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अमेरिका के साथ सऊदी भी शामिल हुआ युद्ध में

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद सऊदी अरब पहली बार खुल कर इस लड़ाई में शामिल हुआ है। उसने अमेरिकी फौज के साथ मिल कर ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स यानी पीएमएफ पर हमला किया है। यह हमला इराक में किया गया है। इस हमले में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के चार सदस्य भी मारे गए हैं। ईरानी मीडिया की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है और बताया गया है कि हमले में मारे गए चारों लोग इराक में पीएमएफ के साथ मौजूद थे। हालांकि, इस दावे पर अमेरिका, सऊदी अरब या इराक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ईरान ने भी इस संबंध में बुधवार की शाम तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। दूसरी ओर ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जोरदार जवाबी हमला किया। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए ईरानी मिसाइल हमले के बाद कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस हमले का जोरदार जवाब देगा और ईरान को बुरी तरह सबक सिखाएगा।

असल में ईरान ने मंगलवार रात जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैनिकों पर बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया था। इस पर ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सैनिकों के पास मिसाइलों को रोकने के लिए सिर्फ कुछ मिनट का समय था। उन्होंने इस कार्रवाई का वीडियो भी देखा है। उधर अमेरिका और सऊदी अरब की ओर से ईरान समर्थिक इराकी मिलिशिया पर किए गए हवाई हमलों के बाद इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने अपना सऊदी दौरा टाल दिया है। वे गुरुवार को आधिकारिक यात्रा पर सऊदी अरब जाने वाले थे।

अमेरिका और सऊदी अरब के हमले के बाद पीएमएफ ने बताया कि, इन हमलों में उसके हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें कम से कम 20 लोगों की मौत और 32 अन्य घायल हुए हैं। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। पूर्व इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल सुदानी ने भी इन हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे इराक की संप्रभुता का खुला उल्लंघन, इस्लामी भाईचारे के सिद्धांतों की अनदेखी और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया।

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