नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद एवं जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है। अनशन के 16वें दिन उनका वजन 8.2 किलोग्राम घट गया है और रक्त शर्करा का स्तर गिरकर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर पहुंच गया है।
यह जानकारी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) ने जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में दी। बुलेटिन के अनुसार वांगचुक का रक्तचाप 107/70 एमएमएचजी दर्ज किया गया है।
इस बीच, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में कॉजपा का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन 24वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन में शामिल आइसा कार्यकर्ता दीपक की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह भी पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों से तत्काल बातचीत शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आंदोलन जारी रहने और अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत के बावजूद सरकार ने कोई पहल नहीं की है।
दीपके ने कहा कि आंदोलन जवाबदेही की मांग के लिए है और इसे अहंकार का प्रश्न नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संकेत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोनम वांगचुक की गंभीर होती सेहत के बावजूद सरकार ने उनसे बातचीत के लिए किसी मंत्री या प्रतिनिधिमंडल को नहीं भेजा।
वांगचुक का अनशन अब 2011 के अन्ना हजारे के 12 दिन के जनलोकपाल आंदोलन से भी लंबा हो चुका है। इस तुलना पर दीपके ने कहा कि आज की परिस्थितियां अलग हैं और प्रदर्शनकारी अब भी सरकार की ओर से संवाद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
कॉजपा ने यह भी दावा किया कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च में कई विपक्षी दलों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
