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किसी को रिटायर होने को नहीं कहा: भागवत

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने 75 साल की उम्र में खुद या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिटायर होने की संभावना को खारिज कर दिया है। संघ के शताब्दी समारोह से जुड़े तीन दिन के कार्यक्रम के तीसरे दिन गुरुवार को संघ प्रमुख ने कहा, ‘मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे या किसी और को 75 साल की उम्र पूरी करने पर रिटायर हो जाना चाहिए’। गौरतलब है कि कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि जब आपको 75 साल की शॉल ओढ़ा दी जाए तो इसका मतलब होता है कि आपको नए लोगों के लिए जगह खाली कर देनी चाहिए।

गौरतलब है कि अगले ही महीने संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री मोदी दोनों 75 साल के हो रहे हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में संघ प्रमुख ने कहा कि किसी शादीशुदा और परिवार वाले व्यक्ति के संघ प्रमुख बनने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन उस व्यक्ति के पूरा समय संघ को देना होगा। बहरहाल, संघ प्रमुख ने हिंदुओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की और ‘हम दो, हमारे तीन’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि हर घर में तीन बच्चे जरूर होने चाहिए।

मोहन भागवत ने भाजपा और संघ के बीच विवाद की खबरों को भी खारिज किया। उन्होंने गुरुवार को कहा, ‘भाजपा और संघ में कोई विवाद नहीं है। हमारे भाजपा सरकार ही नहीं सभी सरकारों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं हैं’। सरकार में फैसले में देखल देने के सवाल पर भागवत ने कहा कि यह कहना गलत है कि सरकार में सब कुछ संघ तय करता है। उन्होंने कहा, ‘हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन निर्णय वे ही लेते हैं। हम तय करते तो इतना समय नहीं लगता’।

गिरफ्तारी और 30 दिन की हिरासत पर मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री को हटाने के लिए लाए गए बिल पर भागवत ने कहा, ‘नेतृत्व व नेताओं की छवि साफ होना चाहिए। इस पर कानून बने या नहीं ये संसद तय करेगी’। आरएसएस के एक सौ साल पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिन के संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसके आखिरी दिन गुरुवार को सवाल जवाब हुए। इसमें एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि प्रणव मुखर्जी जब संघ के मंच पर आए तो संघ के प्रति उनकी गलतफहमी दूर हो गई थी। अन्य राजनैतिक दलों के भी मन परिवर्तन हो सकते हैं।

एक सवाल के जवाब में भागवत ने हिंदू मस्लिम विवाद पर भी खुल कर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, ‘नाम और शब्दों के झगड़े में हम नहीं पड़ते। इन शब्दों के कारण हिंदू मुस्लिम की भावना आ गई है’। उन्होंने कहा, टहिंदू मुस्लिम एकता की जरूरत नहीं है ये तो पहले से एक हैं। इनकी सिर्फ पूजा बदली है। लेकिन जो डर भर दिया है कि ये लोग रहेंगे तो क्या होगा, इतनी लड़ाई हुई, अत्याचार हुआ इतने कत्लेआम हुए, देश भी टूटा’।

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