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अदानी फिर बेनकाब?

नई दिल्ली। अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने बताया है कि अदानी समूह के खिलाफ कार्रवाई करने में भारत की पूंजी बाजार नियामक एजेंसी सेबी की अनिच्छा का कारण उसकी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच और उनके पति की अदानी समूह से जुड़े विदेशी कोष में हिस्सेदारी है। हालांकि सेबी प्रमुख ने इस आरोप को ‘आधारहीन’ और ‘चरित्र हनन’ की कोशिश बता खारिज किया है। वही कांग्रेस ने कहा है कि हिंडनबर्ग के नए खुलासे ने ‘अदानी महाघोटाले’ के पूरे दायरे की जेपीसी जांच हो।

हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की प्रमुख बुच और उनके पति धवल बुच के पास उस विदेशी कोष में हिस्सेदारी है, जिसका इस्तेमाल अदानी समूह में धन की कथित हेराफेरी के लिए किया गया था।

हिंडनबर्ग के मुताबिक, बुच और उनके पति ने बरमूडा और मॉरीशस में अस्पष्ट विदेशी कोषों में अघोषित निवेश किया था। उसने कहा कि ये वही कोष हैं जिनका कथित तौर पर विनोद अदानी ने पैसों की हेराफेरी करने और समूक की कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। विनोद अदानी, अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी के बड़े भाई हैं।

हिंडनबर्ग ने जनवरी, 2023 में जारी अपनी पिछली रिपोर्ट में अदानी समूह पर वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी और शेयरों की कीमतें चढ़ाने के लिए विदेश कोष के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। हालांकि अदानी समूह ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह नियामकीय प्रावधानों का पालन करता है। इस बीच, कांग्रेस ने कहा कि हिंडनबर्ग के नए खुलासे ने ‘अदानी महाघोटाले’ के पूरे दायरे की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की उसकी मांग को मजबूती दी है जबकि तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि सेबी प्रमुख को इस्तीफा दे देना चाहिए।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “इस खुलासे से वर्ष 2022 में सेबी की चेयरपर्सन बनने के बाद सुश्री बुच के साथ गौतम अदानी की लगातार दो बैठकों को लेकर नए सवाल उठते हैं। सेबी उस समय अदानी के लेन-देन की जांच कर रहा था।” सेबी ने अक्टूबर, 2020 में अदानी समूह की कंपनियों की शेयरधारिता संरचना की जांच शुरू की थी। जांच यह निर्धारित करने के लिए शुरू की गई थी कि विदेशी निवेशक असली सार्वजनिक शेयरधारक हैं या प्रवर्तकों के मुखौटे भर हैं।

इस बीच, सेबी प्रमुख और उनके पति ने एक संयुक्त बयान जारी कर हिंडनबर्ग के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है। बुच दंपति ने कहा, ‘‘रिपोर्ट में लगाए गए आरोप पूरी तरह से आधारहीन और बेबुनियाद हैं। इनमें तनिक भी सच्चाई नहीं है। हमारा जीवन और वित्तीय स्थिति एक खुली किताब की तरह है। सभी जरूरी खुलासे पहले ही वर्षों से सेबी को दिये जा चुके हैं। हमें किसी भी वित्तीय दस्तावेज का खुलासा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है।’’

हिंडनबर्ग ने शनिवार रात को एक ब्लॉगपोस्ट में कहा कि माधवी और उनके पति ने ऑफशोर इकाइयों में निवेश किया जो कथित तौर पर इंडिया इन्फोलाइन (आईआईएफएल) द्वारा प्रबंधित फंड का हिस्सा थे और उसमें विनोद अदानी ने भी निवेश किया था।

इससे पहले जनवरी, 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया था कि अदानी समूह ‘खुल्लम-खुल्ला शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल रहा है। उस समय अदानी समूह की प्रमुख कंपनी अदानी एंटरप्राइजेज 20,000 करोड़ रुपये का अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) लाने की तैयारी कर रही थी।

विविध कारोबारों में सक्रिय समूह ने कहा था, ‘‘रिपोर्ट कुछ और नहीं बल्कि चुनिंदा गलत और निराधार सूचनाओं को लेकर तैयार की गयी है और जिसका मकसद पूरी तरीके से दुर्भावनापूर्ण है। जिन बातों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गयी है, उसे भारत की अदालतें भी खारिज कर चुकी हैं।’’

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