नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान में चल रही जंग का दायरा फैलता जा रहा है। ईरान होर्मुज की खाड़ी में हमला कर रहा है तो उसके प्रॉक्सी संगठन अमेरिका के सहयोगी देशों के तेल संयंत्रों को भी निशाना बना रहा है। अब तक ईरान या उसके सहयोगी खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते थे। लेकिन अब खबर है कि हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब के जजान स्थित अरामको रिफाइनरी पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का दावा किया।
गौरतलब है कि यह सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी में से एक है। इसकी क्षमता हर दिन करीब चार लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की है। यह लाल सागर के किनारे स्थित होने के कारण सऊदी अरब के ऊर्जा और तेल निर्यात नेटवर्क का अहम हिस्सा है। गौरतलब है कि लाल सागर के पास यमन के हूती संगठनों का नियंत्रण है। कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब ने यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में हूतियों ने सऊदी के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाने का दावा किया है।
हमले के बाद सोशल मीडिया पर रिफाइनरी से आग और धुएं के वीडियो सामने आए हैं। हालांकि, अभी तक सऊदी सरकार या अरामको ने रिफाइनरी पर सीधे मिसाइल लगने या किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि माना जा रहा है कि अगर अरामको को नुकसान होगा और उत्पादन प्रभावित होगा तो वैश्विक स्तर पर तेल का संकट गहराएगा।
उधर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने पिछले 24 घंटे में होर्मुज की खाड़ी से गुजरने की कोशिश कर रहे चार जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। इसके बाद चारों जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया। आईआरजीसी ने बयान में कहा, ‘पिछले 24 घंटों में चार जहाज दक्षिणी मार्ग से होर्मुज की खाड़ी पार करने की कोशिश कर रहे थे। आईआरजीसी नौसेना ने चेतावनी के लिए फायरिंग की, जिसके बाद सभी जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया’।
