नई दिल्ली। देश में चीनी की कमी और बढ़ती कीमतों को लेकर शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सफाई दी। केंद्र ने कहा कि सिर्फ इथेनॉल का उत्पादन बढ़ने से देश में चीनी की कमी नहीं हुई है। सरकार ने कहा है कि इसके कई औऱ कारण हैं। माना जा रहा है कि त्योहारी सीजन की मांग और खराब मौसम के कारण गन्ने से कम चीनी बनने की वजह से भी संकट आया है। चीनी की कमी के कारण पिछले दो हफ्ते में इसके दाम में प्रति किलो 10 रुपए से ज्यादा की बढ़त हुई है।
इस बीच सरकार ने चीनी के दाम काबू में रहे, इसके लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने शुल्क मुक्त रॉ शुगर के आयात की मंजूरी दी है। 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर का आयात किया जाएगा। इस बीच सरकार ने दावा किया है कि चीनी संकट के पीछे इथेनॉल वजह नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई और वजहें हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार की शाम बताया कि चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए, चीनी का निर्यात रोकने से लेकर रॉ शुगर के ड्यूटी फ्री आयात को मंजूरी तक कई बड़े कदम उठाए गए हैं।
सरकार का कहना है कि त्योहारों के सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। यह भी कहा गया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। बताया गया है कि इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12 फीसदी था, जो घट कर 2025-26 में करीब नौ फीसदी हो गया है। इसके अलावा, देश में उत्पादित होने वाले इथेनॉल का लगभग तीन चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से आता है।
