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श्रीलंका ने नहीं दी थी अमेरिकी जहाज को मंजूरी

कोलंबो। अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी की परवाह किए बगैर श्रीलंका ने अमेरिका के लड़ाकू विमानों को अपने यहां उतारने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने शुक्रवार को संसद में इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 26 फरवरी को अनुरोध किया था कि जिबूती बेस से दो मिसाइलों से लैस लड़ाकू विमानों को चार से आठ मार्च के बीच मटाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तैनात किया जाए। दिसानायके ने कहा, ‘हमने साफ मना कर दिया। हम अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देंगे’।

राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके ने संसद में कहा कि श्रीलंका अपनी तटस्थ नीति पर कायम है और किसी भी पक्ष के लिए सैन्य आधार नहीं बनेगा। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उसी दिन ईरान ने भी अपने तीन युद्धपोतों को श्रीलंका आने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने कहा, ‘अगर हम ईरान को अनुमति देते, तो हमें अमेरिका को भी देनी पड़ती। इसलिए हमने दोनों को ही मना किया और तटस्थ रुख बनाए रखा’।

गौरतलपब है कि मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी हमले में ईरानी जहाज आईआरआईएस डेना डूब गया, जिसमें ईरान के 84 जवानों की मौत हुई। श्रीलंका की नौसेना ने 32 लोगों को बचाया। राष्ट्रपति दिसानायके ने बताया कि बाद में एक अन्य ईरानी जहाज आईआरआईएस बुशहर को मानवीय आधार पर श्रीलंका में प्रवेश दिया गया, ताकि उसके दो सौ से ज्यादा नाविकों की जान बचाई जा सके।

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