नई दिल्ली। केंद्र सरकार लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को रिहा करने के पक्ष में है। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वांगचुक को फिलहाल रिहा नहीं किया जा सकता। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने सरकार से वांगचुक को उनकी खराब सेहत के आधार पर रिहा करने के बारे में पूछा था। इस पर सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक को मेडिकल ग्राउंड पर नहीं रिहा किया जा सकता है।
मेहता ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक की जेल नियमावली के तहत अब तक करीब 24 बार मेडिकल जांच हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वांगचुक पूरी तरह फिट हैं। उन्हें केवल डाइजेशन की समस्या हुई थी और संक्रमण हुआ था, जिसका इलाज किया गया है। तुषार मेहता ने कहा कि इस तरह की समस्या को अपवाद मानकर उन्हें रिहा किया गया तो आगे अन्य लोग भी इस तरह की मांग करेंग।
सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि जिन आधारों पर वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, वे अभी भी कायम हैं। इसलिए स्वास्थ्य कारणों से रिहाई संभव नहीं है और ऐसा करना सही भी नहीं होगा। गौरतलब है कि 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा के दो दिन बाद हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को वांगचुक को गिरफ्तार किया गया था। उनको राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया और जोधपुर जेल में रखा गया है। लेह में हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग घायल हुए थे।
