नई दिल्ली। नेपाल में अचानक आई बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। गुरुवार की शाम तक जारी आंकड़ों के मुताबिक 359 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल के आठ जिलों से शव बरामद हुए हैं और उनकी पहचान के लिए मोर्चरी के बाहर तस्वीरें लगाई जा रही हैं। लापता लोगों की संख्या डेढ़ हजार से ज्यादा बताई जा रही है। भारत के करीब तीन सौ लोग लापता हैं। डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख सतीश रेड्डी भी तिब्बत में फंसे हैं। उनके साथ कई और लोग हैं।
इस बीच चीन ने एक और बाढ़ की चेतावनी दी है, जिससे नेपाल और भारत दोनों जगह चिंता बढ़ गई है। चीन ने बताया है कि रसुवागढ़ी सीमा से 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंदे नदी में पानी रुकने से एक अस्थायी झील बन गई है। वहां पानी बढ़ रहा है, जिससे झील टूटने का खतरा है। चीन की इस चेतावनी के बाद नेपाल के जल व मौसम विज्ञान विभाग ने भोटेकोशी के निचले इलाकों में लोगों को नदी किनारे से दूर रहने और सुरक्षित जगह जाने की सलाह दी है।
चीन ने बताया है कि अस्थायी झील करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर में फैली है। इसके टूटने पर भोटेकोशी में फिर तेज बाढ़ आ सकती है। गौरतलब है कि बुधवार को भी इसी तरह बर्फ का एक पहाड़ टूट जाने से अस्थायी झील बन गई थी। पानी का दबाव बढ़ने पर झील का बांध टूट गया और पानी पूरे वेग से नीचे की ओर गया। इससे भोटेकोशी नदी में बाढ़ आ गई। बाढ़ के अगले दिन गुरुवार को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ प्रभावित नुवाकोट जिले का दौरा किया। उन्होंने बट्टार बाजार स्थित आर्मी ट्रेनिंग सेंटर पहुंचकर बाढ़ से बने हालात और जारी राहत व बचाव अभियान की जानकारी ली।
बुधवार को आई बाढ़ में 359 लोगों की मौत हो चुकी है। बताया गया है कि नेपाल के आठ जिलों से शव मिले हैं, जिनमें सबसे ज्यादा चितवन में 132 और पूर्वी नवलपरासी में 82 शव मिले हैं। अभी डेढ़ हजार से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 288 भारतीय भी शामिल हैं। इस बीच खबर है कि 21 भारतीयों को अलग अलग जगहों से बचाया गया है, जिनमें 11 की पहचान हो चुकी है।
गौरतलब है कि बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे के करीब नेपाल और चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी यूएसजीएस ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। लेकिन बाद में पता चला कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे नदी में गिरा था। यह, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। बाद में यूएसजीएस ने भी बताया कि 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा यह झटका हिमस्खलन के कारण पैदा हुआ था।
