ओस्लो। नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2026 के शांति पुरस्कार का ऐलान कर दिया है। इस वर्ष यह पुरस्कार भारतवंशी नवनीतम नवी पिल्लै को दिया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं पिल्लै ने रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाले नेल्सन मंडेला समेत कई लोगों की मदद की थी। पिल्लै को युद्ध अपराध और नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाने और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के प्रयासों के लिए यह सम्मान दिया गया है।
नोबेल समिति ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा है कि दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं। ऐसे में शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना और उसे मजबूत करना बेहद जरूरी है। पुरस्कार मिलने के बाद पिल्लै ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर मजाकिया अंदाज में तंज किया। जब उनके साथियों ने पुरस्कार मिलने पर तालियां बजाईं, तो पिल्लै ने मजाक में कहा, ‘अगर आप थोड़ी और तालियां बजाएंगे, तो शायद मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ बांट लूं’।
नोबेल पुरस्कार समिति के अध्यक्ष योर्गेन वाट्ने फ्राइडनेस ने कहा कि इस साल के पुरस्कार के जरिए समिति दुनिया को याद दिलाना चाहती है कि देश हो या दुनिया कानून का पालन करना जरूरी है। इसी से व्यवस्था चलती है और विवादों को बिना हिंसा के सुलझाया जा सकता है।
बहरहाल, नवनीतम नवी पिल्लै का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनका परिवार भारतीय तमिल मूल का है। उनके दादा 1890 के दशक में भारत से बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां वे गन्ने के खेतों में काम करते थे। उनके बेटे नारायणसामी नायडू के परिवार में 1941 में पिल्लै का जन्म हुआ। वह आठ बच्चों वाले परिवार में पांचवें नंबर पर थीं।
