मास्को। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस में पहली बार हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समर्थक यूनाइटेड रशिया पार्टी ने संसद पर अपना दबदबा और मजबूत किया है। शुरुआती आधिकारिक नतीजों के अनुसार पार्टी ने 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में रिकॉर्ड 355 सीटें हासिल की हैं।
यह संख्या पार्टी को दो-तिहाई से अधिक बहुमत देती है। यूनाइटेड रशिया को पार्टी-सूची मतदान में 57.83 प्रतिशत वोट मिले। 2021 के चुनाव में उसका मत प्रतिशत 49.8 था। तीन दिन तक मतदान चला। चुनाव ऐसे राजनीतिक माहौल में हुआ जिसमें वास्तविक विपक्ष की मौजूदगी सीमित थी।
स्टेट ड्यूमा की 450 सीटों में से आधी यानी 225 सीटें पार्टी सूची के आधार पर और बाकी 225 अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में सीधे चुनाव के जरिए तय होती हैं। यूनाइटेड रशिया के साथ कई दूसरी पार्टियों ने भी सीटें जीतीं। ये पार्टियां महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम तौर पर क्रेमलिन की नीतियों का समर्थन करती रही हैं।
चुनाव में पहली बार यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों में भी मतदान कराया गया जिन्हें युद्ध शुरू होने के बाद मास्को ने रूस में मिलाने की घोषणा की थी, हालांकि इन क्षेत्रों पर रूस का पूर्ण नियंत्रण नहीं है। वर्ष 2014 में रूस द्वारा कब्जा किए गए क्रीमिया में भी मतदान हुआ। यूक्रेन ने अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में रूस की ओर से कराए गए मतदान को अवैध बताया है।
चुनाव से पहले रूस में विपक्ष पर कार्रवाई तेज हुई। युद्ध का विरोध करने वाली याब्लोको पार्टी को राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में भाग लेने से बाहर कर दिया गया। सरकार नियंत्रित मीडिया के व्यापक प्रभाव और वास्तविक विपक्ष की सीमित मौजूदगी के बीच हुए चुनाव ने रूसी राजनीति पर क्रेमलिन का नियंत्रण और मजबूत किया है। महंगाई और रूस के भीतर यूक्रेनी ड्रोन हमलों में तेजी के बीच भी यूनाइटेड रशिया ने पिछली बार से अधिक मत प्रतिशत हासिल किया।
