नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से चल रही जंग के बीच पहली बार भारत ने इजराइल के हमलों के लेकर सवाल उठाया है। भारत ने लेबनान में हो रही आम लोगों की मौतों पर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि बड़ी संख्या में नागरिकों के मारे जाने की खबरें बेहद परेशान करने वाली हैं। जायसवाल ने कहा कि भारत, संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में अपने सैनिक भेजता है और लेबनान की शांति व सुरक्षा में भागीदार है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने युद्ध के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का मामला उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना और सभी देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना बेहद जरूरी है। इस जंग के दौरान पहली बार भारत ने सभी देशों की संप्रभुता व अखंडता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन का मुद्दा उठाया है। इससे पहले भारत ने ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले और ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने पर न तो सवाल उठाया था और न चिंता जताई थी।
बहरहाल, इजराइली हमलों से लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए हैं। विस्थापित हुए परिवारों के पास खाने के लिए पर्याप्त खाना तक नहीं बचा है। इजराइली सेना ने दावा किया कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में दो सौ से ज्यादा रॉकेट लॉन्चर नष्ट किए। उसने कहा कि उसकी कार्रवाई में ढाई सौ से ज्यादा हिजबुल्लाह के लड़ाके मारे गए। हालांकि इससे पहले बुधवार को इजराइल के हमले में तीन सौ से ज्यादा आम लोगों की मौत हुई थी। उधर हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम ने ऐलान किया है कि उनका संघर्ष आखिरी सांस तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन का प्रतिरोध तब तक चलता रहेगा, जब तक उसके पास लड़ने की ताकत है।
