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इथेनॉल ब्लेंडिंग पर सरकार की सफाई

नई दिल्ली। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के मामले में सरकार घिरी है। देश भर से सोशल मीडिया में ऐसे वीडियो और तस्वीरें पोस्ट की जा रही हैं, जिनमें इथेनॉल मिले पेट्रोल से गाड़ियों को होने वाले नुकसान की जानकारी दी जा रही है। लोग बता रहे हैं कि इससे गाड़ियों के इंजन को नुकसान हो रहा है और माइलेज कम हो रही है। भाजपा के समर्थक राइटविंग इन्फ्यूएंसर्स सबसे ज्यादा सक्रिय विरोध कर रहे हैं। इसे लेकर सरकार की ओर से शनिवार को सफाई दी गई।

सरकार के विशेषज्ञों सहित इस मामले के जानकारों की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। मारूति कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने भी प्रेस से बात की। सरकार की ओर से बताया गया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का काम रातों रात नहीं हुआ। यह एक जांची परखी, साइंटिफिक और चरणबद्ध तरीके से की गई प्रक्रिया है। सरकार ने कहा है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की ग्लोबल प्रैक्टिस अपनाई है और टॉप एजेंसियां भी इसका टेस्ट कर चुकीं हैं।

पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का देश भर में हो रहे विरोध पर दिल्ली में हुई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट वर्तिका शुक्ला ने बताया कि देश में साल 2013 और 2014 के दौरान पेट्रोल में सिर्फ डेढ़ फीसदी इथेनॉल मिलाया जा रहा था। अब इस प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग की जा रही है, जिसे ई20 पेट्रोल नाम दिया गया है। गौरतलब है कि 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद भी पेट्रोल के दाम लगभग पूरे देश में सौ रुपए लीटर से ज्यादा हैं।

गौरतलब है कि भारत में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल के मिश्रण वाले ई20 पेट्रोल का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस पेट्रोल से गाड़ियों की माइलेज कम हो रही है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि इथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है।

बहरहाल, प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल वर्तिका शुक्ला ने बताया कि विशेष रूप से साल 2018 में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को व्यवस्थित तरीके से सभी स्टेकहोल्डर्स के सामने चर्चा और विचार विमर्श के लिए रखा गया था। यह पूरा प्रोग्राम वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सियाम जैसी टॉप एजेंसियां इसकी बड़े लेवल पर टेस्टिंग कर चुकी हैं। वर्तिका शुक्ला के अनुसार, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का यह प्रोग्राम दुनिया भर में अपनाई जाने वाली ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेस के बिल्कुल अनुरूप है।

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