नई दिल्ली। ईरान में चल रही जंग से तेल आपूर्ति प्रभावित होने का असर हर सेक्टर में दिखने लगा है। भारत की विमानन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी की है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के 11 दिन हो गए हैं और इस बीच जंग का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह से तेल सप्लाई का होरमुज की खाड़ी का रूट प्रभावित हो रहा है। इससे कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
जेट फ्यूल की कीमत बढ़ने का असर पूरी दुनिया में विमानन उद्योग पर दिख रहा है। भारत सहित एशिया और दुनिया भर की प्रमुख विमानन कंपनियों ने टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं और कई कंपनियां अपनी उड़ानें घटाने पर भी विचार कर रही हैं। अगर ऐसा होता है तो किराए में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि 50 साल के बाद विमानन उद्योग के सामने इस तरह का संकट पैदा हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए भारत की विमानन कंपनियां आने वाले दिनों में किराया और भी बढ़ा सकती हैं। विमानन कंपनियों का कहना है कि संचालन का खर्च बढ़ने के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को शुरू हुई जंग से होरमुज रूट प्रभावित हुआ है, जिसके बाद से तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
इस वजह से कच्चे तेल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। कच्चे तेल की कीमत मंगलवार को 93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। हालांकि एक दिन पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। इसी तरह जेट फ्यूल जो कीमत जंग से पहले 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल थीं, वह अब बढ़ कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है। तेल की कीमत बढ़ने और हवाई रूट प्रभावित होने से दुनिया भर में अब तक 40 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द भी हुई हैं।
