तय किए गए इस बेस प्राइस से ज्यादा यानी 81 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से बोली लगाई। फेयरफैक्स की बोली सरकार के तय अनुमान से प्रति शेयर 5.01 रुपए ज्यादा थी, इसलिए सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया।
